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सावधान "टाइगर" गश्त पर है... कप्तान "सो" नहीं रहे और "नींद" "खिलाड़ियों" की उड़ी

सावधान


    -  सुशील चौहान-
भीलवाड़ा। "बजरी बंदी" की आड़ में "चांदी" काट रहे पुलिस कर्मियों की नींद उड़ गई है और कारण है "पुलिस कप्तान" की रात्रि "गश्त"। टाइगर इन दिनों जिले की "बेपटरी" हुई "कानून व्यवस्था" की गाड़ी की फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में है। इसके लिए कप्तान साब ने पहले बजरी वाले थानों की "नब्ज टटोली" तो व्यवस्था की बजरी में "कंकर" मिले है।  टाइगर बडलियास थाने अचानक पहुँचे तो थाना अधिकारी "नदारद" थे। लिहाज़ा थाना इंचार्ज की "एब्सेंट" मार्क हो गयी। इसी तरह  थाने में टाइगर ने दस्तक दी तो वहाँ थाने में पार्टी करने की सूचना मिली अब खंगाला यह जा रहा है कि पार्टी थानेदार जी के "खर्चे" की थी या "प्रायोजक" कोई ओर रहा क्यों की पार्टी का खर्चा पानी किसी ओर ने किया है तो "बजरी" में "कंकर" की "बू"आने का अंदेशा है। अब इन  कार्यक्रम से  जिले भर के दूसरे थानेदारो में "खलबली" के साथ ही डर भी कि टाइगर की "लालबत्ती की गाड़ी" का "स्टेयरिंग" कही उनके ओर "रुख" न कर ले । अब ख़ौफ़ का आलम यह है कि "मुखबिरों" की "हेल्प" ली जा रही है यह पता करने के लिए कि टाइगर साब की "लोकेशन" क्या है। वैसे बजरी बंदी के बाद बजरी वाले थानों ने जमकर "लक्ष्मी पूजन" किया है। क्या तो  प्रभारी  ओर क्या थाने की अंतिम कड़ी । सभी की मौज हो रखी है। समाचार गाहे बगाहे टाइगर साब के कानों तक गए तो "एक्शन" होना तो "लाज़मी" है। ऐसे में टाइगर साब द्वाराअपनी "नींद" त्याग कर थानों में  दस्तक देने से थाने वालों की नींद उड़ गई है। यह सोचकर कि कही "लपेटे" में आ गए तो लाइन- लाइन खेलना पड़ जायेगा। और हुआ भी यही थानेदार साब को अपने जन्मदिन की पार्टी मनाना भारी पड़ गया। थानेदार सहित उनके हम निवाला दोस्त जब डीजे पर थिरके तो थिरकने की आवाज पहुंच गई कप्तान के पास।  बस फिर क्या थानेदार के हो रहे " विकास" में दरार डाल दी क्योंकि  साब नहीं चाहते कि खाकी के नाम पर कोई अपना विकास करें। बस कप्तान साब ने अपनी रात की नींद त्याग कर निकल पड़े अपने थानेदारों का असली " ,बायोडाटा" लेने। जब कप्तान ने बायोडाटा की तहकीकात की तो सारा "झमेला" सामने आ गया।   नतीजा यह निकला की थानेदार साब को थाने में नहीं मिलने और "डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दो" पर थिरकने का इनाम मिला की लाइन में रह कर "लगाओ खूब ठुमके" ।
बस कप्तान साब की एक रात की नींद ने सभी थानेदारों की नींद उड़ा दी हैं अब वो कप्तान साब के कार्यालय के कर्मचारियों को "पटा" रहे हैं कि बस इतना बता देना की कहीं साब "हमारी" ओर तो नहीं आ रहे। इसके लिए वो एसपी कार्यालय के कारिंदों की "सेवा" में लग गए हैं।
कप्तान साब भी जिला कलेक्टर शिव प्रसाद एम नकाते की तर्ज पर अपने महकमे की खबर लेने निकल रहे हैं। नकाते साब भी शहर के हालात जानने कभी पैदल तो कभी मोटरसाइकिल तो कभी स्कूटर पर आधी रात के बाद निकले। बस जिला हाकिम की तरह पुलिस कप्तान भी निकल पड़े अपने थानेदारों की सीआर चैक करने।अब देखना की कप्तान साब की " कसौटी" पर कौन "खरा" उतरता हैं और कौन "लाइन" की "शोभा" बनेगा। खैर जो भी हो लेकिन जिले के दोनों आला अधिकारी अपनी नींद त्याग कर शहर के लिए जाग रहे हैं ताकि लोगों को सुविधाएं मिले।

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