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कैसे बरकरार रहे पुलिस का इकबाल

कैसे बरकरार रहे पुलिस का इकबाल

 

जहाजपुर यदि पुलिस सुरक्षित नही है तो फिर ये कैसे विश्वास होगा कि आमजन सुरक्षित है। आज थानों को ही बजरी माफिया चलाते है बजरी निकलने वालो थानों पर गौर किया जाए तो अधिकांश clg मेम्बर बजरी बेचने वाले है यही नही ज्यादातर पुलिस मित्र भी बजरीवाले ही है कोई शिकायत भी करता है तो बजरी का धन्धा करने वाले सुलटाने आ जाते है चाहे वह जान से मारने की धमकी देने वाला मामला हो यो फिर कोई गम्भीर अपराध करने वाला हो बजरी बेचने वाले ही थाने में समाज सेवक की भूमिका में नज़र आते है इनको जी हजूरी वाले चाहिए परिणाम कुछ भी हो चाहे पंडेर थाने में प्रशासन पर हमला हो या फिर जहाज़पुर ओर शक्करगढ़ थाने में पुलिस पर हमला करने वाले हो पुलिस मुकदमा दर्ज करती है कुछ आदमियों की गिरफ्तारी और मेहमान नवाजी के बाद उनकी रिहाई फिर वही बात बजरी जिंदाबाद, हनुमाननगर पुलिस पर शनिवार रात बजरी माफियाओं के सुनियोजित हमले के बाद तो ये साबित हो जाता है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था मखोल बनकर रह गई है। इससे पहले भी भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी कस्बे में तस्करों ने नाकेबंदी में जुटे पुलिसकर्मियों पर हमलाकर उनकी हत्या कर दी थी। ऐसी लगातार घट रही घटनाओं से पुलिस का मनोबल गिरेगा ही।
उल्लेखनीय है क्षेत्र में बनास नदी से बजरी का अवैध तरीके से दोहन हो रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है दूसरी ओर राजनीतिक संरक्षण के चलते बजरी माफिया अपनी मनमानी कर रहे है। कदाचित अच्छा होता कि पुलिस को ऐसे तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने की छूट दी जाती। लेकिन आकाओं के संरक्षण से माफियाओं में कोई भय नही है। वे भली- भांति जानते है, उनका कोई कुछ नही बिगाड़ सकता। करीब 10महीने पहले भी जहाजपुर इलाके के एक गांव में बजरी से भरे एक ट्रैक्टर-ट्राली का पीछा कर रहे sdm के एक चालक की कुचलकर हत्या कर दी गई थी। ऐसी घटनाएं आम होती जा रही है। पुलिस असहाय है और माफियाओं के हौसले बुलंद है।

पुलिसकर्मियों पर तो ये हमला तो सुनियोजित था। जिस गांव में पुलिस बजरी खनन पकड़ने पहुचीं , वहां तो आरोपी भाग छूटे ओर जब हनुमान नगर पुलिस बजरी से भरे ट्रेक्टर-ट्राली को थाने ले रही थी, इसी बीच दर्जनभर अज्ञात लोगों ने पुलिस को घेरकर हमला किया। इससे साफ जाहिर है कि माफियाओं का नेटवर्क कितना प्रभावी है। गिरती कानून व्यवस्था का असर इस बात से ही समझा जा सकता है कि पुलिस का वह श्लोगन अब अतीत की बात बन चुका है, जिसमे कहा जाता था कि अपराधियों में भय और आमजन मे विश्वास पर अब ठीक विपरीत हो रहा है। पुलिस में भय और अपराधियों का आत्मविश्वास वाली बात साबित हो रही है। सरकार और प्रशासन के लिए भी ये शर्मनाक बात है, यदि ऐसी घटनाओं को तुरंत नही रोका गया तो प्रदेश में जंगलराज कायम हो जाएगा। भीलवाड़ा पुलिस के लिए तो ये घटना वाकई भयभीत करने वाली भी है तो उनके आत्मविश्वास को तोड़ने वाली भी है। 
 जहाज़पुर,पंडेर शक्करगढ़ में पुली की मिली भगत से अवैध बजरी का दोहन हो रहा है यही नही भाजपा कांग्रेस के आला नेता से लेकर अदने तक इस कारोबार में शामिल है पुलिस के अधिकारियों की साठगांठ के चलते ये काला कारोबार करने वाले सिपाही को कुछ नही समझते है सिपाही पीटता रजता है मगर इनको जेब गर्म करने से फुर्सत नही है अधिकतर बजरी ला अवैध कारोबार करने वाले राजनीतिक वरदहस्त प्राप्त ही है दोनों ही दलों के नेता इस दलदल में डूबे है 
आज जरूरत है पुलिस का एकबाल कायम करने की,अवैध कामो पर लगाम लगाने की बजरी माफियाओ के चंगुल से थानों को मुक्त कराने की