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सोन चिड़िया मेरी बिटिया अभियान के तहत 1000 घर बनाने का लक्ष्य

सोन चिड़िया मेरी बिटिया अभियान के तहत 1000 घर बनाने का लक्ष्य

राजसमन्द (राव दिलीप सिंह) देशभर मे बेटिया कम हो रही हर जगह बेटी बचाओं बेटी पढाओ अभियान सहित कई अभियान चलायें जा रहे हैं और एक ऐसा ही अभियान राजसमन्द के महिला अधिकारिता विभाग के निर्देशन मे देवगढ़ के नेहरू युवा केन्द्र के कॅरियर महिला मंडल की महिलाओ द्वारा बेटियो को बचाने के लिए प्रारम्भ हो रहा है जिससे बिटिया और चिडिया दोनो के लिए प्रयास हो सके।  राजस्थान के लोकल परिवेश के परिवारों में लोग अपनी बेटियों को चिड़कली कहकर बुलाते हैं। चिड़कली यानी चिड़िया की तरह चीं-चीं करने वाली लाड़ली...जब तक बेटी घर में  है पूरा आंगन चह-चहाता रहता है । महिला अधिकारिता सहायक निदेशक रश्मि कौशिक ने बताया कि इसी भाव को लेकर सोन चिड़िया मेरी बिटिया अभियान के लिए पिछले एक माह से  प्रयास किये जा रहे हैं। 

 

*चिडियाओ के लिए 1000 घर बनाने का लक्ष्य*  

पिछले एक माह से सोन चिड़िया मेरी बिटिया अभियान के तहत देवगढ़ की  महिलाओ द्वारा लकडी की शीट को काटकर उसे फेविकोल से चिपकाया गया और डिजाईन कर कई स्पैरो नेस्ट बनाये गये वही उस पर विभिन्न प्रकार से चित्रांकन कर बेटी बचाओं का संदेश दिया। इन स्पैरो नेस्ट को बेटी का नाम देकर परिवार के सदस्यो द्वारा घरो मे लगाये जायेंगे। वास्तु शास्त्र के अनुसार चिड़िया का घर मे घोसंला बनाना काफी शुभ माना जाता हैं। जिससे घर मे सुख समृद्धि आती हैं। मंडल कि महिलाओ द्वारा सोन चिड़िया मेरी बिटिया  अभियान के तहत 1000 स्पैरो नेस्ट निःशुल्क बनाकर विभिन्न जगह पर लगाये जायेंगे जिससे चीं...चीं...करने वाली लाडली चिडकली को सुनते है बेटिया की याद आने लगे। 

 

*लुप्त होती बेटी और चिडिया के लिए हो प्रयास*  

मंडल कि महिलाओ को कहना है कि आधुनिक शहरीकरण ने उसके प्राकृतिक घरोंदो का बर्बाद कर दिया और पक्के भवनो मे उसे कोई एक छोटा से कौना देने को भी तैयार नही हैं। इसी सोच को लेकर हमने यह शुरूआत की हैं। आज इंसान इतना खुदगर्ज हो चुका है कि वो न केवल उसके घोंसलों को उजाड़ रहा है, बल्कि चिड़ियाओं को मारकर खा भी रहा है। अगर लोग चिड़िया को अपनी बेटी मान लें तो कोई भी बाप अपनी बेटी की बलि नहीं चढ़ने देगा।

 

मंडल की इस टीम ने किया कार्य*

भावना पालीवाल, किरण गोस्वामी, डा. सुमिता जैन, भावना सुखवाल, अवंतिका शर्मा, नीलम पंवार, संगीता रेगर, भगवती, हेमलता सहित कई महिलाओ ने अपना योगदान दिया।