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क्लेम उठाने वाली गैंग के 15 सदस्य गिरफ्तार

क्लेम उठाने वाली गैंग के 15 सदस्य गिरफ्तार

दौसा./  झूठी कहानी रच कर उनका क्लेम उठाने वाली गैंग के 15 सदस्यों को दौसा जिला पुलिस ने गिरफ्तार कर मामले का भण्डाफोड़ किया है। तीन मामलों में से एक में तो एक जिंदा व्यक्ति का ही क्लेम का मामला सामने आया है। खास यह है कि इस मामले में एक सरकारी चिकित्सक, एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्त एएसआई और एक वकील को भी गिरफ्तार किया गया है। ये तीनों दो वर्ष पहले भी क्लेम के ही दो मामलों में गिरफ्तार किए जा चुके हैं तथा जमानत पर चल रहे थे। इस बीच दो वर्ष बाद फिर से इन तीनों सहित कई लोग फिर से गिरफ्तार किए गए हैं।


पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार बेनीवाल ने बताया कि कोतवाली थाने में 24 सितम्बर 2016 को परिवादी बत्तीलाल मीना ने मामला दर्ज कराया था कि उनके पिता रामकुमार मीना सहित लक्ष्मीनारायण रैगर व अन्य लोग भर्तृहरि बाबा के जा रहे थे। मिडवे के पास अज्ञात वाहन ने उनके वा हन को टक्कर मार दी। इसमें रामकुमार व लक्ष्मीनारायण रैगर की मौत हो गई थी। इस मामले की जांच कोतवाली थाने के तत्कालीन एएसआई रमेश जाटव ने पूरी कर अदमपता वाहन व मुलजिम मान कर एफआर न्यायालय में पेश कर दी थी। बाद में इस फाइल को रिओपन कर मामले की जांच तत्कालीन सीओ राजेन्द्र त्यागी ने की थी।

जांच रिपोर्ट में एएसआई एवं जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सतीश खण्डेलवाल ने सांठ-गांठ कर मृतकों की पंचायतनामा व पोस्टमार्टम की कार्यवाही फर्जी पाए जाने पर पूर्व अनुसंधान अधिकारी की जांच को झूठा पाया गया था। इस पर कोतवाली थाना पुलिस ने एएसआई एवं चिकित्सक के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। जांच में मृतक रामकुमार मीना की मौत तीन महीने पहले टीबी की बीमारी से होना पाई गई। इस मामले में एएसआई, चिकित्सक के अलावा एडवोकेट चतुर्भुज मीना को लोगों को दुर्घटना का क्लेम उठवाने का झांसा देकर झूठा मुकदमा दर्ज करवाने व आरोपियों के साथ षडय़ंत्र में सहभागी बन कर क्लेम राशि का संदोष लाभ प्राप्त करना प्रमाणित पाया गया।

इसी प्रकार एक मामला कोतवाली थाने में 89/17 नम्बर का दर्ज हुआ। इसके अनुसार 26 जनवरी 2017 को परिवादी व उसके दोस्त अरुण मोटर साइकिल पर बैठ कर दौसा में गणेशपुरा में किसी देव स्थान पर आना व एक पिकअप से अरुण व मनोज की मौत होना बताया गया। मामले की एएसआई रमेश चंद द्वारा जांच की गई तो शवों का पोस्टमार्टम करा कर अदमपता में एफआर दे दी गई। पहले केस की तरह इस मामले में भी फाइल को रीओपन किया गया तो जांच में दोनों की मौत नहीं हुई पाया गया। इसमें एएसआई रमेश चंद, चिकित्सक सतीश खण्डेलवाल व वकील चतुर्भुज मीना को लोगों का क्लेम दिलाने का झांसा देकर क्लेम उठाने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराने के लिए दोषी पाया गया।

इसी प्रकार तीसरे मामले में कोतवाली थाने में 14 अक्टूबर 2016 मेें 753/16 नम्बर की एफआईआर दर्ज हुई। इस रिपोर्ट में लिखा गया कि रामगढ़पचवारा थाना इलाके के भांवता निवासी जंसीराम व सिण्डोली निवासी को किसी अज्ञात वाहन द्वारा टक्कर मारने पर जिला अस्पताल में ले जाना बताया गया। जहां पर दोनों को मृत घोषित करना बता कर पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमार्टम करना बताया गया। इस मामले में भी एएसआई रमेश चंद ने मामले को अदमपता में एफआर दे दी। फाइल दुबारा खोली गई तो जांच में पाया गया कि उनकी मौत के एक महीने 16 दिन बाद झूठी कहानी रच कर एएसआई, चिकित्सक एवं वकील ने लोगों को दुघर्टना बीमा दिलाने का झांसा दिया गया। जबकि जंसीराम की मौत हार्ट अटैक एवं नाथूलाल की मौत कैंसर से हुई थी।

तीस लाख रुपए का क्लेम उठा लिया

कोतवाली थाना पुलिस ने लोगों की बीमारी से मौत हुई थी और उनकी सड़क दुघर्टना बता कर दो मामलों में 30 लाख रुपए का क्लेम राशि उठा ली। कोतवाली थाने के एसआई राजेश कुमार ने बताया कि जंसीराम व नाथू के मामले में 10 लाख रुपए व एक अन्य मामले में 20 लाख रुपए का क्लेम उठाया।

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