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आत्मनिर्भरता के लिए मुर्गीपालन अपनाये-कोषाधिकारी

आत्मनिर्भरता के लिए मुर्गीपालन अपनाये-कोषाधिकारी

भीलवाड़ा । कृषि विज्ञान केन्द्र भीलवाड़ा द्वारा आयोजित एवं आत्मा भीलवाड़ा द्वारा प्रायोजित सम्बद्ध क्षेत्र प्रदर्शन वर्ष 2022-23 के तहत् कृषक रूचिकर समूह के किसानों को मुर्गीपालन व्यवसाय हेतु प्रतापधन चूजे की 22 इकाईयाँ पंचायत समिति सुवाणा के कृषक एवं कृषक महिलाओं को उपलब्ध करवाई गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के कोषाधिकारी लोकेश कुमार यादव ने बताया कि किसान भाई आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनने के लिए मुर्गीपालन व्यवसाय अपनाये साथ ही मुर्गियों में स्वास्थ्य एवं आवास हेतु तकनीकी जानकारी से अवगत कराया। 
केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डाॅ. सी. एम. यादव ने मुर्गियों की उन्नत नस्लें, उपलब्धता, विपणन, आवास एवं आहार प्रबन्धन, मुर्गीपालन हेतु आवश्यक उपकरण, प्रमुख रोग एवं रोकथाम की तकनीकी जानकारी और केन्द्र पर स्थापित मुर्गीपालन इकाई का भ्रमण करवाते हुए मुर्गियों के चूजों में टीकाकरण की तकनीकी जानकारी से लाभान्वित किया। डाॅ. यादव ने पशुओं में फैल रहे लम्पी स्किन डिजीज के कारण, लक्षण एवं बचाव की तकनीकी से अवगत कराया। शस्य वैज्ञानिक डाॅ. के. सी. नागर ने जैविक तरीके से मुर्गीपालन कर आमदनी बढ़ाने हेतु मुर्गियों को जैविक दाना, जैविक खाद्य अपशिष्ट खिलाने की आवश्यकता जताई। 
एमपीयूएटी के पीएफएमएस प्रभारी राजेन्द्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि मुर्गीपालन कम पूँजी, कम समय, कम मेहनत और कम जगह में किया जाने वाला व्यवसाय है जो लघु एवं सीमान्त किसानों के लिए भी संभव है। 
सहायक कृषि अधिकारी दिनेश पंवार ने बताया कि योजना के तहत् प्रति मुर्गीपालक को प्रति इकाई 25 प्रतापधन के चूजे, दो पानी के बर्तन एवं दो दाना खिलाने के बर्तन आत्मा योजनान्तर्गत सम्बद्ध क्षेत्र प्रदर्शन के तहत् निःशुल्क उपलब्ध करवाये जा रहे है। कार्यक्रम में लिपिक ग्रेड प्रथम महेश सुवालका, लिपिक ग्रेड द्वितीय अजित सिंह राठौड़, सेवानिवृत्त सहायक लेखाधिकारी विवेक माथुर उपस्थित थे।