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कोरोना काल की 17वीं काव्य संध्या सम्पन्न

कोरोना काल की 17वीं काव्य संध्या सम्पन्न

 भीलवाड़ा (पंकज-हलचल)। नवमानव सृजनशील चेतना समिति के तत्वावधान में कोरोना काल में आयोजित वर्चुअल व प्रत्यक्ष काव्य संध्याओं के पश्चात रविवार को 17वीं काव्य संध्या विश्व भाईचारा दिवस,स्वामी रामकृष्ण परमहंस व छत्रपति शिवाजी जयंती एवं विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में ओशो सुरधाम ध्यान केंद्र में आयोजित की गई। संस्था संयोजक कवि एसके लोहानी ख़ालिस ने काव्य संध्या की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि डॉ एमपी जोशी व विशिष्ट अतिथि इंजी.एसएस गंभीर थे। सरस्वती वंदना लाजवंती शर्मा  ने प्रस्तुत की। महासचिव कविता लोहानी ने बताया कि काव्य संध्या का शुभारंभ कवि ख़ालिस ने अपनी हिन्दी गज़ल "एक तुम्हीं हो जो इन आँखों से बोलती हो, एक तुम्हीं हो जो मन भावों में डोलती हो" एवं "मनुज तन प्रभु का दिव्य मंदिर है, अखण्ड दीया जलता अंदर है, दिल है वो दीया बुझता नहीं,दिल तन का तंग सबसे सुन्दर है" से किया। बंशी पारस ने कविता "कोरोना हो जाए किनको--जो नफरत की बेल को सींचकर फैलायें, अफवाहें फैलाकर दंगे कराएं, जहरीले भाषण देकर हिन्दू-मुस्लिम को लडायें, या रब उन सबको कोरोना हो जाए" सुनाई जिसके लिए उन्हें श्रेष्ठ रचनाकार का उपरणा व माला पहनाकर छठा सम्मान दिया गया। अरुण अजीब ने "इस कायनात में जो धुंधली-सी रौशनी है, हिन्दी मेरी माता की चमकीली ओढनी है", गुलाब मीरचंदानी ने हाईकू "नेता चाहते, सुविधा समीकरण, जीत का रण", "कवि चाहता, रचना निरंतर,यश अपार" व कविता "पेश है प्यार की अधूरी पंक्तियाँ", डॉ महावीरप्रसाद जोशी ने "हिन्दी है जन-जन की भाषा,इसी से देश की पहचान है", लाजवंती शर्मा ने गीत "भाईचारा हमें सबसे निभाना है, पशु-पक्षी और वनस्पति को भी बचाना है', डा.अवधेश जौहरी ने सस्वर गज़ल "तुलसी न कभी सूर न कबीर ही हुआ, जिसने किया है इश्क वो फकीर ही हुआ", इंजी.एसएस गंभीर ने "कश्मीर हमारा था,है और रहेगा, दृढ निष्ठा से आतंकियों का सफाया करो प्रचण्ड", योगेन्द्र सक्सेना योगी ने "बाहों के झूले में झूला झुलाइके चंचल चित्त चोर चुरायो", श्यामसुन्दर तिवाड़ी मधुप ने "आँख-मिचौली कर रहा सूरज दिनभर आज", रंजनासिंह चाहर ने "कोयल ने जब कूक-कूक कर मधुर आवाज लगाई,मोर यहाँ पर नाचन लागे गुनगुन भंवरों ने ताल बजाई", नरेन्द्र वर्मा ने "मायड म्हारी बोली छे राजस्थानी, जण-जण री चहेती जुबानी" और दीपक पारीक ने "सदा-सर्वदा मस्त रहाकर मौसम मौसम क्या करता है, तू मुझे छले मैं तुझे छलूँ ऐसा सिस्टम क्या करता है" प्रस्तुत की। अंत में सभी कवियों द्वारा दिवंगत कवि माधव दरक, नरेंद्र दाधीच, जीपी पारीक व गोपाल पंचोली को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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