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मिथ्या को मन, वचन, काया से नहीं मानना चाहिए: मुनि श्रद्धानंद

मिथ्या को मन, वचन, काया से नहीं मानना चाहिए: मुनि श्रद्धानंद
उदयपुर BHN
केशवनगर स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य वसुनंदी महाराज के शिष्य श्रद्धानंद महाराज एवं पवित्रा नंद महाराज संघ के सानिध्य में चार माह का वर्षावास का आयोजन हो रहा है। आदिनाथ युवा परिषद के प्रचार संयोजक शांति कुमार कासलीवाल ने बताया कि केशव नगर मंदिर के पास दस हजार स्क्वायर फीट का एक विशेष विशाल पांडाल बनाया गया है जिसमें पाश्र्वनाथ मोक्ष कल्याणक के अवसर पर  पांडाल का उदघाटन सुरेश प्रवीण श्वेता वालावत परिवार द्वारा किया जाएगा। उसके बाद केशव नगर महिलाओं द्वारा घट यात्रा मंदिर से पांडाल तक ले जाकर पांडाल की शुद्धि की जाएगी। बाद में पांडाल में  श्रीजी विराजमान कर अभिषेक, शांति धारा, पूजा विधान आदि कार्यक्रम किए जाएंगे। चातुर्मास सेवा समिति के अध्यक्ष कुंथुकुमार गणपतोत ने बताया कि पाश्र्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक पर 4 अगस्त को भगवान पर निर्वाण लड्डू  के पुण्यार्जक कर्ता नरेश गोयल ,रमेश  सिंघवी ,निर्मला चित्तौड़ा परिवार है एवं  पाश्र्वनाथ विधान के पुण्यअर्जक परिवार दीपक स्वाति चेतन फानदोत परिवार है । प्रतिदिन प्रात: 8 से 9.30  रत्नाकरंडक  श्रावकाचार पर मुनि द्वारा वाचना अब पांडाल में  कराई जाएगी।
संत सुधा सागर संयम भवन में प्रवचन सभागार में मुनि श्रद्धा नंद ने कहा कि मिथ्या दृष्टि को आप सुधारें, वह सुधरे या नहीं लेकिन मिथ्या दृष्टि आपको जरूर बिगाड़ देंगे। कुदेव कुगुरू को नमस्कार भी नहीं करना चाहिए विनय भी नहीं करनी चाहिए। नाव को दिशा में ले जाने के लिए जैसे मल्लाह की जरूरत होती है वैसे ही संसार में अपनी नाव को सही दिशा में ले जाने के लिए गुरु की जरूरत होती है । नाव को नाविक मिल जाए और नाविक को नाव मिल जाए यह बड़ा सौभाग्य की बात है । संसार को पार करने के लिए सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान सम्यक चरित्र की आवश्यकता होती है।