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राजसमन्द विधानसभा उपचुनाव: कांग्रेस और भाजपा में कांटे की टक्कर

राजसमन्द विधानसभा उपचुनाव: कांग्रेस और भाजपा में कांटे की टक्कर

दो दशक से भाजपा का कब्जा इस बार कांग्रेस को आस, दो लाख 10 हजार 610 मतदाताओं पर 10 दावेदार 
राजसमंद (राव दिलीप सिंह)।
विधानसभा उपचुनाव में राजसमंद सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है। यह वह सीट है जो करीब 2 दशक से बीजेपी के कब्जे में है। कांग्रेस इसे पाने के लिए कोई अवसर खोना नहीं चाहती सत्तारूढ़ कांग्रेस की नजर सबसे ज्यादा राजसमन्द पर है।
दो दशक से भाजपा का कब्जा, इस बार कांग्रेस को आस
यही वह सीट है जो करीब दो दशक से कांग्रेस की पकड़ से दूर रही है। इन 20 बरसों में प्रदेश में कांग्रेस के सत्ता में आने के बावजूद यह सीट भाजपा के नाम रही है। इस सीट पर काबिज होने के लिए कांग्रेस एड़ी से चोटी का जोर लगा रही है। उधर भाजपा ने इस सीट के लिए किरण की पुत्री दिप्ती माहेश्वरी पर दांव खेलते हुए एक बार फिर राजसमन्द पर भाजपा के राज को कायम रखने कि कवायद तेज करते हुए मैदान में हैं।
नाम वापसी के बाद राजसमन्द में 10 उम्मीदवार मैदान में डटे हुए हैं। यह सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला है । ऑल एलपीपी यहां से जोर आजमाइश में लगी हुई है। भाजपा ने दिवंगत विधायक किरण माहेश्वरी की पुत्री दीप्ति माहेश्वरी को टिकट दिया है वहीं कांग्रेस ने नए चेहरे के रूप में तनसुख बोहरा (जैन) को मैदान में उतारा है । आरएलपी ने प्रहलाद खटाना को अपना उम्मीदवार बनाया है। राजसमन्द में पहली बार उप चुनाव हो रहे हैं यहां दो दशक से कांग्रेस को जीत नहीं मिल पाई है। किरण माहेश्वरी कई बरसों से इस क्षेत्र की जनप्रतिनिधि रही थीं। भाजपा मेवाड़ मारवाड़ आमान परिवर्तन, बड़ी लाइन का विस्तार, विधानसभा के सभी राजस्व गांवों को पक्की सड़क से जोडऩा, मेडिकल कॉलेज की स्थापना, राजसमंद झील की नहरों का नवीनीकरण करना, खनिज उद्योग का विकास युवाओं को रोजगार, किसानों को 12 घंटे बिजली उपलब्ध कराना आदि मुद्दों के साथ मैदान में है।
गढ़ भेदने के लिए कुछ भी करेंगे तनसुख
राजसमन्द सीट से निवर्तमान विधायक किरण माहेश्वरी 30 नवंबर को दिवंगत हो गई थीं। पहले कुछ उपेक्षित चल रही इस सीट पर सरकार ने विकास के नजरिए से फोकस किया। कांग्रेस की हरचंद कोशिश बीजेपी का यह गढ़ भेदने की है। यहां 76.75 करोड़ रुपए के 109 विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया है। इसके अलावा 8.67 करोड़ रुपए के 4 कार्यों का लोकार्पण कर जनता में यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सरकार राजसमंद के लिए फिक्रमंद है। इसके साथ ही बजट में तीनों विधानसभा क्षेत्रों के लिए करोड़ों की घोषणाएं की गईं। उसी के साथ विधानसभा क्षेत्र में पीने के लिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना, किसानों के लिए नहर से सिंचाई की पूर्ण व्यवस्था करना, मार्बल खनन ग्रेनाइट फेल्सपार से जुड़ी समस्याओं का समाधान, गोशाला एवं पशुधन के  संरक्षण व पशुपालन व्यवसाय में उन्नति के लिए नवाचार, राजसमंद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना करना व नहरों का विस्तारीकरण के तहत झील को लबालब भरना आदि मुद्दों के साथ कांग्रेस मैदान में डटी हुई है।
7 बार कांग्रेस और 6 बार भाजपा जीती
राजसमन्द विधानसभा सीट पर कांटे का मुकाबला  है। अब तक सात बार कांग्रेस और छह बार भाजपा ने विजय हासिल की है। 2003 से ही यह भाजपा की परंपरागत सीट बनी हुई है। इसके बाद 2008 में राजसमंद सीट आरक्षित सीट समाप्त हो गई तब से किरण माहेश्वरी जीतती आ रही थीं। 2008 और 2013 में कांग्रेस प्रत्याशी हरिसिंह राठौड़ की हार हुई। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने प्रत्याशी बदला, लेकिन जीत नसीब नहीं हुई। 
क्षेत्र के लोगों की मांगें और मुद्दे
- क्षेत्र में मार्बल की खाने हैं, इसलिए यहां मार्बल मंडी की स्थापना हो।
- राजसमंद झील के किनारे रिंग रोड बने और झील को सालभर भरा रखने के लिए पानी लाया जाए।
- शहर की सड़कों का रखरखाव और गांवों में निर्बाध बिजली आपूर्ति।
- मारवाड़-मावली ब्रॉडगेज लाइन की मांग भी काफी पुरानी है।
- नंदसमंद से राजसमंद झील में पानी लाने वाली खारी फीडर नहर का चौड़ाईकरण।
जातिगत समीकरण
अनुसूचित जाति - 37604
कुमावत - 30839
जाट - 22053
अजजा - 15761
गुर्जर - 19228
ब्राह्मण - 18862
जैन - 16472
राजपूत - 16470
मुस्लिम - 14531
तैली - 7382
विधानसभा क्षेत्र में मतदाता
कुल मतदाता - 221610
पुरुष - 112718
महिला - 108892
विधानसभा राजसमन्द के उप चुनाव  में 10 उम्मीदवार मैदान में डटे*
कांग्रेस - तनसुख बोहरा (जैन)
भाजपा - दिप्ती माहेश्वरी 
आरएलपी - प्रहलाद खटाणा
बीटीपी - अमर सिंह कालून्धा 
राइट टू रिकॉल - हितेश शाक्य 
निर्दलीय - कमलेश भारती, नीरू राम कापड़ी, बाबूलाल सालवी, सुरेश जोशी, सोहनलाल भाटी 
निर्दलीय प्रत्याशी पूर्व उप प्रधान जोशी ने भाजपा की प्राथमिक  सदस्यता से दिया इस्तीफा
निर्दलीय प्रत्याशी पूर्व उप प्रधान सुरेश जोशी ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देने के बाद मैदान में डटे हैं। वे अंदरखाने प्रचार को गति देने में लगे हैं। भाजपा का एक धड़ा स्थानीय प्रत्याशी की मांग करते हुए टिकट की कतार में था। उनका कहना है कि भाजपा में परिवारवाद को बढ़ावा देने और स्थानीय दावेदारों को टिकट नहीं देने के विरोध में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है।