boltBREAKING NEWS
  • भीलवाड़ा हलचल के नाम पर किसी को जबरन विज्ञापन नहीं दें और धमकाने पर सीधे पुलिस से संपर्क करें
  •  
  •  

सार्वजनिक पुस्तकालय एवं वाचनालय खोलने की मांग पकड़ने लगी है जोर....

सार्वजनिक पुस्तकालय एवं वाचनालय खोलने की मांग पकड़ने लगी है जोर....

 राजसमन्द (राव दिलीप सिंह) प्रदेश में विगत दो-तीन वर्षों में विद्यार्थियों में तेजी से लाइब्रेरी एवं कोचिंग परंपरा पनपने लगी है, जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों बेरोजगार विद्यार्थी अपनी तैयारी करने के लिए जाते हैं जिसके कारण महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों का ठहराव कम हुआ है ! हालांकि, कोरोना काल अवधि के दौरान ऑनलाइन स्टडी का प्रचलन भी खूब फला फूला है ! लेकिन, ऑनलाइन स्टडी के कारण ना केवल एंड्राइड फोन, लैपटॉप, रिचार्ज, इंटरनेट कनेक्टिविटी की उपलब्धता का संकट आया है ! बल्कि तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों में कई प्रकार के नेत्र विकार, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, भूख नहीं लगना जैसे दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे हैं ! इन समस्याओं को मध्य नजर रखते हुए सामाजिक संस्थान परमार्थ सेवा संस्थान- चारभुजा, राजसमंद ने माननीय अशोक गहलोत मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार, राजेंद्र यादव भाषा एवं पुस्तकालय मंत्री राजस्थान सरकार, अरविंद कुमार पोसवाल जिलाधीश राजसमंद, निमिषा गुप्ता मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजसमंद एवं उपखंड अधिकारी महोदय को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रदेश के मेवाड़ अंचल के राजसमंद जिले की 8 तहसीलों जिनमें राजसमंद जिला मुख्यालय सहित देवगढ़ व नाथद्वारा नगरपालिका क्षेत्रों तथा कुंभलगढ़, खमनोर, देलवाड़ा, आमेट, रेलमगरा, देवगढ़, भीम तहसील क्षेत्र मुख्यालयों पर सार्वजनिक आदर्श महात्मा गांधी पुस्तकालय एवं वाचनालय की स्थापना करवाई जाए ! जिनमें सुसज्जित पठन-पाठन की व्यवस्था सहित नवीनतम समसामयिकी आधारित पत्र-पत्रिकाओं एवं विभिन्न विषय आधारित पुस्तकों की व्यवस्था भी सुनिश्चित हो ! ताकि भौगोलिक दृष्टि से जटिल क्षेत्र एवं सुदूर अंचल में रहने वाले ग्रामीण विद्यार्थियों को उन्हीं के आसपास के क्षेत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का उचित माहौल मिल सके तथा शहरी क्षेत्र में रहकर कोचिंग व लाइब्रेरी सुविधा लेने के लिए मकान किराए आदि के पडने वाले आर्थिक भार को कम किया जा सके ! 

              संस्थान के संस्थापक शिक्षाविद कैलाश सामोता का कहना है कि राजस्थान सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम 2006 में प्रत्येक जिले में जिला मुख्यालय पर आदर्श सार्वजनिक पुस्तकालय स्थापित की जाने की बात कही गई थी ! लेकिन, आज तक जिले में सार्वजनिक पुस्तकालय एवं वाचनालय की स्थापना सुनिश्चित नहीं की जा सकी है, जिसके कारण हजारों नौजवानों को प्रदेश के अन्य सुदूर एवं महेंगे क्षेत्रों जैसे जयपुर, सीकर, उदयपुर, जोधपुर अजमेर, आदि महानगरीय क्षेत्रों में जाकर, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती है, जो विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों के लिए आर्थिक व मानसिक अधिभार है ! 

         

          संस्थान के उपाध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी महिला बाल विकास कार्यालय राजसमंद उपेंद्रनाथ नैयना देव ने बताया कि राजसमंद जिले में अनेक वर्षों से शैक्षणिक स्तर में सुधार नहीं हो पाने का मूल कारण, शिक्षा के लिए मूलभूत तथा ढांचागत व्यवस्थाओं की अनुपलब्धता है ! विशेषकर महिलाओं में अशिक्षा के कारण ही शिक्षा का उचित माहौल नहीं बन पा रहा है ! इसलिए प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर सुविधा संपन्न पुस्तकालयों की व्यवस्था बेहद ही जरूरी है ! जो ना केवल शैक्षणिक माहौल तैयार करने में सहायक होंगे, बल्कि एक संस्कारवान समाज निर्माण के केंद्र भी बनेंगे !जिला मुख्यालय पर स्थापित हो आदर्श सार्वजनिक पुस्तकालय...