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VIDEO मिट्टी के दीयों में छिपी है इस कुम्हार परिवार की खुशियां, इस दिवाली परंपरागत दीपक जलाकर करें जिंदगी रोशन

VIDEO मिट्टी के दीयों में छिपी है इस कुम्हार परिवार की खुशियां, इस दिवाली परंपरागत दीपक जलाकर करें जिंदगी रोशन

 भीलवाड़ा प्रहलाद तेली। दीपावली पर  धन लक्ष्मी को प्रसन्न करने मिट्टी के दीपक बनाने वाले कुम्हारों की चाक अब तेजी से चलने लगी है। पूरा परिवार मिट्टी के दीपक बनाने में लगा है। उन्हें इस बार अच्छी बिक्री की उम्मीद है। शहर की हनुमान कॉलोनी का  कुम्हार परिवार मिट्टी का सामान तैयार करने में व्यस्त हैं।  इस परिवार का कहना है कि मिट्टी के दीपक बनाने में मेहनत लगती है। रोजाना 200 से 300 दीपक बना रहे हैं।

पूरा परिवार बनाता है मिट्टी के दीपक व बर्तन
शहर की विभिन्न कॉलोनियों के साथ ही जिले के गांवों में कई कुम्हार परिवार मिट्टी के बर्तन, दीपक बनाते हैं। वर्तमान में इन कुम्हारों के घरों में मिट्टी के दीपक, मटकी आदि बनाने माता-पिता के साथ उनके बच्चे भी हाथ बंटा रहे हैं। कोई मिट्टी गूंथने में लगा है तो किसी के हाथ चाक पर बर्तनों को आकार दे रहे हैं। 
 
दीपावली व गर्मी में बढ़ती है मांग
कुम्हार जगन्नाथ का कहना है कि  दीपावली व गर्मी के सीजन में मिट्टी से निर्मित बर्तनों की मांग जरूर बढ़ जाती है, लेकिन बाद के दिनों में वे मजदूरी करके ही परिवार का पेट पालते हैं। दूर से मिट्टी लाना, महंगी लकड़ी खरीदकर दीपक पकाने में जो खर्च आता है, उसके बदले आमदनी लगातार घटती जा रही है। साथ ही इस काम के लिए बस्ती से दूर जगह भी किराये से लेनी पड़ती है। जगन्नाथ ने यह भी बताया कि सरकार की ओर से कोई भी सहायता और सुविधा उन्हें नहीं मिल रही है। 

घर के सभी सदस्य दिन रात मेहनत करके एक दिन में एक सैकड़ा दीपक बना पाते हैं, वहीं दूसरी ओर बाजारों में इलेक्ट्रानिक्स झालरों की चमकदमक के बीच मिट्टी के दीपक की रोशनी धीमी पड़ती जा रही है, जिसके चलते लोग दीपकों का उपयोग महज पूजन के लिए ही करने लगे हैं। 

चाइना की लाइटें व डेकोरेशन के सामान ने छीना कुम्हारों का रोजगार
जगन्नाथ का कहना है कि  दीपक बनाने का उनका पुश्तैनी धंधा है। साल में एक से डेढ़ माह ही यह काम चलता है। मिट्टी के दीपक की मान्यता है।उसी को देखते हुये जनता को मिट्टी के दीपक मिले,लेकिन इससे हमारे रोजगार की पूर्ति नहीं हो पाती। क्यूंकि एक-डेढ़ महीने ही वे काम करते हैं। उनका कहना है कि आजकल बाजार में चाइना की लाइटें , दीपक व डेकोरेशन के दूसरे आइटम आ गये हैं, इस वजह से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। उन्होंने जनता से अपील की है कि दीपावली पर ज्यादा से ज्यादा मिट्टी के दीपक घर में जलाये। ताकि परंपरा बनी रहे। नहीं तो आने वाले समय में यह मिट्टी के दीपक सभी लोग भूल जायेंगे। कोई भी नहीं ले पायेगा। 

 

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