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रेमडेसिवीर की किल्लत के बीच कालाबाजारी, 30-40 हजार में बिक रहा है इंजेक्शन

रेमडेसिवीर की किल्लत के बीच कालाबाजारी, 30-40 हजार में बिक रहा है  इंजेक्शन

दिल्ली ।कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन रेमडेसिवरी की किल्लत के बीच कई राज्यों में इसकी कालाबाजारी हो रही है। मेडिकल प्रेक्टिशनर्स और इसे खरीदने वाले लोगों के मुताबिक 5,400 रुपए की कीमत वाले इंजेक्शन के लिए जरूरतमंदों को 30 से 40 हजार रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है।  

 

अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों के इलाज के लिए रेमडेसिवीर का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, कई रिसर्च में यह कहा जा चुका है कि यह दवा वायरल बीमारी के इलाज में बहुत अधिक प्रभावी नहीं है। बेंगलुरु में हर्षा हॉस्पिटल एंड मेडिकल स्टोर के मैनेजिंग पार्टनर एस शिवकुमार ने कहा कि उन्हें यह दवा ना तो कंपनी से मिल पाई है और ना ही होलसेल डीलर्स से।

 

शिवकुमार ने  बताया, ''हम इंजेक्शन के लिए पिछले 10 दिनों से इंक्वायरी कर रहे हैं, वे (कंपनी और होलसेल डीलर्स) जवाब में सिर्फ नो स्टॉक कहते हैं।'' शिवकुमार ने यह भी बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को भी लेटर लिखा है। ब्लैक मार्केटिंग में पुलिस जांच की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि शहर में 25 हजार रुपए में इंजेक्शन बिक रहा है। 

 

 

उन्होंने मुख्यमंत्री को लेटर में लिखा, ''मेरे संज्ञान में लाया गया है कि कुछ लोग अवैध रूप से यह इंजेक्शन ब्लैक मार्केट में बेच रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए, हेटेरो-रेमडेसिवीर इंजेक्शन: 100mg इंजेक्शन 20 ml, COVIFOR (batch no. REM121003 and manufacturing date: 02/2021, Expiry date: 11/2021), जिसे 1500 से 2000 रुपए में बिकना चाहिए, 15 से 25 हजार रुपए में बेचा जा रहा है। इसलिए कृपया जांच कीजिए और दूसरे बैच के बारे में भी पता करिए।''

 

अलग-अलग ब्रैंड के रेमडेसिवरी की कीमत अलग अलग है। हेटरो कंपनी के इंजेक्शन की कीमत 5,400 रुपए है तो मायलन और जुबिलेंट कंपनी के इंजेक्शन की कीमत 4,700 रुपए, रेड्डी के लिए 5,400, सिपला के लिए 4,000 और जायडस की कीमत 899 रुपए है।

 

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के कोऑर्डिनेटर मोहम्मद फहाद ने भी ऐसा ही अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, ''मैं अपने दोस्त की मां के लिए इंजेक्शन खरीदने की कोशिश कर रहा था। मैं कई अस्पतालों में गया लेकिन इंजेक्सन आउट ऑफ स्टॉक था। एक मेडिकल स्टोर के मालिक ने मुझे एक नंबर दिया जो इस दवा को उपलब्ध करा सकता था। जब मैंने फोन किया तो उसने प्रति डो 7500 रुपए मांगे, जोकि लगभग दोगुनी कीमत है। काफी तलाश के बाद हम इंजेक्शन एमआरपी पर खरीदने में सफल रहे, लेकिन जब अस्पतालों में दवा नहीं है तो इन एजेंट्स के पास कहां से स्टॉक आया?''

 

इसी तरह बिदार में एक परिवार को पिछले सप्ताह रेमडेसिवीर इंजेक्शन के लिए 40 हजार रुपए खर्च करना पड़ा था। मरीज के एक रिश्तेदार ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया, ''मेरे चाचा कोरोना मरीज थे और उन्हें इस इंजेक्शन की जरूरत थी। हमें एक इंजेक्शन अस्पताल से मिल गया था। लेकिन दूसरा, तीसरा और चौथा डोज अस्पताल में नहीं था। हमें कुछ प्राइवेट पार्टीज से संपर्क करने को कहा गया, जिसने पहले इंजेक्शन के लिए हमसे 40 हजार और दूसरे, तीसरे के लिए 30 हजार रुपए लिए। ब्लैक मार्केट में भी हमें और इजेक्शन नहीं मिले इसलिए हमें हैदराबाद आना पड़ा।''

 

रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के गृहमंत्री बासावाराज बोमाई ने गुरुवार को दवा की फर्जी किल्लत बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ''राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि रेमडेसिवीर के इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है। लेकिन फर्जी किल्लत बनाई जा रही है। सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है और फर्जी अभाव पैदा करके मुनाफा कूटने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हम सप्लाई, स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन में हर स्तर पर निगरानी करेंगे।''