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इतने बड़े गांव की जनसंख्या है मात्र 1, गाय-बकरियों के साथ अकेले रहती है बूढ़ी महिला

इतने बड़े गांव की जनसंख्या है मात्र 1, गाय-बकरियों के साथ अकेले रहती है बूढ़ी महिला

 इंसान एक सामाजिक प्राणी है। यानी वो लोगों के साथ घुल-मिलकर रहता है। अकेले रहना इंसान अवॉयड ही करता है। मनोविज्ञान के मुताबिक़, अकेले रहने वाला इंसान कई तरह की मानसिक समस्याओं से ग्रस्त हो जाता है। इसी वजह से इंसान अन्य लोगों के साथ मिलकर रहता है। लेकिन दुनिया में एक ऐसा गांव है, जहां पूरे गांव में सिर्फ एक महिला रहती है। जी हां, एक बड़ा सा गांव जिसमें खेत भी हैं, गाय-बकरियां भी चरती हैं लेकिन इंसान नहीं रहते। इस बड़े से गांव में सिर्फ एक महिला रहती है वो भी अकेले। आइये आपको बताते हैं आखिर क्यों इतने बड़े गांव में क्यों अकेले रहती है ये महिला... 
 

  

<p>ये अजीबोगरीब गांव है अमेरिका के नेब्रास्का में। यहां बसे मोनोवी गांव में सिर्फ एक महिला रहती है। महिला की उम्र 84 साल है। महिला की पहचान एलसी के नाम से हुई। वो गांव में अकेली ही रहती है। अगर आप इस गांव में जाएंगे तो इंसान के रूप में आपकी मुलाकात सिर्फ एलसी से होगी। </p>

 

ये अजीबोगरीब गांव है अमेरिका के नेब्रास्का में। यहां बसे मोनोवी गांव में सिर्फ एक महिला रहती है। महिला की उम्र 84 साल है। महिला की पहचान एलसी के नाम से हुई। वो गांव में अकेली ही रहती है। अगर आप इस गांव में जाएंगे तो इंसान के रूप में आपकी मुलाकात सिर्फ एलसी से होगी। 

<p>एलसी इस गांव में अकेली ही रहती है। इसके पीछे ख़ास वजह है। एलसी का कहना है कि अगर उसके गांव में कोई नहीं रहेगा तो लोग उसे भूतिया कहेंगे। और वो ऐसा बिलकुल नहीं चाहती। उसे अच्छा नहीं लगेगा कि कोई उसके गांव को भूतिया बोले। </p>

 

एलसी इस गांव में अकेली ही रहती है। इसके पीछे ख़ास वजह है। एलसी का कहना है कि अगर उसके गांव में कोई नहीं रहेगा तो लोग उसे भूतिया कहेंगे। और वो ऐसा बिलकुल नहीं चाहती। उसे अच्छा नहीं लगेगा कि कोई उसके गांव को भूतिया बोले। 

<p>चूंकि एलसी अकेली इस गांव में रहती है, इसी वजह से वो ही इस गांव की मेयर है। ना सिर्फ मेयर बल्कि वो इस गांव की क्लर्क और ऑफिसर भी है। एलसी को गांव की देखरेख के लिए सरकार पैसे देती है। इन पैसों को कैसे खर्च करना है वो एलसी ही तय करती है। </p>

 

चूंकि एलसी अकेली इस गांव में रहती है, इसी वजह से वो ही इस गांव की मेयर है। ना सिर्फ मेयर बल्कि वो इस गांव की क्लर्क और ऑफिसर भी है। एलसी को गांव की देखरेख के लिए सरकार पैसे देती है। इन पैसों को कैसे खर्च करना है वो एलसी ही तय करती है। 

 

<p>अकेले रहने के बावजूद एलसी को हर महीने टैक्स भरना पड़ता है। गांव में सिर्फ एलसी के लिए पानी और बिजली की सप्लाई की जाती है। इसके बदले उसे हर महीने 35 हजार रुपये टैक्स भरना पड़ता है। एलसी इस गांव की इकलौती नागरिक है। <br />
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अकेले रहने के बावजूद एलसी को हर महीने टैक्स भरना पड़ता है। गांव में सिर्फ एलसी के लिए पानी और बिजली की सप्लाई की जाती है। इसके बदले उसे हर महीने 35 हजार रुपये टैक्स भरना पड़ता है। एलसी इस गांव की इकलौती नागरिक है। 
 

<p>एलसी का कहना है कि  हमेशा से ऐसा वीरान नहीं था। 1930 तक यहां काफी लोग रहते थे। उस समय यहां 150 के करीब लोग रहते थे। ये गांव 54 हेक्टेयर में फैला हुआ है।  लेकिन इसके बाद  जनसंख्या कम होती गई। <br />
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एलसी का कहना है कि  हमेशा से ऐसा वीरान नहीं था। 1930 तक यहां काफी लोग रहते थे। उस समय यहां 150 के करीब लोग रहते थे। ये गांव 54 हेक्टेयर में फैला हुआ है।  लेकिन इसके बाद  जनसंख्या कम होती गई। 
 

<p>1980 में इस गांव में सिर्फ 18 लोग बच गए। लेकिन उनमें से कुछ की मौत हो गई तो कुछ ने गांव छोड़ दिया। 2000 में गांव में सिर्फ, एलसी और उनके पति रूडी बच गए। रूडी की 2004 में मौत के बाद गांव में अब एलसी अकेले रहती है। </p>

 

1980 में इस गांव में सिर्फ 18 लोग बच गए। लेकिन उनमें से कुछ की मौत हो गई तो कुछ ने गांव छोड़ दिया। 2000 में गांव में सिर्फ, एलसी और उनके पति रूडी बच गए। रूडी की 2004 में मौत के बाद गांव में अब एलसी अकेले रहती है। 

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