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मोह से युक्त मुनि से गृहस्थ श्रावक अच्छा है : मुनि श्रद्धानंद

मोह से युक्त मुनि से गृहस्थ श्रावक अच्छा है : मुनि श्रद्धानंद

उदयपुर  । केशव नगर स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित चातुर्मास के तहत शनिवार को विभिन्न आयोजन के साथ नित्य नियम पूजन प्रक्षाल जलाभिषेक आदि हुए।  श्रद्धानंद महाराज एवं मुनि पवित्रा नंद  महाराज ने विद्या वसु सभागार में  मुनि श्रद्धा नंद महाराज ने अपने प्रवचन ने कहा कि मोह से रहित कोई भी व्यक्ति वह मोक्ष मार्गी होता है एवं मोह  से युक्त मुनि मोक्ष मार्ग के लायक नहीं है। उस मुनि से गृहस्थ श्रावक  मोक्ष मार्गी होता है उन गृहस्थों के आगे वह मुनि बेकार है जो मोह से युक्त है । रिश्तो को तोड़ना हो तो ऐसे तोड़ो जब वह तुम्हारे काम आ जाए ऐसे ही मित्यात्व को तोड़ने की क्रिया है तीनों लोकों में तीनों कालों में सम्यक दर्शन के समान कल्याणकारी कोई नहीं है सम्यक दर्शन कल्याणकारी होता है तथा मिथ्या दर्शन अकल्याणकारी होता है। सम्यक दर्शन से शुद्ध जीव अव्रती होते हुए भी नारकी , तियंच , नपुंसक, स्त्री पर्याय ,नीच पना, विकलांग, अल्पआयु ,दरिद्रता को प्राप्त नहीं होते हैं। 

    आदिनाथ युवा परिषद के प्रचार संयोजक शांति  कुमार कासलीवाल ने बताया कि कल रविवार को मुनि श्री (जवानी का जोश) विषय पर प्रवचन करेंगे  तथा11 तारीख गुरुवार को रक्षाबंधन के पावन दिन 700 मुनिराज पर उपसर्ग हटने के अवसर पर विद्या वसू सभागार में 700 अर्घ चढ़ाकर यह पर्व मनाया जाएगा । 

         चातुर्मास सेवा समिति के कूंथू कुमार गणपतोत और  कैलाश जैन  एवं जिनेन्द्र गांगावत   ने  यह  बताया कि चित्र अनावरण रोशन लाल आवोत, हिम्मत जेतावत द्वारा किया गया तथा मुनि का पाद प्रक्षालन धीरज जैन ऋषभ जैन द्वारा किया गया एवं शास्त्र भेंट शोभा गांधी निर्मला जैन द्वारा किया गया तथा मंगलाचरण सुलोचना गंगवाल ने किया  ।