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न्यायालय के आदेश पर नगर परिषद अब अवैध कॉम्पलेक्स सीज करने को मजबूर, सिंधुनगर से हो सकती है शुरूआत!

न्यायालय के आदेश पर नगर परिषद अब अवैध कॉम्पलेक्स सीज करने को मजबूर, सिंधुनगर से हो सकती है शुरूआत!

भीलवाड़ा (राजकुमार माली)। नोयडा के ट्वीन टॉवर की तर्ज पर भीलवाड़ा में भी आगे चलकर कुछ कॉम्पलेक्सों पर कार्रवाई हो सकती है। अवैध निर्माण को लेकर जोधपुर हाईकोर्ट में चल रही कार्रवाई अब गति पकडऩे लगी है। नगर परिषद को अवैध कॉम्पलेक्सों के खिलाफ अब सीज की कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। परिषद कुछ दिन में 6 कॉम्पलेक्सों को सीज करने जा रही है। जबकि आने वाले दिनों में इनकी संख्या दो दर्जन से ज्यादा हो सकती है। 
नगर परिषद सभापति राकेश पाठक ने मंगलवार को हलचल को बताया कि नगर परिषद में अवैध कॉम्पलेक्सों के खिलाफ एक योजना तैयार की है जिसके तहत पहले चरण में 6 कॉम्पलेक्स सीज करने की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है जबकि कई कॉम्पलेक्सों को नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि अब क्षेत्र वाईज अवैध कॉम्पलेक्सों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और पहले चरण में नगर परिषद की बगल में स्थित अवैध कॉम्पलेक्सों के खिलाफ सीज की कार्रवाई को अमल में लाने का नगर परिषद का प्रयास है। 
भीलवाड़ा में अधिकांश व्यवसायिक परिसर नियमों को ताक में रखकर खड़े कर दिए गए। इनके निर्माण के दौरान संबंधित अधिकारी और संस्थाएं मूकदर्शक बनी रही है जबकि निर्माण को लेकर कई अधिकारी कर्मचारी और क्षेत्र के जमादार तक को जिम्मेदारी दी हुई थी लेकिन व्यवसायिक परिसरों में न सेटबेक छोड़े गए न पार्किंग। ऐसे में शहर की यातायात व्यवस्था को पलीता लग गया है। कॉम्पलेक्सों के बाहर सड़क इतनी सिकुड़ जाती है कि लोगों को आने जाने में भी दिक्कतें होने लगती है। ऐसे ही मुद्दे को भाजपा पार्षद राजेश सिसोदिया ने पहले नगर परिषद अधिकारियों को ज्ञापन देकर उठाया। जब कार्रवाई कुछ भी नहीं तो सिसोदिया दो बार नगर परिषद के बाहर धरने पर भी बैठ गये। तब अधिकारियों और नेताओं ने समझाकर मामले को शांत किया ताकि पोल पट्टी नहीं खुल सके। लेकिन सिसोदिया यहां के अधिकारियों और नेताओं की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने उच्च न्यायालय जोधपुर की शरण ले ली। न्यायालय ने भी अवैध निर्माणों को गंभीरता से लिया और नगर परिषद से जवाब तलबी करते हुए कार्रवाई को कहा लेकिन न्यायालय की समय सीमा बीत जाने के बावजूद कार्रवाई के नाम पर कागजी कार्रवाई हो पाई है। कोई ठोस पहल नहीं की गई। न्यायालय में मामला उलझता देख अब नगर परिषद ने उन 6 कॉम्पलेक्सों को सीज करने की प्रक्रिया अपनाई जिन्हें पिछले दिनों नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों का नगर परिषद को कॉम्पलेक्सों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। परिषद अब इन 6 परिसरों को सीज करने की कार्रवाई अमल में ला रही है। ऐसा आश्वासन जोधपुर न्यायालय को लिखित में दिया है। 
ये है कॉम्पलेक्स :
नगर परिषद द्वारा बेसमेंट, पार्किंग में अनियमितताओं के संबंध में जो कार्रवाई की गई है। उनमें गांधीनगर स्थित रश्मि/ महेन्द्र नाहर, राहुल/दिनेश गोखरू, दूदूवाला कॉम्पलेक्स, पारसमल/रोशनलाल बोहरा, मीना/सुरेश जैन, रोशन श्रीमाल/शांतिलाल श्रीमाल के परिसरों के संबंध में नगर परिषद नोटिस तामिल करा दिये। लेकिन इनका कोई जवाब नहीं मिल पाया है जबकि नगर परिषद राजेन्द्र मार्ग रोड स्थित शंकर चौधरी को नोटिस तामिल करने की प्रक्रियाधीन बताया गया है। परिषद ने इन कॉम्पलेक्सों को सीज करने की कार्रवाई प्रस्तावित बताई है।
सीज के लिए टीम गठित :
नगर परिषद आयुक्त दुर्गाकुमारी ने न्यायालय के आदेश पर अधिग्रहण की कार्रवाई के लिए टीम का गठन कर कनिष्ठ अभियंता नवीन खत्री को रिसीवर नियुक्त किया है। 
ट्वीन टॉवर की तरह हो सकती है कार्रवाई?
भीलवाड़ा में अवैध निर्माण के खिलाफ अगर मामला न्यायालय में लम्बा खिंचता है तो नोयडा के ट्वीन टॉवर की तरह यहां भी कुछ कॉम्पलेक्सों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इस तरह की चर्चाएं अब शुरू हो गई है। अवैध निर्माण के चलते कॉम्पलेक्सों के कारण कई समस्याएं खड़ी हुई है। गांधीनगर में सालों पहले बने कॉम्पलेक्स यातायात के लिए बाधा बने हुए है। पुर रोड पर सड़क चौड़ी नहीं हो पा रही है जबकि सूत्र बताते है कि एक काम्पलेक्स के तलघर का कुछ हिस्सा तो सड़क की जमीन पर बना है। वहीं क्लॉथ मार्केट की गलियां इतनी संकरी है कि अगर वहां आगजनी की कोई घटना हो जाती है तो वहां दमकल भी आसानी से नहीं पहुंच पाएगी और कुछ जगह तो पहुंच पाना भी संभव नहीं है। 
नगर परिषद ने इनमें से कई कॉम्पलेक्सों के तलघर पूर्व में सीज भी किए थे लेकिन बाद में उन्हें खोल दिया गया। जिसे लेकर भी कई तरह की चर्चाएं है।