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कोरोना से एक दिन में रिकॉर्ड 6 हजार से ज्यादा मौतें; जानें क्यों हुआ ऐसा?

कोरोना से एक दिन में रिकॉर्ड 6 हजार से ज्यादा मौतें; जानें क्यों हुआ ऐसा?

नई दिल्ली। देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा बीते कई दिन से लगभग दो हजार प्रतिदिन पर स्थिर होने के बाद नौ जून को अचानक छह हजार के पार पहुंच गया। इसका प्रमुख कारण बिहार में कोरोना के कारण मौत के आंकड़े में करीब 73 फीसद का बड़ा बदलाव होना रहा। सरकारी आंकड़े के मुताबिक, सात जून 2021 तक बिहार में कोरोना से 5,424 लोगों की मौत हुई थी (मार्च 2020 से मार्च 2021 की 1,600 मौत शामिल) लेकिन अस्पताल और जिला स्तर पर सत्यापन में पता चला कि कोरोना से प्रदेश में अब तक 5,424 नहीं बल्कि 9,375 लोगों की मौत हुई। यानी बिहार सरकार के पास 3,941 लोगों की कोरोना से मौत का आंकड़ा ही नहीं था। इस संबंध में पटना हाई कोर्ट के दखल के बाद बनाई गई दो कमेटियों की रिपोर्ट में मौत का नया आंकड़ा सामने आया है।

बिहार में कोरोना से मौत का आंकड़ा बदला, एक दिन में 73 फीसद की वृद्धि

मामले में विवाद बढ़ने पर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया कि गांवों और ग्रामीण इलाकों में मौत का आंकड़ा अपडेट नहीं हो सका था। बिहार के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया था कि 18 मई को मृतकों की पहचान के लिए गठित दो कमेटियों ने आठ जून को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के अनुसार, कमेटी ने करीब चार हजार ऐसे लोगों की पुष्टि जिनकी कोरोना से मौत का आंकड़ा सरकार के पास नहीं था।

 

मृतक आश्रितों को मिलेगा मुआवजा

बिहार में जिनकी कोरोना से मौत की पुष्टि हुई है, उनके आश्रितों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया शुरू भी कर दी गई है। अब तक 3,737 लोगों के लिए राशि जारी भी की जा चुकी है। राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को ही कोरोना मृतकों के आश्रितों को मुआवजा देने के लिए 300 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की। बिहार कोरोना मृतकों के आश्रितों को आर्थिक सहायता देने वाला देश का पहला राज्य है।

 

कोरोना के बाद मौत पर भ्रम की स्थिति

कई ऐसे लोगों की मौत भी हो रही है जो कोरोना के बाद इसके दुष्प्रभावों से होने वाली दिक्कतों से पीड़ित थे। अभी तक देश में ऐसी मौत को कोरोना से मौत में दर्ज नहीं किया जा रहा है। जिससे आश्रितों के द्वारा यह साबित करना मुश्किल हो रहा है कि उनके स्वजन की मौत कोरोना से हुई थी। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका में कोरोना से मौत पर सरकार द्वारा आश्रितों को चार लाख रुपये की मदद की मांग की गई है। इसमें 2015 की केंद्र सरकार की एक योजना का हवाला दिया गया है जिसमें किसी नोटिफाइड बीमारी या आपदा से मृत्यु पर चार लाख रुपये मुआवजे का प्रविधान है। हालांकि यह योजना पिछले साल बंद कर दी गई। इस याचिका पर शुक्रवार 11 जून को सुनवाई होनी है।

 

उत्तराखंड में भी आंकड़े में लापरवाही

उत्तराखंड में भी कोरोना का मौत के आंकड़े में लापरवाही सामने आई है। अप्रैल-मई 2021 में सरकारी व निजी अस्पतालों ने पूरा आंकड़ा राज्य कोरोना कंट्रोलरूम को उपलब्ध नहीं कराया। 17 मई से 10 जून तक राज्य में 798 ऐसी मौत दर्ज कराई गई हैं, जो पहले रिकार्ड में नहीं थीं। अब तक राज्य में कोरोना से कुल 6,878 मौत दर्ज हैं। अस्पतालों ने स्टाफ की कमी और पोर्टल की जटिलता को मौत का रिकार्ड मेनटेन न कर पाने का कारण बताया। फिलहाल किसी अस्पताल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

 

बिहार के आंकड़े

-प्रदेश में दूसरी लहर ने बीते वर्ष के सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए। नए संक्रमितों की संख्या एक दिन में 15 हजार के पार तक पहुंची।

-मार्च 2020 से मार्च 2021 के बीच कोरोना से राज्य में करीब 1,600 लोगों की जान गई थी।

-मार्च 2021 से आठ जून के बीच 7,775 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। दूसरी लहर ने राज्य में पहली के मुकाबले साढ़े चार गुना अधिक लोगों की जान ले ली।

 

देश में पहली बार रोजाना मौत का आंकड़ा छह हजार पार हुआ

- बिहार में कोरोना से मौत के आंकड़े में आई उछाल के कारण देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा पहली बार छह हजार रोजाना के पार हो गया।

- वल्र्डोमीटर के अनुसार, भारत में एक दिन में कोरोना से सबसे अधिक मौत 18 मई को दर्ज की गईं जब यह आंकड़ा 4,535 था। इससे एक दिन पहले 4,340 मौत दर्ज की गई थीं।

-जून के पहले सप्ताह में देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा करीब दो हजार प्रतिदिन ही रिकार्ड किया जा रहा था। छह जून को देश में 2,445, सात को 2,115 और आठ जून को 2,213 मौत कोरोना के कारण हुईं।

 

-नौ जून को यह आंकड़ा अचानक उछलकर 6,138 पर पहुंच गया जिसका कारण आठ जून को बिहार में मौत के आंकड़े में संशोधन रहा।