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मन को वश में करने के लिए मन पर अनुशासन आवश्यक है: आचार्य अभय मुनि

मन को वश में करने के लिए मन पर अनुशासन आवश्यक है: आचार्य अभय मुनि

 आसींद, BHN.

 संसार में सभी मनुष्य अपना हित चाहते है, सभी का हित चाहने वाले कुछ मनुष्य ही होते हैं। मनुष्य को अपने कर्मों से ही सुख और दुख प्राप्त होता है। जिस मनुष्य का मनोबल मजबूत होता है वह किसी के सामने झुकता नहीं है। जब तक मन पर अनुशासन नहीं होता है तो मन को वश में नहीं किया जा सकता है,  और वह व्यक्ति तपस्या भी नहीं कर सकता है ।तपस्या करना कठिन काम है। उक्त विचार महावीर भवन में विराजित आचार्य अभय मुनि   महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए

  आचार्य प्रवर ने कहा कि जिसकी कथनी और करनी में अंतर होता है वह जीवन में कभी भी सुखी नहीं रह सकता है। सहनशीलता का गुण हर मनुष्य में नहीं होता है। मनुष्य को मनुष्य की सेवा करनी चाहिए  कर्मों की गति बहुत गहन होती हैं कोई किसी को सुखी या दुखी नहीं बना सकता है। नाजायज तरीके से धन संग्रह करने वाले को आने वाले भविष्य में प्रकृति उसे कभी क्षमा नहीं करेगी, किए हुए कार्य का उसे फल भोगना ही पड़ेगा। संकट के समय ही त्याग और तप की अहमियत मालूम पड़ती है, संकट के समय धैर्य रखने वाला ही वीर कहलाता है. स्वरूप मुनि ने कहा कि दान में सर्वश्रेष्ठ दान सुपात्र दान है। दान सदेव गुप्त देवे उससे कई गुना दान देने वाले को लाभ मिलता है। भूपेंद्र मुनि ने प्रार्थना का वाचन किया। आचार्य प्रवर के सानिध्य में 12 अगस्त से 14 अगस्त तक तेले तप का आयोजन किया जायेगा। धर्मसभा में वरिष्ठ श्रावक पारस मल पीपाड़ा, पीर चंद सिंघवी,कमलेश कूकड़ा, पदम कुमार कांठेड़ , पूरण मल चौधरी आदि श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे। 

  नवकार महामंत्र का सामूहिक जाप रविवार को 

आसींद, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के सानिध्य में हर रविवार को आयोजित होने वाले नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप की 76 वी कड़ी  रविवार शाम को 8:00 बजे भोजनशाला के प्रांगण में आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप में भाग लेने वाले श्रावक श्राविकाओ में से  भाग्यशाली विजेताओं को गुप्त लाभार्थी परिवार द्वारा पारितोषिक प्रदान किया जाएगा। साथ ही जैन धार्मिक पुस्तक डाइनिंग टेबल का वितरण कर ओपन बुक परीक्षा का पेपर दिया जायेगा।