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हाईवे वालों की लापरवाही दे रही दुर्घटनाओं का न्योता

 हाईवे वालों की लापरवाही दे रही दुर्घटनाओं का न्योता

रायला रमेशचंद्र दरगड/ गोपाल वैष्णव| रायला नेशनल हाईवे 48 नंबर दिल्ली से चेन्नई तक नेशनल हाईवे हैं। जिसकी लंबाई 2807 किमी हैं। नेशनल हाई वे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के द्वारा विभिन्न कंपनियों को निर्माण कार्य का ठेका दिया गया। इस नेशनल पर जगह जगह पुलियाऐं बनी हुई हैं । ब्रिज सेटलमेंट सही नहीं किया गया हैं। यदि चौपहिया वाहन 60 से 80 किमी की स्पीड से चल रहा हैं तो  आसान सफर हैं लेकिन यदि स्पीड 80 से उपर चलाई तो वाहन अनबैलेंस हो जाती और दुर्घटना हो जाती।यूं तो कहने को एक्सप्रेस हाई वे हैं। फिर एक्सप्रेस हाईवे जैसी गाड़ी चला नहीं सकते। और यदि चलाई तो दुर्घटना का शिकार हो जाती है और लोगों की जान चली जाती है।

अरबों खरबों रुपया खर्च करने के बाद नेशनल हाईवे की सड़कों की दुर्दशा से वाहन चालको को जान से हाथ धोना पड़ता है। जहां सरकार दुर्घटनाएं कम कराने के लिए एक्सप्रेस हाईवे सुरक्षित सफर  के लिए निर्माण करती है वही नेशनल हाईवे एक्सप्रेस वे का सफर दुर्घटनाओं को न्योता देता है।

जहां जहां पर भी पुलिया ही बनी हुई है वहां पर भी रोड अन बैलेंस हो जाता है। इसके अलावा सुरक्षा की दृष्टि से नेशनल हाईवे के दोनों तरफ लोहे की जालियां और रेलिंग लगाई गई थी और उनकी सुरक्षा देखरेख की जिम्मेदारी ठेकेदार  के जिम्मे रहती है। उनकी देखरेख नहीं करने से लोगों ने तोड़ दिया है तथा रोड पर ही नए रास्ते बना लिए हैं और उन रास्तों में से अचानक दोपहिया दो पहिया वाहन सड़क पर चढ़ जाते हैं और वह भी दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं और माथे वाहन चालक के आ जाते हैं की गलती वाहन चालकों की थी। जबकि वास्तविक खामी तो नेशनल हाईवे की टीम एवं कर्मचारियों की ही होती है। नेशनल हाईवे के अधिकारियों को शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं होती है। ठेकेदार फर्म एवं अधिकारी नेशनल हाईवे के तोड़फोड़ एवं नुकसान के खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नहीं करते हैं। क्योंकि जहां जहां पर भी रास्ते खुले या तार की जाली या रेलिंग टूटी है तो इनमें वे पेट्रोलिंग के अधिकारियों का भी दान दक्षिणा लेने का प्रयास रहता है। जिसका ताजा उदाहरण कंपनी के एक पटवारी के द्वारा रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया जाना भी है। यानी कि हम यह कह सकते हैं कि रिश्वत के बल पर भी नेशनल हाईवे की रेलिंग, जाली तोड़ी जा सकती है। फिर बाद में लोगों की जान जाए तो जाए किसे परवाह है।

हाईवे के अधिकारियों एवं ठेकादार फर्मों की जरा सी लापरवाही लोगों की जान के दुश्मन बनती जा रही है। हमें अच्छी तरह याद है कि रायला नेशनल हाईवे पर ही पुलिया के ऊपर दुर्घटना होने के बाद पुलिस ने दुर्घटना का मामला तो दर्ज किया था ही साथ ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को भी आरोपी बनाया था।