boltBREAKING NEWS
  • भीलवाड़ा हलचल के नाम पर किसी को जबरन विज्ञापन नहीं दें और धमकाने पर सीधे पुलिस से संपर्क करें
  •  
  •  

मोहनलाल बने मुदित मुनि, फिर महाश्रमण

मोहनलाल बने मुदित मुनि, फिर महाश्रमण

 

 

 

 

 

acharya mahashraman

जन्म: आचार्य महाश्रमण ने 13 मई 1962 (वि. सं. 2019, बैशाख शुक्ला नवमी) को सरदारशहर में झूमर मल दूगड़ की पत्नी नेमादेवी की कोख से जन्म लिया। उनका बचपन का नाम मोहन था।

 

acharya mahashraman

दीक्षा: आचार्य तुलसी के दिल्ली प्रवास के दौरान बालक मोहन ने उनके समक्ष दीक्षा लेने की इच्छा जताई। 5 मई 1974 (वि.सं. 2031, बैशाख शुक्ला चतुर्दशी) को सरदारशहर में 12 वर्षीय मोहन को मुनि सुमेर मल (लाडनूं) ने दीक्षा दी। तब उनका नाम मोहन से मुनि मुदित रख दिया गया।

 

acharya mahashraman

सेवार्थ नियुक्ति: दीक्षा लेने के बाद मुनि मुदित को समय-समय पर आचार्य तुलसी और युवाचार्य महाप्रज्ञ का सान्निध्य मिलता रहा। वि. सं. 2041, ज्येष्ठ कृष्णा अष्टमी को आचार्य तुलसी ने उन्हें अपनी व्यक्तिगत सेवा में नियुक्त किया।

 

 

acharya mahashraman

महाप्रज्ञ के अंतरंग सहयोगी: 16 फरवरी 1986 (वि.सं., माघ शुक्ला सप्तमी) को उदयपुर मर्यादा महोत्सव के दौरान मुनि मुदित की क्षमताओं का मूल्यांकन कर आचार्य तुलसी ने उन्हें युवाचार्य महाप्रज्ञ का अंतरंग सहयोगी घोषित किया।मुनि समूह का मुखिया (साझपति): 14 मई 1986 (वि.सं. 2043, बैशाख शुक्ला चतुर्थी) को ब्यावर में आचार्य तुलसी ने अक्षय तृतीया के अवसर पर मुनि मुदित को एक मुनि समूह का मुखिया (साझपति) नियुक्त किया।

acharya mahashraman

महाश्रमण पद पर नियुक्त: आचार्य तुलसी ने संघ में अनेक नवीन कार्य किए। महाश्रमण पद का सृजन भी उसी नवीनता का परिचायक था। 9 सितम्बर 1989 को आचार्य तुलसी ने मुनि मुदित को 'महाश्रमण' के गरिमामय पद पर नियुक्त कर एक नया इतिहास बनाया। वरियता के क्रम में यह पद आचार्य और युवाचार्य के बाद वाला तीसरा पद था।\\

acharya mahashraman bday

आचार्य महाश्रमण नियुक्त: वर्ष 2010 में आचार्य महाप्रज्ञ के देवलोकगमन के बाद पदाभिषेक कर उन्हें आचार्य महाश्रमण बनाया गया। यह कार्यक्रम उनकी जन्म भूमि सरदारशहर में 10 मई को हुआ था