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संवेदनहीनता के बाद बारी आएगी नाटक की

संवेदनहीनता के बाद बारी आएगी नाटक की

होती होगी, नेताओं और अभिनेताओं में भी समानता होगी। लेकिन जैसी समानता युद्ध और महामारी में होती है, वैसी समानता किसी में नहीं होती। ऐसा साथ और ऐसा गाढ़ा रिश्ता भी किसी का नहीं होता होगा, जैसा इनका होता है। पहले तो युद्ध और महामारी का चोली-दामन वाला साथ ही माना जाता था। बल्कि उस जमाने में तो अकाल भी इनके साथ जुड़ जाता था और यह मिलकर तीन तिलंगे हो जाते थे। यह सब मौत लेकर आते हैं। तबाही और बर्बादी लेकर आते हैं। भूख और गरीबी लेकर आते हैं। लेकिन एक चीज जो यह नायाब लेकर आते हैं, उससे हम ज्यादा वाकिफ नहीं हैं और वह यह कि यह सब संवेदनहीनता भी लेकर आते हैं। अगर आप नेताओं के नाटकों से ऊब गए हों, उनके वादों और आश्वासनों से तंग आ चुके हों तो महामारी तथा युद्ध काल में उनकी संवेदनहीनता आपको देखनी चाहिए। आपका टेस्ट बदल जाएगा, यह तय है। ऐसे मौकों पर वे एकदम ही नयी चीज पेश करते हैं। वे न कल महामारी के दौरान सैकड़ों मील पैदल चलते प्रवासी मजदूरों की पीड़ा से पिघल रहे थे, न ही उनकी त्रासदियों से पिघल रहे थे। उनके जख्म और उनके छाले जब लोगों की आत्माओं तक को झकझोर रहे थे, तब इन नेताओं ने अपनी संवेदनाओं को छुट्टी पर भेज दिया था।

आज युद्ध के दौरान भी वही हो रहा है। जैसे तब बेचारे मजदूर शहरों में फंस कर रह गए थे, अपनी कोठरियों में घुट रहे थे और अपने गांव-घर निकल भागने को बेचैन थे, वैसे ही आज यूक्रेन में हमारे छात्र अपने फ्लैटों में घुटने को मजबूर थे और किसी तरह अपने देश, अपने घर पहुंचने को बेचैन हैं। जैसे तब मजदूर रेलवे स्टेशनों की तरफ भाग रहे थे, वैसे ही यूक्रेन में फंसे यह बच्चे भी रेलवे स्टेशनों की तरफ भाग रहे थे। जैसे तब हमारे यह मजदूर अलग-अलग राज्यों की सीमाओं को डरते-डरते पार कर रहे थे, वैसे ही आज यह बच्चे भी पोलैंड और रोमानिया की सीमाओं पर डरते-डरते ही पहंुच रहे हैं। तब मजदूरों को पुलिस पीट रही थी, आज इन बच्चों की उन देशों की फौज-पुलिस पीट रही है। तब मजदूरों को दुत्कारा जा रहा था, आज बच्चों को दुत्कारा जा रहा है। तब नेता इन मजदूरों के बारे में कह रहे थे-यह हमारे यहां आकर कोरोना फैलाएंगे। आज इन बच्चों के बारे में कहा जा रहा है कि ये गए ही क्यों थे? अरे ये वे थर्ड क्लास बच्चे हैं, जिन्हें यहां दाखिला नहीं मिलता। इस संवेदनहीनता के बाद बारी आएगी नाटक की। मदद का नाटक होगा, उन्हें बचाकर लाने का नाटक होगा। इसके बाद बारी आएगी श्रेय लूटने की।