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जिनके मन मैं अनुकंपा वही धर्म का वास – महासाध्वी मधु कंवर मासा

जिनके मन मैं अनुकंपा वही धर्म का वास – महासाध्वी मधु कंवर मासा

 भीलवाड़ा | अनुकम्पा सोसायटी मैं विराजित महासाध्वी मधु कंवर मासा ने आज प्रवचन मैं उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को फरमाया की अनुकम्पा का वास वही पर हो सकता है जहाँ जीव मात्र के प्रति मन मैं करुणा मेत्री ओर दया के भाव हो, जहाँ पर राग द्वेष पाप इनकी कोई जगह ना हो किसी का बुरा सोचने ओर करने के भाव ना हो ऐसी जगह पर ही धर्म का वास हो पाता है ओर वही आत्मा परमात्मा स्वरूप को प्राप्त कर पाती है. साध्वी प्रतिभा कंवर मासा ने फरमाया कि आज विभिन्न समाज मैं अलग अलग देवों को पूजा जाता है कहीं श्री राम तो कही श्री कृष्णा कही पर महादेव तो कही पर बजरंगबली तो कहीं पर महावीर पर ये सब भी देव तुल्य जब ही हुए जब इन सभी के मन मैं प्राणीमात्र के प्रति अनुकम्पा के भाव थे। साध्वी डॉ चिंतन श्री मासा ने अनुकम्पा के एक एक शब्द का अलग से वर्णन कर पूरी सभा को भाव विभोर कर दिया ओर मंत्र दिया की अनुकम्पा भाव हमेशा बना रहे इसके लिए हमेशा इन तीन सूत्रों का अनुसरण करना चाहिए जिसमें पहला सूत्र यह है कि कभी किसी को दुःख देना नहीं ना मन से ना वचन से ना काया से, दूसरा दुःख आ भी जाए तो उस दुःख मैं रोना नहीं और तीसरा सूत्र आए हुए दुखों को सहन करते हुए दुखों के बीज बोना नहीं है। मनीष बंब  ने बताया कि साध्वी व्रंध की सभा मैं अनुकम्पा सॉसायटी के साथ ही वृंदावन सॉसायटी, अहिंसा बंग्लो, द्वारिका कॉलोनी, संस्कृति विहार, आज़ाद नगर, बापू नगर, आर के कॉलोनी , शास्त्री नगर, बरडोद आदि क्षेत्रों से भी श्रावक श्राविकाए उपस्थित थे। गुरुवार का प्रवचन विशेष घर कैसे मन्दिर बने के ऊपर प्रात 9 से 10 बजे बजे तक 100 फ़ीट रोड पर स्थित अनुकम्पा सॉसायटी के बैंक्वेट हाल मैं होगा। प्रवचन के दौरान सोसायटी के मुकेश भालावत, दिलीप चौधरी, निर्भीक गांधी, सिद्धि बाबेल, अनिल चंडालिया, प्रकाश कोठारी, विनोद जैन आदि उपस्थित थे।