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कोरोना महामारी: सिलेंडर व ऑक्सीमीटर ब्लैक में, रेगुलेटर व टेबलेट उपलब्ध ही नहीं

कोरोना महामारी: सिलेंडर व ऑक्सीमीटर ब्लैक में, रेगुलेटर व टेबलेट उपलब्ध ही नहीं

भीलवाड़ा (हलचल)। कोरोना महामारी में ऑक्सीजन के लिए मारामारी जारी है वहीं सिलेंडर व ऑक्सीमीटर ब्लैक में बिकने लगे हैं। आवश्यक दवा व ऑक्सीजन सिलेंडर में लगने वाला रेगुलेटर तो बाजार में उपलब्ध ही नहीं है।
आठ हजार का ऑक्सीजन सिलेंडर 25 से 30 हजार रुपए में मिल रहा
ऑक्सीजन की किल्लत के बीच ऑक्सीजन सिलेंडर वाले अब कालाबाजारी पर उतर आए हैं। सात से आठ हजार रुपए में मिलने वाला ऑक्सीजन सिलेंडर 25 से 30 हजार रुपए में मिल रहा है। अगर आपके पास पैसा है तो सिलेंडर मिल जाएगा नहीं तो मानवीयता का कोई स्थान नहीं है। ऐसे में लोगों को अपनों की जान बचाने के लिए इधर-उधर से पैसों का जुगाड़ कर ऑक्सीजन सिलेंडर लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ऑक्सीजन सिलेंडर का रेगुलेटर (नॉब) उपलब्ध ही नहीं
ऑक्सीजन सिलेंडर का रेगुलेटर (नॉब) मार्केट में उपलब्ध ही नहीं है।  ऐसे में सिलेंडर मिलने के बाद भी मरीज को ऑक्सीजन देने में परेशानी हो रही है।
कोरोना मरीजों के उपचार में कारगर फेबीफ्लू टेबलेट की भी शॉर्टेज
कोरोना मरीजों के उपचार में कारगर फेबीफ्लू टेबलेट की भी मार्केट में शॉर्टेज है। मेडिकल स्टोर्स पर यह टेबलेट है ही नहीं। फेबीफ्लू टेबलेट की एक स्ट्रिप में 17 टेबलेट आती हैं और इसकी कीमत करीब 1224 रुपए है। इसके अलावा रेमडेसिविर इंजेक्शन और टोसिलिजुमेब टेबलेट भी नहीं मिल रही है। ऐसे में कोरोना संक्रमितों को उपचार में परेशानी आ रही है वहीं मरीजों के परिजनों को भी मानसिक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ऑक्सीजन लेवल की जांच में काम आने वाले ऑक्सीमीटर की भी कालाबाजारी जोरों पर
मरीजों के ऑक्सीजन लेवल की जांच में काम आने वाले ऑक्सीमीटर की भी बाजार में कालाबाजारी जोरों पर है। बाजार में विभिन्न कंपनियों के ऑक्सीमीटर उपलब्ध हैं जिनकी कीमत 950 से 1500 रुपए तक है। ऑक्सीमीटर खरीदने के लिए जाने वालों को पहले तो स्टॉक नहीं होने की बात कही जाती है वहीं बैकडोर से ज्यादा कीमत पर ऑक्सीमीटर बेचे जा रहे हैं। ऐसे में मरीजों की जान बचाने के लिए परिजनों को मजबूरी में अधिक कीमत पर ऑक्सीमीटर खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
ऑक्सीजन के अभाव में थम रहीं सांसें
ऑक्सीजन लेवल कम होने के बाद मरीज को कृत्रिम ऑक्सीजन देना जरूरी हो जाता है। ऑक्सीजन सिलेंडर, नॉब नहीं मिलने की सूरत में मरीजों की सांसें थम रही हैं। यह स्थिति डराने वाली है। कोरोना की दूसरी वेव वाला वायरस डबल म्युटेंट बताया जा रहा है और इसका नया स्ट्रेन शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहा है। अगर ये ही हालात रहे तो कोरोना संक्रमितों की मौतों का आंकड़ा काफी भयावह हालात पैदा कर सकता है।