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आचार्य महाश्रमण ने   धवल सेना के साथ  महाश्रमण सभागार में किया मंगल प्रवेश

आचार्य महाश्रमण ने   धवल सेना के साथ  महाश्रमण सभागार में किया मंगल प्रवेश

भीलवाड़ा हलचल– मेवाड़ के भीलवाड़ा में आज 260 साल बाद आचार्य महाश्रमण का चातुर्मास में ग्‍यारहवें अहिंसा यात्रा प्रणेता शांतिदूत पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी चतुर्विध धर्मसंघ के साथ तेरापंथ महाश्रमण सभागार में मंगल प्रवेश किया।आचार्य की अगवानी के लिए जैन व अजैन लोग वहा पहुंचे थे। सड़क के एक तरफ बालिकाए अपने हाथों में लाल ध्वज लहराते हुए उनका स्वागत किया। वही युवा मोर पंख लगाए हुए टेबुल पर खड़े होकर नाच रहे थे। मुख्य द्वार के बाहर दोनो और चार नगाड़े लगाए गए थे। जिसे युवा जोश के साथ बजा रहे थे। इस दौरान जय-जय ज्योतिचरण, जय-जय महाश्रमणÓ, 'महाश्रमण जी ने घणी-घणी खम्माÓ, 'तेरापंथ सरताज ने घणी-घणी खम्माÓ, 'नेमा जी रा लाल ने घणी-घणी खम्माÓ, आदि उद्घोष से सारा वातावरण भक्तिमय हो गया। पंजाब से आए बैण्ड वादकों ने शानदार बैंड वादन किया। तथा लोगों को अपने करतब दिखाए। बालिकाए उनके स्वागत के लिए मुख्य द्वार के पास खड़ी, लेकिन वे स्वागत गीत नहीं गा सकी। इसके अलावा समाज की महिलाए केसरिया परिधान में तो पुरुष सफेद परिधान पहनकर आए थे।

तेरापंथ नगर आदित्य विहार, प्रातः 09 बज कर 21 मिनट पर जैसे ही शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी ने महाश्रमण सभागार में चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश किया पूरा वातावरण 'जय जय ज्योतिचरण - जय जय महाश्रमण' के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। हर ओर श्रद्धा-भक्ति का अनूठा दृश्य दिखाई दे रहा था। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में आचार्यश्री का यह चातुर्मास प्रवेश अनेक दृष्टियों से ऐतिहासिक रहा। भीलवाड़ा में तेरापंथ के आचार्यों का यह पहला चातुर्मास है। आचार्य श्री के साथ भी प्रथम बार 200 से अधिक साधु-साध्वियां चातुर्मास में है। देश- विदेश की हजारों किलोमीटर पदयात्रा संपन्न कर मेवाड़ पधारे गुरुवर के स्वागत में सभी में उत्साह-उमंग की नई लहर छाई हुई है।

प्रशासनिक दिशा-निर्देश एवं कोविद गाइडलाइन के मद्देनजर प्रवेश जुलूस का आयोजन नहीं रखा गया था। साधु-साध्वियों की धवल पंक्ति के मध्य आचार्य प्रवर को मंगल प्रवेश करता देख सभी श्रद्धानत थे। भीलवाड़ा वासियों का वर्षों पूर्व देखा गया स्वप्न आज साकार हो गया, ऐसा लग रहा था मानो भीलवाड़ा शहर महाश्रमणमय बन गया हो।

स्वागत समारोह में आचार्य प्रवर ने कहा- इस संसार में जब मंगल की बात आती है तो कई चीजों का नाम आ सकता है। कोई मुहूर्त आदि को मंगल मानता है, तो कहीं गुड़, नारियल आदि को भी मंगल माना जाता है, परंतु ये सब उत्कृष्ट मंगल नहीं है। धर्म ही उत्कृष्ट मंगल होता है। धर्म साथ में है तो फिर सदा मंगल है।अहिंसा, संयम, तप ये धर्म के लक्षण हैं। जीवन में अगर ये है, तो मानो धर्म है, अध्यात्म है। अहिंसा एक ऐसा तत्व है जो लोक में सबके लिए क्षेमंकरी है, कल्याणकारी है। आज समाज, राजनीति में भी अहिंसामय नीति होनी चाहिए। लोकतंत्र हो या राजतंत्र दोनों जनता की भलाई के लिए होते हैं। किसी भी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं हो सकता। अहिंसा, प्रेम-मैत्री से भी समस्या सुलझाई जा सकती है।

गुरुदेव ने प्रेरणा देते हुए आगे कहा कि- इस भारत देश में धर्मनिरपेक्षता ही नहीं पंथनिरपेक्षता भी है। सबको अपनी रुचि अनुसार धर्म करने की छूट है। भारत एक आजाद देश है, आजादी के साथ संयम, अनुशासन का होना बहुत जरूरी है। लोकतंत्र में अगर कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन नहीं तो देश का विकास नहीं हो सकता। साथ ही सत्ता में निस्वार्थ सेवा रूपी तप भी होना चाहिए। सत्ता में आकर अगर जनता की सेवा ना करें तो वह व्यर्थता है। अहिंसा, संयम और तप रूपी धर्म जीवन में आ जाए तो व्यक्ति अपना जीवन सार्थक कर सकता है।

