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51 दिवसीय अखण्ड आराधना विधान के 43वें दिन हुए विविध आयोजन 

51 दिवसीय अखण्ड आराधना विधान के 43वें दिन हुए विविध आयोजन 
उदयपुर। आचार्य ने कहा कि नफरत देकर जीवन में कभी प्रेम नहीं मिल सकता है। दूसरों का अनादर करने पर कभी आदर नहीं मिलेगा।  इस भूलावे में कभी मत रहना कि हमारे देने से दूसरों को कुछ मिल रहा है हकीकत में तो दूसरों को देने से हम कुछ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण महाराज के अद्भुत जीवन का एक पहलू सुदामा से दोस्ती है। जीवन का मजा तभी है जब वक्त बदल जाए पर यार न बदले। ऐसी यारी जिंदगी में होने पर हजारों वर्ष बाद भी दुनिया याद करती है। कृष्ण-सुदामा की दोस्ती जैसे कुछ कथानक ऐसे होते है जितनी बार सुनों आनंद आता है। अमीर वह नहीं है जिसने धन कमाया बल्कि अमीर वह है जो किसी का सहारा बने, किसी के काम आए। 
ये विचार पायड़ा स्थित पद्मप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में देवश्रमण आचार्य कुशाग्रनंदी महाराज, मुनि अजयदेव व भट्टारक देवेंद्र विजय, ब्रम्हचारिणी आराधना दीदी व अमृता दीदी संघ के सानिध्य में आयोजित चार्तुमासिक के तहत 51 दिवसीय अखण्ड आराधना विधान के 43वें दिन गुरुवार को पायड़ा जैन मंदिर में चल रहे अष्टलक्ष्मी सिद्धी कारक, मनोकामना पुर्तिकर्ता सिद्धी कर्ता, सर्व उपद्रव विनाशक, रोग-शोक तथा सप्तभय निवारक, सर्व कार्य सिद्धी, सुख शांति समृद्धि प्रदायक, अष्टलक्ष्मी, कल्याणमंदिर चिंतामणी पाश्र्वनाथ प्रभु का 51 दिवसीय अखण्ड आराधना विधान के 43वें दिन व्यक्त किए। समारोह के मुख्य अतिथि कीर्ति कुमार जैन, अरविंद कुमार फनावत मुम्बई थे।  इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज पायड़ा, आयड़ व केशवनगर के धर्म प्रेमी महिला-पुरूष आदि उपस्थित थे।
प्रखर वक्ता भट्टारक देवेन्द्र विजय महाराज ने कहा कि कहा कि हमेशा पुण्यकर्म करते रहो मेहनत सफल होती रहेगी। पुण्य के अभाव में 90 प्रतिशत मेहनत भी सफल हो जाती है। मेहनत का मनमाफिक परिणाम नहीं मिले तो समझना पुण्य की टंकी खाली है।  सुदामा के चरित्र की चर्चा करते हुए कहा कि वह ऐसा व्यक्ति था जिसे भूखे रहना मंजूर था लेकिन कृष्ण जैसे मित्र को बोलना मंजूर नहीं था। बार-बार पत्नी के जोर देने पर सुदामा अपने मित्र कृष्ण से मिलने जाने के लिए तैयार हुआ। भेंट देने के लिए कुछ नहीं होने पर उनकी पत्नी ने चावल ही दे दिए। उन्होंने सुदामा की दरिद्रता देखकर कृष्णनगरी में लोगों द्वारा उनकी हंसी उड़ाने के प्रसंग का चित्रण करते हुए कहा कि जिंदगी में किसी परेशान को कभी परेशान मत करों। परेशान नहीं करने पर जिंदगी की गाड़ी शान से आगे लेकर जा सकते है। 
- 27 नवम्बर को होगा आचार्यश्री का महापारणा 
प्रचार संयोजक संजय गुडलिया, दीपक चिबोडिया ने बताया कि 45 दिवसीय निर्जल उपवास के चलते आचार्यश्री का महापारणा रविवार 27 नवम्बर को पायड़ा स्थित चौधरी भवन में आयोजित होगा। जिसमें उदयपुर, जयपुर, दिल्ली, मुम्बई, ओरंगाबाद, कनोर्टक, देवलगांव सहित देशभर से श्रावक-श्राविकाएं जुटेंगे। उदयपुर के 1008 जोड़े आचार्यश्री के आहार चर्या के दौरान पडग़ाहन करेंगे उसके बाद आचार्यश्री का महापारणा कराया जाएगा। 
- 51 घण्टे तक दी जाएगी अखण्ड हवन में आहुति 
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष धनराज सकावत एवं मंत्री मांगीलाल सलूम्बरिया ने बताया कि 51 दिवसीय अखण्ड विधान के तहत रविवार 27 नवम्बर को 51 घण्टे का अखण्ड हवन किया जाएगा जिसे गिनीज वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज करने के लिए टीम मौके पर मौजूद रहेगी। उदयपुर के इतिहास में पहले कभी इस तरह के हवन एवं अखण्ड आराधाना विधान नहीं हुए है। जैन समाज में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह है।