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रेमडेसिवीर, अपनों को बचाने के लिए कई किमी लंबी लाइन में लग रहे लोग

रेमडेसिवीर, अपनों को बचाने के लिए कई किमी लंबी लाइन में लग रहे लोग

नई दिल्ली : देश में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में काम आने वाली दवा रेमडेसिवीर की किल्लत हो गई है. खासकर, कोरोना प्रभावित राज्यों में इस दवा की भारी कमी देखी जा रही है. आलम यह कि इस दवा के लिए मरीजों के परिजनों को दो-दो किलोमीटर तक लगी कतारों में देर रात से लगना पड़ रहा है. हालांकि, कोरोना संक्रमित मरीजों को यह परिजन डॉक्टरों की पर्ची और आधार कार्ड दिखाने के बाद ही दिया जा रहा है. सोचने वाली बात यह भी है कि कोरोना प्रभावित राज्यों में रेमडेसिवीर की किल्लत होने के बाद कालाबाजारियों की चांदी हो गई है. खुदरा बाजार में रेमडेसिवीर की एक शीशी 1200 से 4000 रुपये में बेची जा रही है.

महाराष्ट्र

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोरोना संक्रमण की मार से झेल रहे महाराष्ट्र में मरीजों के परिजनों को रेमडेसिवीर के लिए लंबी-लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है. महाराष्ट्र के नासिक जिले में कोरोना की रेमडेसिवीर दवा के लिए मेडिसीन की दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है. वहीं, सूबे के पुणे और नागपुर में भी इस दवा की किल्लत होने की खबर आ रही है. नासिक जिले में रेमडेसिवीर की किल्लत को लेकर जिलाधिकारी सूरज मंथरे कहते हैं कि उन्होंने रेमडेसिवीर को लेकर कुछ निर्देश जारी किए हैं. उन्हें इसकी आपूर्ति में दखल देने की जरूरत महसूस हो रही है. जिलाधिकारी मंथरे ने उम्मीद जाहिर की है कि कुछ ही दिनों में रेमडेसिवीर की आपूर्ति व्यवस्थित कर दी जाएगी. 

मध्य प्रदेश

कोरोना प्रभावित राज्यों में शामिल मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भी रेमडेसिवीर को लेकर दवा दुकानों पर लोगों का हुजूम देखा जा रहा है. देश में महामारी की दूसरी लहर आने के बाद इस शहर में रेमडेसिवीर इंजेक्शन की मांग अचानक तेजी से बढ़ गई. स्थिति यह है कि शहर की कई दवा दुकानों पर मरीजों के परिजनों की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं, तो कई दुकानों में इसका स्टॉक ही खत्म हो गया है.

क्या कहते हैं अधिकारी : प्रशासनिक अधिकारियों की मानें, तो शहर में रेमडेसिवीर की मांग अचानक तेज होने से इसकी कालाबाजारी भी बढ़ गई है. आलम यह कि इंदौर में रेमडेसिवीर की कालाबाजारी के मद्देनजर वहां के जिलाधिकारी मनीष सिंह को आधार कार्ड और फोटो पहचान पत्र दिखाने के बाद रेमडेसिवीर देने का आदेश देना पड़ा. अपने आदेश में जिलाधिकारी सिंह ने मरीज की पॉजिटिव रिपोर्ट और डॉक्टरों की पर्ची दिखाना भी अनिवार्य कर दिया.

उत्तर प्रदेश

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश की झांसी और प्रयागराज में भी कोरोना संक्रमित मरीजों को रेमडेसिवीर की किल्लत की मार झेलनी पड़ रही है. खबर है कि झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कोरोना के मरीजों को लगने वाले रेमडेसिवीर का इंजेक्शन खत्म हो गया है. इससे बड़ी समस्या यह खड़ी हो गई है कि जरूरत पड़ने पर मरीजों के परिजनों को खुद ही बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही है. झांसी की दवा दुकानों पर रेमडेसिवीर का एक इंजेक्शन 1100 से 1200 रुपये में बेचा जा रहा है.

झांसी में आगरा से मंगानी पड़ी दवा : मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते एक सप्ताह के दौरान झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में रेमडेसिवीर का करीब 300 इंजेक्शन की खपत हो गई. आलम यह कि यहां पर इंजेक्शन खत्म होने के बाद प्रशासन को आगरा मेडिकल कॉलेज से बीते शुक्रवार की रात को तत्काल रेमडेसिवीर के 15 इंजेक्शन मंगवाने पड़े. मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ हरीशचंद्र आर्या कहते हैं कि इंजेक्शन के संबंध में सरकार से बात की गई है. गुरुवार यानी 8 अप्रैल को रेमडेसिवीर का इंजेक्शन आने की संभावना है.

प्रयागराज में 4000 रुपये बेचा जा रहा एक इंजेक्शन : वहीं, उत्तर प्रदेश के दूसरे शहर प्रयागराज में भी कोरोना के इलाज में कारगर साबित होने वाले रेमडेसिवीर दवा के इंजेक्शन की उपलब्धता कम हो गई है. स्थिति यह है कि यहां के दवा दुकानदारों को पिछले हफ्ते में करीब तीन बनारस से रेमडेसिवीर का इंजेक्शन मंगाना पड़ा. बावजूद इसके शहर में अब भी मांग और आपूर्ति में अंतर बना हुआ है. हालांकि, शहर में सरकार के निर्देश पर रेमडेसिवीर इंजेक्शन डॉक्टर की पर्ची दिखाने के बाद ही दी जा रही है. मरीज के परिजन को डॉक्टर की पर्ची के साथ पॉजिटिव रिपोर्ट भी लानी होगी. फिलहाल, रेमडेसिवीर इंजेक्शन 4000 रुपये में बेचा जा रहा है.

गुजरात

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात के अहमदाबाद और सूरत शहर में भी रेमडेसिवीर की कमी पड़ गई है. स्थिति यह है कि गुजरात के इन दोनों शहरों में तो कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों में आईसीयू में बिस्तरों की भी किल्लत हो गई है. रेमडेसिवीर का इंजेक्शन जुटाने के लिए मरीजों के परिजन हाथ में आरटीपीसीआर रिपोर्ट, डॉक्टर की पर्ची और आधार कार्ड लेकर घंटों कतार में खडे़ रहते हैं. फिर जब उनका नंबर आता है, तब उन्हें महंगे दामों पर रेमडेसिवीर इंजेक्शन मिलता है.