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अपने मन को मंदिर बनाएं: रामस्नेही संत दिग्विजयराम

अपने मन को मंदिर बनाएं: रामस्नेही संत दिग्विजयराम

भीलवाड़ा । रामस्नेही संप्रदाय के संत दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि पेट भरने की जिम्मेदारी तो प्रभु ने सबकी ले रखी है लेकिन पेटी भरने की जिम्मेदारी प्रभु की नहीं है। जीवन को सुखमय बनाने के लिए एवं वास्तविक आनंद व सुख की प्राप्ति के लिए हर व्यक्ति को सत्संग का सहारा लेना चाहिए। गृहस्थ का यह परम कर्तव्य है। सत्संग के माध्यम से मन को साफ रखकर मंदिर बनाना चाहिए। जहां भी सत्संग हो भाग लेना चाहिए। जिस प्रकार गंगा में स्नान से पाप धुल जाते हैं उसी प्रकार सत्संग से मन मंदिर बन जाता है।  रामस्नेही संप्रदाय के संत रमताराम के शिष्य संत दिग्विजय राम  वहां आयोजित कथा सत्संग के दौरान श्रद्धालु समुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भजन करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। मीराबाई इसलिए आज भी जानी जाती है। क्योंकि उनकी भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति अलौकिक थी। भक्ति दिखाने की नहीं होनी चाहिए। कथा के दौरान प्रस्तुत भजन सेवा सुमिरन सत्संग लोक परलोक सुधार देता है पर श्रद्धालु झूम उठे। भक्त गोविंद प्रसाद सोडाणी ने बताया कि सत्संग में गुरु वाणी पाठ, परिचय सत्र व भक्तों द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी गई।  10 दिवसीय मलेशिया, सिंगापुर की धार्मिक यात्रा के तहत  क्रूज में हो रही कथा  में भीलवाड़ा सहित पूरे देश से 165 रामस्नेही भक्तभाग ले रहे हैं।   संत दिग्विजय राम क्रूज में पहली बार कथा व सत्संग कर रहे हैं। कथा भारतीय समय के अनुसार रोज दोपहर 3:00 से शाम 6:00 बजे तक हो रही है। कथा के प्रारंभ से पूर्व संत श्री का दुपट्टा पहना कर अभिनंदन किया गया। कथा में भीलवाड़ा चित्तौड़गढ़ दिल्ली मंदसौर इंदौर नीमच उदयपुर के 165 भक्त भाग ले रहे हैं। 

अपने मन को मंदिर बनाएं: रामस्नेही संत दिग्विजयराम