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दूसरी लहर में बच्चे भी हुए प्रभावित, एंटीबॉडी टेस्ट रिपोर्ट में खुलासा

 दूसरी लहर में बच्चे भी हुए प्रभावित, एंटीबॉडी टेस्ट रिपोर्ट में खुलासा

जयपुर. युवाओं और बुजुर्गो के साथ कोरोना संक्रमण  ने बच्चों को भी प्रभावित किया है. हालांकि एसिम्प्टेमेटिक या हल्के लक्षणों के कारण बच्चों में कोरोना का पता नहीं चल पाया. लेकिन एंटीबॉडी टेस्ट  में कई बच्चों में कोरोना वायरस की पुष्टि हो रही है. जयपुर  के जे.के लोन अस्पताल में पोस्ट कोविड कॉम्प्लिकेशन के रुप में एमआईएससी के छह दर्जन से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं.

कोरोना की पहली लहर ने बुजुर्गो को निशाना बनाया था. तो दूसरी लहर में बड़ी संख्या में युवा वर्ग प्रभावित हुआ है. कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है. लेकिन दूसरी लहर में भी बच्चे इससे प्रभावित हुए हैं. हालांकि कुल कितने बच्चे दूसरी लहर में संक्रमित हुए इसका आंकड़ा सामने नहीं आ पाया है. लेकिन बच्चों में एंटीबॉडी टेस्ट होने से उनमें कोरोना होने का खुलासा हुआ है. जयपुर के जे.के लोन अस्पताल में पोस्ट कॉविड कॉम्प्लिकेशन के रुप में एमआईएससी के 70-80 मामले सामने आ चुके हैं. अलग-अलग लक्षणों के जरिए अस्पताल में भर्ती हुए बच्चों में कोरोना एंटीबॉडी टेस्ट हुए तब पता चला कि यह बच्चे कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं.
MISC के रूप में अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे बच्चों के परिजनों को यह भी पता ही नहीं चला कि बच्चे पहले ही कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं. समय पर इलाज नहीं हो पाने के कारण बच्चों में एमआईएससी का खतरा बढ़ गया. चिकित्कसों ने बताया कि उल्टी, दस्त, खांसी-जुखाम होते ही कोविड 19 की जांच कराना जरुरी है. अगर समय पर बच्चों को इलाज मिल पाए तो एमआईएसी का खतरा कुछ कम हो सकता है.एमआईएससी बच्चों के सभी अंगों को प्रभावित करता है. कई बार यह खतरनाक भी हो सकता है.