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महाविद्यालय की छात्राओं ने किया किशन करेरी पक्षी विहार का भ्रमण

महाविद्यालय की छात्राओं ने किया किशन करेरी पक्षी विहार का भ्रमण


चित्तौड़गढ़। राजकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की छात्राओं को शैक्षणिक भ्रमण पर किशन करेरी पक्षी विहार ले जाया गया। यह भ्रमण महिला प्रकोष्ठ एवं जीवविज्ञान विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। इस शैक्षणिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को नम भूमि पारिस्थितिकी तंत्र से परिचय कराना एवं विभिन्न माइग्रेटरी तथा स्थानीय पक्षियों को दिखाना और उनकी पहचान कराना था। भ्रमण पर छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गौतम कुमार कुकड़ा ने कहा कि महाविद्यालय में ऐसे आयोजनों का छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिये बहुत महत्व है। प्रकृति को उससे रूबरू होकर देखना जहां ज्ञानवर्धक है वहीं ज़िम्मेदारी का अहसास भी कराता है। महिला प्रकोष्ठ की प्रभारी, वन्यजीव प्रेमी एवं फोटोग्राफर डॉ. शशि शर्मा ने छात्राओं को नम भूमि के महत्व को बताते हुए यहाँ पाये जाने वाले पक्षियों की जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं को अलनिनो प्रभाव के बारे में भी बताया। किशन करेरी में ग्रीन नेचुरल अर्थ सोसाइटी अध्यक्ष भेरूलाल पुरोहित ने अपने साथी श्याम लाल गुर्जर, निलेश शर्मा, सूरजमल मेनारिया, परसराम मेनारिया, मुकेश पुरोहित, घनश्याम मेनारिया, निलेश पुरोहित के साथ जलाशय पर उपस्थित थे। उन्होंने सभी का स्वागत कर छात्राओं को बर्ड वाचिंग करवाते हुए बताया कि कैसे उनके प्रयासों से इस जलाशय पर अब प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियाँ बड़ी संख्या में आती हैं। उन्होंने छात्राओं को विभिन्न प्रजाति के पक्षी दिखाते हुए उनकी जानकारी दी। इस दौरान डूंगला थानाधिकारी देवेंद्र सिंह कास्टेबल वीरेंद्र, संतोष ने भी सहयोग करते हुए पक्षी दर्शन किए। छात्राओं ने यहाँ ग्रेट व्हाइट पेलिकन, बार हेडेड गीज़, पेंटेड स्टॉर्क, यूरेशियन स्पूनबिल , नॉर्दर्न शोवेलर, कॉम्बबिल्ड डक, रूडी शेलडक, ब्लैक विंग स्टिल्ट, ग्रे हेरोन, सारस क्रेन, ब्लैक टेल्ड गोडविट, लिटिल स्टिंट, लिटिल रिंग प्लॉवर, कॉमन स्नाइप, इजिप्शन वल्चर, पाइड किंगफिशर आदि कई प्रजातियाँ देखीं और खूब आनंदित हुईं। वनस्पति शास्त्र की प्रभारी डॉ. ममता शर्मा ने देसी बबूल आदि पेड़ पौधों के बारे में जानकारी दी। प्राणी शास्त्र विभाग की डॉ. अंजू चौहान ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर डॉ. लोकेश जसोरिया, शंकर बाई मीणा, श्याम सुंदर पारीक, आकाश एवं गोपाल का आयोजन में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।