71वां निरंकारी सन्त समागम सम्पन्न

71वां निरंकारी सन्त समागम सम्पन्न

Thu 29 Nov 18  5:12 pm

भीलवाडा (हलचल)  निरंकारी आध्यात्मिक स्थल जी.टी. रोड़ (हरियाणा) समालखा में तीन दिवसीय 71वां वार्षिक निरंकारी सन्त समागम प्रेमपूर्वक सद्भावपूर्वक, एकत्व एवं मिलवर्तन के साथ सम्पन्न हुआ।

ज्ञान की रोशनी से नफरत प्यार में बदल जाती है, यह तभी संभव होता है जब हमें एक निरंकार प्रभु परमात्मा की जानकारी हासिल हो जाती है। निरंकारी मिशन का यही संदेश है कि आपस में जाति-पाति का कोई भेदभाव नहीं होना चाहिये। ये उदगार सद्गुरू माता सुदीक्षा जी ने हरियाणा में सम्पन्न हुए तीन दिवसीय 71वें वार्षिक निरंकारी संत समागम में भारत के कोने-कोने तथा दूर देशों से आये हुए लाखों श्रद्धालु भक्तांे के विशाल जन समूह को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

मण्डल के भीलवाड़ा मीडिया सहायक लादूलाल के अनुसार भीलवाड़ा से भाग लेने गए हमारे निरंकारी भक्त स्थानीय संयोजक जगपाल सिंह के नेतृत्व में सद्गुरू माता सुदीक्षा  महाराज का आर्शीवचन का लाभ प्राप्त कर पूरे जोश और उत्साह के साथ शहर लौट आये है।

मीडिया प्रभारी लादूलाल के अनुसार समागम में आध्यात्मिक सत्संग के दौरान देश के भिन्न-भिन्न भागों तथा दूर देशों से आये संताेें और प्रचारकों ने गीतों, कविताओं एवं व्याख्यानों द्वारा हिन्दी, पंजाबी, सिन्धी, राजस्थानी, बंगाली, भोजपुरी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, ओडिया, हिमाचली, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, हरियाणवीं आदि प्रादेशिक भाषाओं का प्रयोग कर ईश्वर से नाता जोड़ने तथा मिलवर्तन और भाईचारे के साथ जीवन जीने का समान संदेश दिया।

सद्गुरू माताजी ने बताया कि जब हम प्रत्येक संत में निरंकार प्रभु का रूप देखते है और समीप बैठे सन्त के प्रति नतमस्तक होते है तो हमें आशीर्वाद मिल जाता है। इसी प्रकार से अगर कोई सत्संग से दूर हो गया हो तो आप अपने भक्तिभाव, समर्पण एवं विश्वास से फिर उसे सत्संग से जुड़ने की प्रेरणा दे सकते है। सद्गुरू माताजी ने कहा कि एक बुझा हुआ दीपक भी जले हुए दीपक से पुनः प्रज्ज्वलित हो सकता है। सद्गुरू माताजी ने निरंकारी भक्तों को संदेश दिया कि अपने जीवन में निरंतर सत्संग, सेवा, सुमिरन करते रहे। समागम के दौरान क्षैत्रीय संचालक जयप्रकाश तोमर, हरिचरण सिंह, शिक्षक रमेशचन्द्र मेहरा के सानिध्य में भीलवाड़ा के सैकड़ों सेवादल 10 दिन तक लंगर व पार्किंग में अपनी दिन-रात निःस्वार्थ सेवायें देकर सद्गुरू के आर्शीवाद के पात्र बने।