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आग्रह" मानो तो घर में रहो, न मानो तो "कोरोना कारागृह" में "स्वागत" है...

आग्रह


         -सुशील चौहान -
भीलवाड़ा। लोगों को बिना जरूरी  काम घर से नहीं निकलने के  "आग्रह" के लिए अब "शब्द" भी कम पड़ने लगे है।  कैसे समझाइश करें । और अब तो लगता है क्यों समझाइश करें। हर रोज़ हर घंटे लोगों की "सांस" कोरोना से "टूट" रही है  । फिर भी लोग जागते हुए भी "सोने" का नाटक किये जा रहे है । कोरोना इतना बेरहम हो चुका है कि अब न जात पात देखता है। न ही उम्र। हर दिन बस लोग अलविदा हो रहे है। लेकिन जिंदा लोगों को अभी शायद यह बात ज्यादा समझ नहीं आ रही। लेकिन बहुत ही हास्यास्पद है कि अभी भी लोग कोरोना को लेकर गंभीर नहीं है। कोई "मॉर्निंग वॉक" कर रहा है तो कोई "ताज़ा सब्जी" लेने हर सुबह निकल रहा है। हद तो देखिए कि सब्जी लेने के लिए सपरिवार निकल रहे है। अब तो मान जाए । अब आग्रह नही मानेंने वालों के लिए कारागृह की व्यवस्था की गई है। एसडीएम ओम प्रभा जी ने बताया कि जो लोग आग्रह से नहीं माने वे अब इस महामारी के दौर में कोरोना कारागृह में होंगे। उनका टेस्ट होगा और रिजल्ट के मुताबिक कार्यवाही होगी। हो सकता है चौदह दिन तक घर के दर्शन न हो। अब आपको यहां यह बताना जरूरी हैं कि यह "आदर्श कोरोना कारागृह" हैं "कहाँ। यह आटूण में हैं जहां "अम्बेडकर आवासीय छात्रावास" में आपको रखा जाएगा। पोजिटिव आ गए तो समझो गए "चौदह दिन" के लिए। फिर यही खाना हैं रहना हैं।  आप यहां आकर  गुनगुनाओंगे " हाल क्या हैं दिलों का यह ना पूछो"...।इसलिए फिर से आग्रह है की केवल  "तफरी" के लिए घर से न निकले। बहुत जरूरी काम को पुलिस भी समझती है लेकिन "नाटकबाजी" को भी जानती है। इसलिए एक ही आग्रह है कि घर पर रहे बहुत जरूरी हो तो ही घर से निकले। केवल "माहौल" देखने और "तफरी" करने निकले तो  "हो जाओ तैयार साथियों हो जाओ तैयार" कोरोना कारागृह में आपका "स्वागत" होगा। हा एक बात ध्यान रखना यहां सिर्फ और सिर्फ आप ही होंगे और कोई नहीं। यहां ना तो घर वाले होंगे और ना ही आपसे बतियाने वाले। होंगे तो केवल "बस आप बस आप"। इसलिए फिर समझा रहे हैं घर में ही रहो कम से कम अपने तो हैं आपके साथ। मानो तो ठीक नहीं तो आइए "आपका स्वागत" कोरोना कारागृह में हैं।
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