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   धूमधाम से पाश्र्वनाथ भगवान निर्वाण दिवस मनाया 

   धूमधाम से पाश्र्वनाथ भगवान निर्वाण दिवस मनाया 

 उदयपुर,BHN। पायड़ा स्थित पद्मप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में देवश्रमण आचार्य कुशाग्रनंदी महाराज, मुनि अजयदेव व भट्टारक देवेंद्र विजय, ब्रम्हचारिणी आराधना दीदी व अमृता दीदी संघ के सानिध्य में सकल दिगम्बर जैन समाज पायड़ा में तीर्थंकर पाश्र्वनाथ भगवान का निर्वाण दिवस धूमधाम से मनाया गया। प्रचार संयोजक संजय गुडलिया, दीपक चिबोडिया ने बताया चातुर्मासिक प्रवचन के साथ नित्य नियम पूजन व जलाभिषेक आदि धार्मिक कार्यक्रम हुए। आचार्य कुशाग्रनंदी महाराज ने कहा कि पाश्र्वनाथ भगवान का है मोक्ष कल्याणक, शिखरजी में स्वर्णभद्र कूट पर हुआ था। आज के ही दिन प्रात:काल विशाखा नक्षत्र में ३६ मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था। इस कूट से ८२ करोड़ ८४ लाख ४५ हजार ७४२ मुनि सिद्ध भये । प्रवक्ता प्रवीण सकरावत ने बताया कि ललीत चिबोडिय़ा द्वारा शान्ति धारा की गई भगवान पारसनाथ के निर्वाण लड्डू चढ़ाने का सौभाग्य मुकेश, प्रकाश गुडलिया को मिला।  पंचामृत अभिषेक एवम शांति धारा और निर्वाण लड्डू चढ़ाया गया। सैकड़ों बच्चों के साथ श्रावक-श्राविकाएं भाग ले रहे है। शाम को आचार्य संघ की भव्य आरती एवं भक्ति संध्या का आयोजन हुआ।   
इस दौरान आयोजित धर्मसभा में आचार्य कुशाग्रनंदी महाराज ने कहा किसी का भरोसा व विश्वास तोडऩा अपराध है। इसीलिए ज्ञानीजन कहते है जिम्मेदारी ले तो दिलोजान से निभाए। आगे-पीछे नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी पद लेने से पहले आत्मावलोकन अवश्य करें कि क्या में इस जिम्मेदारी के योग्य हूं। यदि जिम्मेदारी के लिए योग्यता नहीं रखते या समय नहीं दे पा रहे है तो पद लेने का अधिकार नहीं है।  कुर्सी हमेशा लायक को मिलनी चाहिए। नालायक को मिली तो वह खुद के साथ समाज व देश को भी बर्बाद कर देता है। अभिमानी की आंखे हमेशा छोटी होती है। यहां आंख से अभिप्राय शारीरिक सरंचना से नहीं बल्कि उस सोच से है जिसमें सामने वाला आपको दिखाई ही नहीं देता। जो मरते दम तक कुर्सी से चिपके रहते है वह आखिर में नरक में जाकर चिपक जाते है। जिसके कारण मोक्ष का सिंहासन खतरे में पड़े ऐसा सिंहासन मंजूर नहीं करे।