चातुर्मास प्रवेश पर गुरुदेव ने कहा कि- यह चातुर्मास का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। वर्षभर यात्रा के पश्चात ये चार महीने ऐसे होते हैं जब साधु को एक स्थान पर रहना होता है। आज चातुर्मास हेतु यहां प्रवेश हुआ है। कितने ही रत्नाधिक व छोटे साधु-साध्वियां वर्षों बाद इस बार साथ में है। यहां की जनता भी जितना हो सके उतना धर्म का लाभ उठाएं। यह चातुर्मास उपलब्धिकारक रहे, मंगलकामना।

साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभा जी ने उद्बोधन में कहा- आचार्यश्री एक महान यात्रा, विजय यात्रा कर यहां पधारे हैं। मेवाड़ के श्रावकों में विशिष्ट भक्ति है। चातुर्मास में सभी लक्ष्य बनाएं कि हमें गुरुवर की वाणी को आत्मसात कर जीवन में अपनाना है। यह सिर्फ भीलवाड़ा का ही नहीं पूरे मेवाड़ का चतुर्मास है।

 

इस दौरान पंजाब के राज्‍यपाल वी.पी.सिंह, सांसद सुभाष बहेडिया, पूर्व मंत्री और डेरी चेयरमैन रामलाल जाट, विधायक विठ्ठल शंकर अवस्‍थी, ,नगर परिषद् सभापति राकेश पाठक, भाजपा जिलाध्‍यक्ष लादू लाल तेली और पूर्व विधायक विवेक धाकड आचार्य महाश्रमण चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष प्रकाश सुतरिया, स्वागताध्यक्ष महेंद्र ओस्तवाल, वरिष्ठ श्रावक नवरतन झाबक ने   ने आचार्य महाश्रमण का स्‍वागत सम्‍बोधन   किया।। संचालन मुनि दिनेश कुमार व व्यवस्था समिति के महामंत्री निर्मल गोखरू ने किया।

          शांतिदुत आचार्य महाश्रमण ने अपने सम्‍बोधन में कहा कि अहिंसा सबसे बडा धर्म है मगर यदी राष्‍ट्र रक्षा में गृहस्‍थ व्‍यक्ति को भी हथियार उठाने पडे तो वह जायज है क्‍योंकी मातृभूमी की रक्षा करना हमारा लक्ष्‍य होना चाहिए। यह हथियार उठाना एक आवश्‍यक कोटी की हिंसा है क्‍योंकी यहां लक्ष्‍य मातृभूमी का रक्षा करना होता है। आचार्य महाश्रमण ने राजनेती पर अपने विचार रखते हुए कहा कि राजने‍ती सेवा का एक अच्‍छा साधन है और राजनेती में आदमी ना आये तो देश आगे बढेगा कैसे। इसमें निस्‍वार्थ भाव बना रहे तो यह एक ऊंच कोटी की सेवा है। सत्‍ता पा लेना बढी बात है मगर यह सुख भागने के लिए नहीं सेवा करने के लिए है राजनेती में आकर जनता की सेवा ना करें तो फिर राजनेती में आना ही बेकार है। आचार्य महाश्रमण के प्रवचन सुनने चण्डिगढ से आये पंजाब के राज्‍यपाल वी.पी.सिंह बदनौर ने कहा कि आचार्य महाश्रमण ने जो हम लोगों को लोकतंत्र, हमारी जिम्‍मेदारी, हमारे कर्त्‍यव्‍य का पाठ पढाकर उपदेंश दिया। आचार्य महाश्रमण के मंगल प्रवेश की एक झलक देखने के लिए पूरा शहर उमड़ पड़ा था। लेकिन पुलिस के कड़े प्रबन्ध के चलते लोगों को ओवरब्रिज के पास ही रोक दिया गया था। वही जो लोग तेरापंथ नगर में थे उन्हें आचार्य के मंगल विहार से पहले ही उन्हें जैन मुनि ने बाहर निकाल दिया था। मंगल प्रवेश के दौरान एडीएम (प्रशासन) राकेश कुमार, उपखण्ड अधिकारी ओमप्रभा, उपपंजीयक अजितसिंह, तहसीलदार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेन्द्रसिंह जोधा, पुलिस उप अधीक्षक राहुल जोशी, शहर कोतवाल दुर्गा प्रसाद दाधीच समेत अन्य अधिकारी व्यवस्था बनाए रखने में लगे हुए थे।

आचार्य महाश्रमण ने   धवल सेना के साथ  महाश्रमण सभागार में किया मंगल प्रवेश
आचार्य महाश्रमण ने   धवल सेना के साथ  महाश्रमण सभागार में किया मंगल प्रवेश