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साथ कुछ नहीं जाने वाला फिर भी हम कहते ये हमारा है-प्रेमभूषणजी महाराज

 साथ कुछ नहीं जाने वाला फिर भी हम कहते ये हमारा है-प्रेमभूषणजी महाराज

 भीलवाड़ा, BHN.

भगवान हर स्वरूप में सारे लोको का सुख देने वाले है जो उनका स्मरण करे उसे ये सभी सुलभ हो जाते है। रामजी में ऐसी विभूतियां उपस्थित है कि किसी भी भाव से उनका स्मरण मात्र कर ले जीव का मंगल हो जाता है। भजन में रमने वाला भगवान को जान गया और नहीं रमने वाला संसार में रमा हुआ है। भगवान की माया सबको भ्रमाए हुए है। हम जानते है हमारे साथ कुछ नहीं जाने वाला फिर भी हम सबको कहते ये हमारा है। माया के आवरण के कारण इस जगत में फंसे रहते है। जो इससे मुक्त हो जाता उसे ये जगत नहीं भगवान ही अपने लगते है। ये विचार अयोध्या के ख्यातनाम कथावाचक परम पूज्य प्रेमभूषणजी महाराज ने शुक्रवार को श्रीसंकट मोचन हनुमान मंदिर भीलवाड़ा की ओर से श्री रामकथा सेवा समिति भीलवाड़ा के तत्वावधान में चित्रकूटधमा में आयोजित नौ दिवसीय श्री रामकथा महोत्सव के चौथे दिन कथावाचन करते हुए व्यक्त किए। व्यास पीठ की विधिवत पूजा के बाद उस पर विराजित होकर परम पूज्य प्रेमभूषणजी महाराज के मुखारबिंद से श्रीराम कथा वाचन शुरू हुआ तो पूरा पांडाल भक्ति के रस में डूब सा गया। बारिश का मौसम होने के बावजूद श्रद्धालुओं का रामकथा श्रवण के प्रति उत्साह कम नहीं हुआ और आयोजन समिति की ओर से हजारों भक्तों के बैठने के लिए वाटरप्रूफ पांडाल में कुर्सियों का प्रबंध किया गया। कथा में चौथे दिन भगवान के बाल लीला एवं यज्ञ रक्षा प्रसंगों की चर्चा हुई। ‘हम रामजी के रामजी हमारे है सेवा ट्रस्ट’ के बैनरतले कथावाचन करने वाले प्रेममूर्ति श्रीप्रेमभूषणजी महाराज ने कहा कि जिसके आदि-अंत का पता नहीं वह भगवान है। भगवान जगत में जन्म नहीं लेते बल्कि प्रकट होते है। सर्वव्यापी परमात्मा का कण-कण में वास है एवं वह अजन्मा है। उन्होंने कहा कि सबके सामने मनुष्य को बड़ा होना चाहिए लेकिन मां के सामने कभी बड़ा नहीं होना चाहिए। वह बड़ा होनहार होता है जो मां के लिए कभी बड़ा नहीं होता। कन्हैया सरकार भी कभी बड़े हुए मां के सामने हमेशा बच्चा ही रहे। इसी में आनंद एवं रस है। प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि रामकथा जीवनमुक्त को भी सुनने के लिए प्रेरित करती है। रामकथा जीवन का सार एवं भगवान का गुणानुवाद है। जीव जगत के किसी भी तन में रहेगा भगवान की कथा उसका कल्याण करेगी।

 

परिवार बड़ा होने पर ही संरक्षित रह पाएगा सनातन धर्म

 

व्यास पीठ से भगवान राम की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए प्रेमभूषणजी महाराज ने व्यवहारिक जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति को मानने वालों के परिवार जिस तरह सीमित होते जा रहे है उससे कुछ समय बाद कई रिश्ते ही नहीं रहेंगे। बच्चें समझेंगे ही नहीं मासी, बुवा क्या होती है। उन्होंने कहा कि हमारी संख्या कम होती जा रही है। सनातन संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए वह प्रार्थना करते है कि परिवार छोटा नहीं बड़ा रखो परिवार में चार-पांच बच्चें होने चाहिए। बेटा हो या बेटी सबके प्रति समभाव रखे।  उन्होंने सवाल किया कि छोटे परिवार का नियम क्या सनातन धर्म को मानने वालों के लिए ही है। जिसके पांच बच्चें हो उसका अभिनंदन कीजिए। उन्होंने कहा कि परम्पराओं का पोषण कीजिए और ये चिंता न करे कि बढ़ती महंगाई में बच्चों को पालेंगे कैसे। भगवान ने बच्चों को जन्म दिया है तो ंिचंता भी वहीं करेंगे। महंगाई बढ़ी है तो आमदनी भी बढ़ी है।

 

आई बहार हंसते-हंसते,आया सांवला सरकार हंसते-हंसते 

 

