boltBREAKING NEWS
  •  
  • रहें हर खबर से अपडेट भीलवाड़ा हलचल के साथ
  • भीलवाड़ा हलचल पर समाचार या जानकारी भेजे [email protected]
  • सबसे ज्यादा पाठकों तक पहुँच और सबसे सस्ता विज्ञापन सम्पर्क करें  6377 364 129
  •  

चार दिन से खराब डिजीटल एक्सरे मशीन का कंप्यूटर, जनरल में फ्रैक्चर का नहीं चल रहा पता , अनुभव के आधार पर डॉक्टर बांध रहे प्लास्टर

चार दिन से खराब डिजीटल एक्सरे मशीन का कंप्यूटर, जनरल में फ्रैक्चर का नहीं चल रहा पता , अनुभव के आधार पर डॉक्टर बांध रहे प्लास्टर

भीलवाड़ा (विजय गढ़वाल)। डिजीटल एक्सरे मशीन का कंप्यूटर खराब पड़ा है और जनरल मशीन से किए जा रहे एक्सरे में फ्रैक्चर नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में डॉक्टर्स को या तो मरीजों के रिपीट एक्सरे करवाने पड़ रहे हैं या फिर अनुभव के आधार पर ही मरीजों को प्लास्टर चढ़ाया जा रहा है। ये हाल हैं जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्पताल के। 
जवाहरनगर निवासी मंथन गढ़वाल के साथ सोमवार सुबह सड़क हादसा हो गया। इसके बाद परिजन घायल को लेकर महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टर ने एक्सरे लिखा। डिजीटल एक्सरे मशीन का कंप्यूटर खराब होने से एक्सरे नहीं हो पाया। जनरल एक्सरे कराया तो उसमें कुछ भी पता नहीं चल पाया। इसके बाद डॉक्टर ने अपने अनुभव के आधार पर माइनर फ्रैक्चर बताया और प्लास्टर चढ़ा दिया। यह तो केवल एक उदाहरण मात्र है। अस्पताल में रोज सैंकड़ों मरीजों के साथ ऐसा ही हो रहा है।
एक्सरेकर्मी बोले- डॉक्टर रिपीट एक्सरे लिखते हैं, यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
एक्सरेकर्मियों ने बताया कि डिजीटल एक्सरे मशीन के काम नहीं करने से जनरल एक्सरे किए जा रहे हैं। इसमें एक्युरेसी नहीं आती। ऐसे में डॉक्टर मजबूरी में कइयों के एक्सरे रिपीट लिख देते हैं। बार-बार एक्सरे करवाने से मशीन से निकलने वाली रेडियोधर्मी तरंगे कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। इससे मरीजों सहित स्टाफ  को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पहले भी खराब हो चुकी है डिजीटल एक्सरे मशीन
महात्मा गांधी अस्पताल के कमरा नंबर 7 में रखी डिजीटल एक्सरे मशीन पहली बार बंद नहीं हुई है। यह पहले भी खराब हो चुकी है और इसे एक संस्था के सहयोग से राशि एकत्र कर सही करवाया गया था। अब चार दिन से फिर यह बंद है। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों सहित उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मरीजों को दो जनरल एक्सरे मशीनों के भरोसे इलाज दिया जा रहा है। वहीं एक बार फिर चिकित्सालय प्रबंधन इस प्रयास में है कि कोई दानदाता आगे आए और इस खराब पड़ी मशीन को ठीक करवा दे। 
रोज होते हैं 300 से 350 एक्सरे
महात्मा गांधी अस्पताल में जिलेभर के अलावा बाहर के मरीज भी आते हैं। ऐसे में तीन एक्सरे मशीनें कम पड़ती हैं। अस्पताल में रोज 300 से 350 एक्सरे होते हैं। जनरल मशीनों पर सटीक परिणाम नहीं मिलते जिसके चलते डिजीटल एक्सरे कराने की सलाह दी जाती है। अस्पताल में डिजीटल मशीन चालू नहीं होने से मरीजों को निजी लैबों पर डिजीटल एक्सरे करवाना पड़ रहा है वहीं कई लोगों के एक्सरे जनरल मशीन पर किए जा रहे हैं। जनरल मशीन पर सटीक रिपोर्ट नहीं मिलने पर डॉक्टर अनुभव के आधार पर प्लास्टर व अन्य इलाज कर रहे हैं।
जनरल व डिजीटल एक्सरे मशीन में यह है फर्क
जनरल एक्सरे व डिजीटल में दिन-रात का फर्क है। जनरल एक्सरे व सोनोग्राफी में माइनर फ्रैक्चर व महीन पथरी दिखाई नहीं देती जबकि डिजीटल में इन्हें आसानी से देखा जा सकता है। इससे मरीजों को समय रहते सही उपचार नहीं मिल पाता। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब तबके के लोग माइनर फ्रैक्चर होने पर पैसा बचाने के लिए चिकित्सालयों में ही जनरल एक्सरे व सोनोग्राफी करा लेते हैं। ऐसे में चिकित्सक फ्रैक्चर व पथरी की बीमारी नहीं पकड़ पाते। 
निजी लैब वालों की चांदी
एमजीएच में डिजीटल एक्सरे मशीन खराब होने से निजी लैब वालों की चांदी हो गई है। डॉक्टर के एक्सरे लिखने के बाद कई मरीज निजी लैबों पर डिजीटल एक्सरे करवाने पहुंच रहे हैं।