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भक्तमाल कथा में हुआ सूरदास जी महाराज का चरित्र वर्णन

भक्तमाल कथा में हुआ सूरदास जी महाराज का चरित्र वर्णन

 

 

बनेड़ा ( केके भण्डारी )

सरदार नगर के दादू द्वारा में चल रही श्री भक्तमाल कथा में रविवार रात्रि को कथा व्यास संत श्री परमानंद दास जी महाराज ने मानव जन्म की महत्वता बताते हुए कहा कि परमात्मा ने हमें अनमोल मनुष्य देह दी है और इसका परम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति ही है। परंतु कलिकल के प्रभाव से माया के चक्कर में आकर के यह जीव अपने लक्ष्य को भूलकर संसार के विषयों में रमण कर रहा है। 

सूरदास जी का पूर्व जन्म भगवान के प्रिय सखा उद्धव जी का चरित्र सुनाते हुए बताया कि ज्ञान होना ही सब कुछ नहीं है ज्ञान के साथ-साथ परमात्मा की प्रेमा भक्ति भी होना अति आवश्यक है। बृजवासियों एवं गोपियों के प्रेम को देखकर उद्धव जी का ज्ञानाभिमान जाता रहा और गोपियों की भाती भगवान की प्रेमा भक्ति की उत्कंठा जगी तब उन्होंने सूरदास जी के रूप में दूसरा अवतार लिया और भगवान की प्रेमा भक्ति के पदों का गायन किया। सूरदास जी ने भगवान की सहायता से सवा लाख पद लिखकर के ठाकुर जी के चरणों में समर्पित किए।

इस दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि मोहन जाट,तरुण सिंह सिसोदिया,केशु , सुरेश सारण,गजानंद कुमावत,सम्पत माली एवम् अनेक भक्तो ने कथा व्यास जी को माला व साफा पहनाकर अभिनन्दन किया ।