श्रीराम कथा शुरू होने से पहले एवं प्रेममूर्ति प्रेमभूषणजी महाराज द्वारा कथा शुरू करने के बाद भी निरन्तर भजनों की गंगा माहौल को भक्ति के रस से सराबोर करती रही। कथा में जब उन्होंने ‘आई बहार हंसते-हंसते,आया सांवला सरकार हंसते-हंसते’ भजन की प्रस्तुति दी तो पूरा माहौल भक्ति में डूब गया और सैकड़ो श्रद्धालु नृत्य करने लगे। उन्होंने नाम रह जाएगा आदमी का,दामिनी दमक प्रेम नाहीं, राम को मान ले मेरे प्यारे, आंगन में बधाईयां बाजे, आदि भजनों से भी माहौल भक्तिपूर्ण कर दिया। इस दौरान पांडाल में जय सियाराम, जय रामजी के जयकारे गूंजते रहे। भजनों के साथ रामचरितमानस की चौपाईयों का पाठ भी होता रहा। 

 

जजमानों ने लिया व्यास पीठ से आशीर्वाद

 

श्रीराम कथा सेवा समिति के प्रवक्ता एवं मंच संचालक पंडित अशोक व्यास ने बताया कि मंच पर कथा आयोजक संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरीजी महाराज, हाथीभाटा आश्रम के महन्त संतदास सहित कई संत-महात्मा का सानिध्य मिला। प्रेमभूषणजी महाराज के व्यास पीठ पर विराजित होने के बाद आशीर्वाद पाने वालों में जजमानों में केजी तोषनीवाल, संजय मुरारका, पीएम बेसवाल, अनिल दाधीच, हरीश मानवानी, सुनील रांका, श्याम नंदवाना, पंडित मनोहरकृष्ण चौबे, मुकेश अग्रवाल, ब्रजेश तिवाड़ी, राजेश कुदाल, चन्द्रप्रकाश चंदवानी, दिलीप रावानी, हेमनदास भोजवानी, सुरज नथरानी, भगवान रामचंदानी, जितेन्द्र रंगलानी, गुलशन विधानी, किशोर पारदासानी, राजेश मुखीजा, जितेन्द्र मोटवानी, आदि शामिल थे। शाम को दूसरे दिन की कथा समाप्ति पर भी आरती की गई। आरती करने वालों में सभापति राकेश पाठक, संजय मुरारका, हरीश मानवानी, चन्द्रप्रकाश चंदवानी, शिवप्रसाद सुरी, चन्द्रसिंह जैन, स्टेशन मास्टर दिनेश शर्मा, सरोज दाधीच, रामेश्वर ईनाणी, कमलेश डाड, बद्रीलाल सोमानी, कुलदीप शर्मा आदि शामिल थे। हम रामजी के रामजी हमारे है सेवा ट्रस्ट के तारकेश्वर मिश्र ने ट्रस्ट की ओर से भक्तों का स्वागत किया। श्रीरामकथा समिति के अध्यक्ष गजानंद बजाज ने बताया कि सुशील कंदोई, मंजू पोखरना, कन्हैयालाल स्वर्णकार,पीयूष डाड, पवन नागौरी, गोपाल जागेटिया, मनोज गुप्ता, राधा कंदोई, सुधा बेसवाल, मोना डाड, पूजा बजाज, गुड्ी नागौरी ने श्रीराम जन्मोत्सव में बहुत अच्छी सेवाएं देकर समिति को सहयोग प्रदान किया। श्रीराम कथा का वाचन नगर परिषद के चित्रकूटधाम प्रांगण में 28 सितम्बर तक प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक होगा। 

 

बारिश का पानी भरने पर हजारों भक्तों के लिए लगाई कुर्सियां

 कथास्थल चित्रकूटधाम में गुरूवार शाम हुई बारिश से कई जगह पानी भर गया। कथा आयोजक श्रीराम कथा सेवा समिति के अध्यक्ष गजानंद बजाज ने बताया कि पांडाल में कई जगह पानी भरने पर भक्तों को बैठने में कोई तकलीफ नहीं आए इसके लिए सभी भक्तों के लिए कुर्सियां लगाने का निर्णय किया। समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यो ने कड़ी मेहनत पर पांडाल से पानी हटाकर हजारों भक्तों के लिए कुर्सियां लगाने की व्यवस्था की। इस कार्य में सुशील कंदोई, मंजू पोखरना, पीयूष डाड, कन्हैयालाल स्वर्णकार, ताराचंद पमनानी, कृष्णगोपाल बंसल, दुर्गालाल सोनी, श्याम नंदवाना आदि ने पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। कथा सुनने वाले भक्तगणों को कोई परेशानी नहीं आए इसके लिए आयोजन समिति के सदस्य सक्रिय भूमिका निभाते रहे। कथास्थल पर पुलिस की ओर से भी सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए और पर्याप्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया। कथा के चौथे दिन प्रसाद की सम्पूर्ण व्यवस्था हरीश मानवानी, चन्द्रप्रकाश चंदनानी एवं फल मंडी के सभी सदस्यों के सहयोग से की गई।

 साथ कुछ नहीं जाने वाला फिर भी हम कहते ये हमारा है-प्रेमभूषणजी महाराज
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 साथ कुछ नहीं जाने वाला फिर भी हम कहते ये हमारा है-प्रेमभूषणजी महाराज