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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने सीखा वेस्ट डिकम्पोजर बनाना

स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने सीखा वेस्ट डिकम्पोजर बनाना

भीलवाड़ा |कृषि विज्ञान केन्द्र भीलवाड़ा द्वारा प्राकृतिक खेती पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन सुवाणा पंचायत समिति के गाँव पोण्डरास में किया गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा.ॅ सी. एम. यादव ने प्राकृतिक खेती की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए रासायनिक एवं प्राकृतिक खेती में अन्तर स्पष्ट किया। डॉ. यादव ने वेस्ट डिकम्पोजर की आवश्यकता एवं महत्त्व पर चर्चा करते हुए बताया कि वेस्ट डिकम्पोजर एक तरल रसायन रहित जैविक खाद है तथा रसायन रहित जैविक खेती एक सदाबहार कृषि पद्धति है जो पर्यावरण की शुद्धता, जल व वायु की शुद्धता, भूमि का प्राकृतिक स्वरूप बनाने वाली, जल धारण क्षमता बढ़ाने वाली, धैर्यशील कृषि उत्पाद की लागत कम करने, दीर्घकालीन, स्थिर व अच्छी गुणवत्ता वाली पारम्परिक पद्धति है। यह बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने में कारगर साबित हुई है। वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता प्रकाश कुमावत ने जैविक खेती में वेस्ट डिकम्पोजर की आवश्यकता के साथ ही बताया कि यह भूमि में नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं फॉस्फेट की कमी को पूरा करता है साथ ही वेस्ट डिकम्पोजर के प्रयोग एवं भण्ड़ारण की तकनीकी जानकारी से अवगत कराया। कार्यक्रम में 27 कृषक महिलाओं ने भ्ज्ञाग लिया।