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ज्ञान को खत्म करता अभिमान, आसक्ति नहीं छोड़ी तो दुर्गति पक्की- समकित मुनि

ज्ञान को खत्म करता अभिमान, आसक्ति नहीं छोड़ी तो दुर्गति पक्की- समकित मुनि

भीलवाड़ा BHN

ज्ञान में इतनी ताकत है कि वह अभिमान व अहंकार को नष्ट कर सकता है लेकिन ज्ञान का अभिमान हो जाए तो अभिमान ज्ञान को खत्म कर देता है। हमारा ज्ञान बहुत सीमित है ओर बहुत सीखना बाकी है लेकिन कई बार सीखा हुआ ज्ञान अभिमान बढ़ा देता है। अभिमान को साथ लेकर चलने वाला सफल नहीं हो सकता। ये विचार डॉ. समकित मुनि ने बुधवार को शांतिभवन में नियमित चातुर्मासिक प्रवचन के तहत व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संत व साधकों के पास दो अनमोल डायमंड श्रुत ज्ञान व चरित्र ज्ञान होने के कारण वह मालामाल है लेकिन कभी-कभी इन डायमंड का सही उपयोग नहीं करने पर ये होते हुए भी कंगाल हो जाते है। मुनि ने कहा कि जो अथाह संपति पाकर भी उसे छोड़ नहीं पाते ऐसे चक्रवती भी नरक में जाते है। जो पूंजी पर इतराते रहे उन्हें आज नरक में भी जगह नहीं है। उन्होंने नरक से भी बदतर स्थिति नीगोद (एकन्द्रिय) की बताते हुए कहा कि नरक से तो एक समय सीमा के बाद वापस निकल आएंगे लेकिन एक बार निगोद अवस्था में चले गए तो वहां से वापस आने में अनंतः समय लग जाएगा। उन्होंने एकन्द्रिय में जाने से बचने के लिए आसक्ति के आवरण से बाहर निकलने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि ज्ञान,प्यार, वस्तु, व्यक्ति आदि के प्रति अपना मन गहरी आसक्ति में फंस जाए तब एकन्द्रिय में जाने की पूरी तैयारी है। पूज्य समकितमुनिजी ने कहा कि अपनी परम्परा व सम्प्रदाय के प्रति ऐसी गहरी आसक्ति की आदमी विवेक तक भूल जाए और ऐसे समय आयुष्य कर्म का बंध हो जाए तो दुर्गति पक्की है। ऐसी आसक्ति से स्वयं को बचाना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे क्रूर, रोद्र व हिंसा वाले भाव लगभग नहीं होने से नरक में जाने का खतरा तो कम है लेकिन एकन्द्रिय में जाने का खतरा ज्यादा है। मुनिश्री ने कहा कि अभिमान के दुर्गण से बचने के लिए हमेशा चिंतन करो व खुद से सवाल करों कि मुझे मानव जीवन और ये जिनशासन किस लिए मिला है। जिनशासन झगड़े करने के लिए मिला या सुलह करने के लिए मिला। जिनशासन कितने जन्मों के बाद सौभाग्य से मिला लेकिन हमारी रूचि कलह, झगड़े में हो गई तो पक्का ये जिनशासन आगे नहीं मिलेगा। खुद से ऐसे सवाल करने पर सोया हुआ मन जाग जाएगा। 

रहना है सिद्धों के साथ तो करें गुस्से का त्याग 

समकित मुनि ने कहा कि जिसकी सोच हो जाती मुझे सिद्धों के साथ रहना उसे संसार कैदखाना व बंधन लगता है। वह ऐसे कोई कर्म नहीं करेगा जिससे उससे बंधन मजबूत हो बल्कि ऐसे कार्य करेगा जिससे बंधन धीरे-धीरे खुल जाए। ऐसा करने के लिए जरूरी है देव, गुरू व धर्म के प्रति श्रद्धा रखते हुए गुस्से को एक वर्ष से अधिक नहीं पकड़ा जाए। यदि किसी अपने से झगड़े के तीन साल बाद भी बोलचाल नहीं है तो समझना हम गुस्से को पकड़े हुए है। हमारा क्रोध, अभिमान, लोभ, माया एक साल के भीतर खत्म होनी होती है। इन्हें लंबा ले जाने पर मोक्ष मार्ग बहुत लंबा हो जाता है। 

तप साधना की होड़, सुनीता के 19 उपवास के प्रत्याख्यान

धर्मसभा के शुरू में जयवंत मुनि ने गुरूवर मेरे मुझ पर इतनी सी दया कर दो गीत प्रस्तुत किया। धर्मसभा में भवान्त मुनि का भी सानिध्य मिला। चातुर्मास में तप साधना की भी होड़ सी लगी हुई है। धर्मसभा में बुधवार को श्राविका सुनीता सुकलेचा ने 19 उपवास की तपस्या के प्रत्याख्यान ग्रहण किए तो साधना जैन ने 9, पायल रांका एवं नेमीचंद जैन ने 8-8 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। अतिथियों का स्वागत श्रीसंघ के अध्यक्ष राजेन्द्र चीपड ने किया। धर्मसभा का संचालन श्रीसंघ के मंत्री राजेन्द्र सुराना ने किया। प्रवचन स्थल की व्यवस्थाओं में श्रीशांति जैन महिला मंडल की अध्यक्ष स्नेहलता चौधरी, मंत्री सरिता पोखरना, महावीर युवक मंडल सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रमोद सिंघवी, मंत्री अनुराग नाहर सहित इन संगठनों के कार्यकर्ता आदि भी सहयोग कर रहे है। 

बेटियों व उनकी माताओं के लिए विशेष प्रवचन श्रृंखला शुक्रवार से

समकित मुनि ने बताया कि बड़ी होती बेटियों एवं उनकी माताओं के लिए 5 से 7 अगस्त तक तीन दिवसीय विशेष प्रवचन श्रृंखला पिंकी का क्या होगा का आयोजन होंगा। इसमें श्राविकाएं अपनी ऐसी बेटियों को साथ लेकर अवश्य शामिल हो जो कक्षा 9 या उससे बड़ी कक्षाओं में पढ़ रही है। इस प्रवचन श्रृंखला के माध्यम से बदलते परिदृश्य में युवा होती बेटियों के सामने आ रही चुनौतियों एवं परिजनों की भूमिका पर चर्चा होंगी। इसी तरह 7 अगस्त रविवार को दोपहर 1.30 से 3 बजे तक शांति भवन में प्रश्नमंच का आयोजन होगा।  रक्षाबंधन पर 11 अगस्त को बदलते रिश्ते बदलता रक्षाबंधन विषय पर विशेष प्रवचन के साथ सुबह 9 से 9.30 बजे तक भाई-बहन का जोड़े से जाप होगा। नियमित प्रवचन के तहत ही 12 अगस्त को मरूधर केसरी मिश्रीमल एवं रूपचंद की जयंति मनाते हुए गुणानुवाद किया जाएगा। श्रीशांति जैन महिला मंडल के तत्वावधान में शांतिभवन में समकित मुनि के सानिध्य में शांतिभवन में 13 से 15 अगस्त तक प्रतिदिन दोपहर 2.30 से 4.30 बजे तक बच्चों के लिए शिविर का आयोजन होगा। इसमें 8 से 15 वर्ष की उम्र तक के बच्चों को मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।