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   भीलवाड़ा के मातृ शिशु चिकित्सालय में फिर बच्चों की अदला-बदली से हंगामा! जिम्मेदार बोले, परिजनों को हो गई थी गलत-फहमी

   भीलवाड़ा के मातृ शिशु चिकित्सालय में फिर बच्चों की अदला-बदली से हंगामा! जिम्मेदार बोले, परिजनों को हो गई थी गलत-फहमी

 भीलवाड़ा हलचल। भीलवाड़ा के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्पताल की मातृ एवं शिशु चिकित्सालय इकाई में आज एक बार फिर बच्चा बदलने का मामला सामने आया है। इसे लेकर काफी देर तक अस्पताल में हंगामा भी हुआ, जिसे पुलिस ने समझाइश कर मामला शांत करवा दिया।  अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी इसे प्रसूता के परिजनों की गलत फहमी बता रहे हैं।  

डीएसपी सिटी नरेंद्र दायमा ने हलचल को बताया कि महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय  इकाई में मंगलवार सुबह प्रसव के लिए एक महिला को लाया। शैल कुमारी नामक यह महिला अभी अपने माता-पिता के पास धुंवाला में ही थी। उसका पति सूरत में गाड़ी चलाता है। उत्तरप्रदेश निवासी माता-पिता यहां धुंवाला में ईंट भट्टे पर मजदूरी करते हैं। 
शैल कुमारी ने मंगलवार शाम को फिमेल बेबी को जन्म दिया। इसके बाद स्टॉफ नर्स ने शैल कुमारी को दुग्धपान के लिए एक बच्चा दिया। 
बाद में जब नर्स को पता चला कि जो बच्चा शैल कुमारी को दुग्धपान के लिए दिया गया, वो किसी और का है। इसका पता चलने पर स्टॉफ ने शैलकुमारी की नवजात बेटी उसे सौंप दी। डीएसपी दायमा का कहना है कि इस बात को लेकर परिजनों को गलत फहमी हो गई कि शैलकुमारी को लड़की नहीं, बल्कि लड़का हुआ था। परिजनों को समझाइश कर शांत करवा दिया गया है। उधर, डीएसपी ने यह भी बताया कि मंगलवार दोपहर 3 से लेकर रात 11 बजे तक मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में जन्में सभी नवजात फिमेल चाइल्ड थी। ऐसे में यह शिकायत गलत फहमी के चलते हुई है। बच्चा बदलने जैसी कोई बात नहीं है। 
वहीं प्रसूता के पिता का कहना है कि वह, अपनी पत्नी के साथ बेटी को प्रसव के लिए मंगलवार को मातृ एवं शिशु चिकित्सालय लाये थे, जहां शाम को बेटी शैल कुमारी को भर्ती कर लिया गया। शाम को प्रसव हुआ। उसका कहना है कि बेटी को लड़का हुआ था, यह जानकारी उसकी पत्नी को स्टॉफ द्वारा दी गई। इतना हीं नहीं, बल्कि लड़का भी बेटी को ही दिया हुआ था। करीब 15-20 मिनिट बाद नर्स, परिवादी की बेटी को दूसरा बच्चा देकर लड़के को वापस ले गई। बाद में जब बेटी ने बच्चे के  पेसाब करने के बाद कपड़े बदले तब उसे लड़की का पता चला।  पिता का कहना था कि उसे यह बताया जा रहा है कि रेकार्ड में कल जन्मे बच्चों में सभी लड़कियां थी। ऐसे में हमारे सामने यह स्वीकार करना मजबूरी है कि उसकी बेटी ने लड़का नहीं, बल्कि लड़की को जन्म दिया था। इसी तरह की बात प्रसूता की मां ने भी कही। 
उधर, अस्पताल के पीएमओ डॉ अरुण गोड ने बताया कि महिला ने फीमेल चाइल्ड को जन्म दिया था। उन्होंने बताया कि प्रसव के तुरंत बाद बच्चों के फुटप्रिंट लिए जाते है । साथ ही अटेंडेंट को तुरंत इसकी जानकारी भी दी जाती है।ऐसे में बच्चा बदलने की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती। प्रसूता और उनके परिजनों को केवल गलतफहमी हुई है। डॉक्टर्स परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। बच्चा बदलने जैसी कोई बात नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में कुछ समय पूर्व भी ऐसे ही एक मामले को लेकर दिनभर हंगामा हुआ था। आए दिन होने वाली इन घटनाओं को रोकने के लिए अस्पताल प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है। इसके चलते न केवल प्रसूताओ बल्कि उनके परिजनों के साथ ही अन्य मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।