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पोती के डेढ़ साल की होने पर दादा ने मनाई जन्म की खुशियां, हरिबोल संकीर्तन यात्रा निकाली

पोती के डेढ़ साल की होने पर दादा ने मनाई जन्म की खुशियां, हरिबोल संकीर्तन यात्रा निकाली

पारोली बबलू पाराशर
कोरोनाकाल में इंसान के खुशियां मनाने पर भी रोक लग गई थी और कई लोग ऐसे भी हैं जो अपने अरमान अब पूरे कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ किया है कोठाज के नाथूलाल सुथार ने। सुथार के घर डेढ़ साल पहले पोती ने जन्म लिया था लेकिन उस समय कोरोना के चलते पाबंदियां होने से वे उसके जन्म की खुशियां सार्वजनिक रूप से नहीं मना सके। ऐसे में पोती के डेढ़ साल की होने पर सुथार ने अपनी इच्छा पूरी करते हुए गांव में संकीर्तन यात्रा निकाली।
जानकारी के अनुसार कोठाज के नाथूलाल सुथार के बेटे का वर्ष 2015 के अंत में विवाह हुआ था। पांच साल बाद बेटी चेष्टा ने जन्म लिया। इस पर पूरे परिवार में खुशियां छा गई। सुथार पोती का भव्य स्वागत करना चाहते थे लेकिन उस समय कोरोना की पाबंदियां होने के कारण वे ऐसा नहीं कर पाए।
आज नाथूलाल के घर पर उत्सव का माहौल है। चेष्टा ने जैसे ही घर की दहलीज पर कदम रखा। ढोल धमाकों के साथ स्वागत किया गया। पूरे घर को फूलों से सजाया गया। बच्ची के पैरों में कुमकुम लगाकर कपड़े पर उसके पद चिन्ह लिए गए, बाहर से लेकर अंदर तक फूल की पंखुड़ियां बिछाई गई। इस दौरान पूरे गांव में हरि बोल संकीर्तन यात्रा निकाली गई। भजनों पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। हरिबोल संकीर्तन यात्रा के पूरे गांव में भ्रमण के बाद चारभुजा मंदिर परिसर में धर्म सभा हुई जिसमें बेटियों को घर के आंगन की फुलवारी तथा घर में बेटियां होना किसी वरदान से कम नहीं  बताया। चेष्टा को कोठाज चारभुजा मंदिर परिसर में पंचमेवा और सिक्कों से तोला गया।
बेटों से कम नहीं होती बेटियां
नाथूलाल सुथार ने बताया कि उनके बेटे देवकिशन की पत्नी निहाला के शादी के पांच साल बाद बेटी हुई। बेटियां भगवान का वरदान होती हैं, बेटियां लक्ष्मी होती हैं, परिजनों का कहना है कि सामान्यतया बेटे होने पर ऐसी खुशियां मनाई जाती हैं, लेकिन हम समाज में यह संदेश  देना चाहते हैं कि बेटियों के जन्म लेने पर भी बेटों जैसी खुशियां मनाई जाए, क्योंकि बेटियों से ही आगे परिवार चलता है और पूरे एक समाज का निर्माण होता है। ऐसे में उनके योगदान को हम कभी कम नहीं देख सकते।