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 महातपस्वी महाश्रमण के श्रीचरणों में पहुंचे उदयपुर के राजकुमार 

 महातपस्वी महाश्रमण के श्रीचरणों में पहुंचे उदयपुर के राजकुमार 

भीलवाड़ा ।   शूरवीरों, महावीरों की धरती कही जानेवाली मेवाड़ की धरती जहां मानव में महाराणा प्रताप के वीरता की गौरवगाथा सुनाई देती है तो यहां चेतक की स्वामीभक्ति की गाथा भी गाई जाती है। भारतीय इतिहास में ऐसी वीरभूमि के भीलवाड़ा में वर्ष 2021 का चतुर्मासकाल सम्पन्न कर रहे भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता, तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता की मंगल सन्निधि में मेवाड़ राजघराने के राजकुमार लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ पहुंचे। आचार्यश्री के दर्शन कर कुर्सी पर न बैठते हुए पूज्यचरणों में इस प्रकार बैठ गए, मानों उनका कोई अनन्य शिष्य श्रीचरणों में बैठा हो। आचार्यश्री के समक्ष अपने भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि यह मेरा परम सौभाग्य है जो मुझे पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी की श्रीचरणों में स्थान मिला। आपकी कृपा सदैव मुझपर बनी रहे, ऐसी मैं कामना करता हूं। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद देते हुए कहा कि मन में सेवा की भावना हो और शक्ति का उपयोग दूसरों की सेवा, सहयोग में लगे तो अच्छा कार्य हो सकता है। आचार्यश्री के आर्शीवचन को प्राप्त करने के उपरान्त भी आचार्यश्री के प्रवास स्थल में कुछ समय बीताकर आचार्यश्री से पावन पथदर्शन प्राप्त कर मेवाड़ के राजकुमार पुनः प्रस्थान कर गए। प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रकाश सुतरिया ने राजकुमार की उपस्थिति के संदर्भ में स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। 
    इसके पूर्व गुरुवार को प्रातः से ही मौसम ने अपना रंग बदला और बूंदाबांदी आरम्भ हो गई। जो रुक-रुकर पूरे दिन जारी रही। बारिश की बूंदों ने सहसा ही ठंड में इजाफा कर दिया। इस बदले मौसम के मिजाज के बावजूद भी मानव कल्याण के लिए निरंतर गतिमान महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ‘महाश्रमण समवसरण’ में पधारे। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के उपरान्त मंगलभावना प्रस्तुति का क्रम आज भी जारी हुआ। सर्वप्रथम श्री सुशील आच्छा, तेरापंथ सेवा संस्थान के अध्यक्ष गणपत पितलिया, चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के कोषाध्यक्ष  सम्पत चोरड़िया, भीलवाड़ा सभा अध्यक्ष  भैरूलाल चोरड़िया, आचार्य भिक्षु सेवा संस्थान के अध्यक्ष दिनेश कांठेड़, किशोर मण्डल संयोजक  मनन चोरड़िया, महाप्रज्ञ सेवा संस्थान के अध्यक्ष  प्रकाश कर्णावट, ट्रस्टी भगवती चपलोत व  लक्ष्मीलाल झाबक ने अपनी मंगलभावनाएं श्रीचरणों में अर्पित कीं। 
    तत्पश्चात् आचार्यश्री ने पावन उद्बोधन प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को अपनी आत्मा के हित के लिए बहुश्रुत की पर्युपासना, साधना करना व उनसे जिज्ञासा करनी चाहिए। चारित्रात्माओं के लिए ही नहीं, श्रावक-श्राविकाओं के लिए भी चतुर्मास का समय ज्ञानाराधना की दृष्टि से उपयोगी है। इस दौरान चारित्रात्माओं को अनेकानेक ग्रन्थों, आगमों के स्वाध्याय का अच्छा अवसर मिलता है तो श्रावक-श्राविकाओं को चारित्रात्माओं के दर्शन, सेवा व उपासना के माध्यम से ज्ञान प्राप्त हो सकता है। 
    आचार्यश्री ने भीलवाड़ा चतुर्मास के संदर्भ में कहा कि अब इस चतुर्मास में कुल दो दिन भी शेष नहीं बचे हैं। यहां दो सौ से अधिक साधु-साध्वियों के प्रवास के साथ-साथ समणश्रेणी और मुमुक्षुओं का भी रहना हो गया, जो संभवतः कभी-कभी ही हो पाता होगा। इस दौरान चारित्रात्माओं व श्रावक-श्राविकाओं द्वारा कितनी-कितनी तपस्याएं भी हुई हैं। इस प्रकार मानों यह चतुर्मास स्थल तपोभूमि बन गई है। इस प्रकार यह चतुर्मास कुछ विशिष्ट-सा हो गया है। चतुर्दशी तिथि होने के कारण आचार्यश्री की सन्निधि में हाजरी वाचन का क्रम रहा। आचार्यश्री ने हाजरी पत्र का वाचन कर चारित्रात्माओं को निरंतर विकास करते रहने की प्रेरणा प्रदान की। वहीं मुनि मोक्षकुमार आदि चार संतों को लेखपत्र का वाचन करने के संदर्भ में दो-दो कल्याणक भी बक्सीस कराए। तदुपरान्त महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी, मुख्यमुनि महावीरकुमारजी, मुख्यनियोजिका साध्वी विश्रुतविभाजी व साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया। 
    अंत में  राहुल कुमार जैन ने अपनी पुस्तक श्रीचरणों में लोकार्पित की। तेरापंथ महिला मण्डल तथा कन्या मण्डल ने गीत के माध्यम से अपनी मंगलभावनाएं अभिव्यक्त कीं। अभिषेक कोठारी,  राजेन्द्र व  गुलाब बोथरा ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। 

20 को आचायश्री महाश्रमण का तेरापंथ नगर से मंगल विहार 
    शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी का भीलवाड़ा चतुर्मास की परिसम्पन्नता के पश्चात 20 नवम्बर को मंगल विहार होगा। शनिवार को तेरापंथ नगर से आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ मंगरोप के लिए मंगल प्रस्थान करेंगे।

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