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साल 2022 पर रहेगा शनि का असर, हिंदू नववर्ष के राजा भी शनि ही, 1993 के बाद जाएंगे कुंभ राशि में

साल 2022 पर रहेगा शनि का असर, हिंदू नववर्ष के राजा भी शनि ही, 1993 के बाद जाएंगे कुंभ राशि में

तिष शास्त्र के अनुसार, नव सवंत्सर 2079 के राजा भी शनिदेव ही रहेंगे। पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार, साल के पांच महीने जनवरी, अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और दिसंबर में 5 शनिवार आएंगे। ये सभी गणनाएं सिद्ध करती हैं कि साल 2022 में शनि का प्रभाव सभी राशियों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगा। आगे जानिए साल 2022 और शनि का कनेक्शन…

1993 के बाद शनि जाएगा कुंभ राशि में

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि ग्रह हर ढाई साल में राशि बदलता है। इस साल 28 अप्रैल को शनि मकर राशि से निकलकर कुंभ में प्रवेश करेगा। ज्योतिष के नजरिये से देखा जाए तो 1993 के बाद अब 2022 में शनि कुंभ राशि में आएगा। साल के मध्य में 12 जुलाई को शनि वक्री होकर पुन: मकर राशि में प्रवेश करेगा। शनि की ये स्थिति 23 अक्टूर को शनि पुन: मार्गी हो जाएगा यानी सीधी चाल चलने लगेगा। मकर और कुंभ दोनों ही शनि के स्वामित्व वाली राशि है।

नए संवत्सर का राजा शनि
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 बार 2 अप्रैल से शुरू होने वाले नए संवत्सर 2079 का राजा शनि रहेगा। साथ ही धन और बारिश का स्वामी भी शनि रहेगा। इसलिए शनि के शुभ प्रभाव से निचले दर्जे के लोगों को तरक्की के मौके मिलेंगे। छोटे बिजनेस या नए स्टार्टअप बढ़ेंगे और सफल भी होंगे। दलित वर्ग को सम्मान और पद-प्रतिष्ठा मिलेगी। किसान और मजदूर वर्ग के लिए भी ये साल बहुत अच्छा रहेगा। सरकार जनहित में बड़े कदम उठाएगी। देश में न्याय प्रक्रिया मजबूत होगी। लोगों के हित में बड़े कानूनी फैसले होंगे। धर्म, आध्यात्म, शिक्षा व संस्कृति क्षेत्र से जुड़े लोगों का सम्मान बढ़ेगा। महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिलेंगे।

साल के प्रमुख त्योहार भी शनिवार को 
साल 2022 में एक दो नहीं बल्कि 17 छोटे-बड़े व्रत-त्योहार भी शनिवार को ही मनाएं जाएंगे।  इस साल वसंत पंचमी, जया एकादशी, विजया एकादशी, गुड़ी पड़वा, हनुमान जयंती, वैशाख अमावस्या, नरसिंह जयंती, गायत्री जयंती, निर्जला एकादशी, भाद्रपद अमावस्या, पितृपक्ष की शुरुआत, कन्या संक्रांति, धनतेरस और लाभ पंचमी, तुलसी विवाह और गीता जयंती के अलावा भी कई पर्व उत्सव शनिवार को आने से उनका महत्व और भी बढ़ जाएगा।

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