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हीराजी का खेडा में प्यास बुझाने के लिये तरसते ग्रामीण , पास के गांव से लाना पड़ता हैं पानी 

हीराजी का खेडा में प्यास बुझाने के लिये तरसते ग्रामीण , पास के गांव से लाना पड़ता हैं पानी 

भीलवाड़ा, मूलचन्द पेसवानी
रायला क्षेत्र के हीराजी खेडा गांव जो सात घरो की बस्ती में 60 -70 ग्रामीण रहते है ।जहाँ एक हैंडपंप है जिसमे भी खराब पानी आता है और खराब रहता है । अब हेंडपम्प भी जवाब दे चुका है । जिसे कारण गांव की महिलाएं पास के गांव रानी खेडा जहाँ से हैंडपम्प से पानी सिर पर लेकर आती है।  ग्रामीणों ने बताया कि पानी के लिये उठते भटक रहते लोग पानी के बाद जरूरी काम फिर शुरू होता है । प्यास बुझाने के लिये कई बार ये लोग प्रशासन की मदद लेना चाहते पर अभी कोई जवाब नही मिला है ।
ये गांव ईरांस ग्राम पंचायत का हीराजी का खेडा है जिसमे सभी परिवार कृषि पर आधरित है । ग्रामीणों से बातचीत में बताया कि ये गांव केवल एक नाम है बाकी हकीकत तो ये है कि हीराजी का खेडा गांव का नाम रिकॉर्ड में भी नही है । 
रुक्मा कुमावत ने बताया तीन चार साल से पानी दिक्कत आ रही है पास के गांव जो 2 किमी दूर से पानी लाना पड़ता है ।

पानी की समस्या से परेशान महिला ने कहा कि सिर पर वजन नही चल पाता , खुद के प्यास ओर जानवर प्यास कैसे बुझेगी प्यास , सुनने वाला कोई नही नेता भी केवल वोट मांगने आते है उसके बाद तो दर्शन भी दुर्लभ हो जाते है , आखिर हमारी कोन सुनेगा ।

गोपाल कुमावत ने बताया कि तीन चार वर्षों से ग्रामीण पानी के लिए परेशान है हैंडपम्प भी जो खराब रहता है तथा उसमें भी पीने लायक पानी नही है पास के गांव में लगे हैंडपंप पर लाइन में लगकर पानी लाना पड़ता है , ये लोगो दो तीन बार ग्राम पंचायत में भी पानी की समस्या के बारे जानकारी दी परन्तु कोई सुनने वाला नही है ।

ग्रामीणों ने आसपास के गांवों में जाकर पानी लाना पड़ता है पालतू जानवरों व प्यास बुझाने के लिये सिर पर महिलाओं को पानी लाने को विवश है । हीराजी का खेडा में ग्रामीणों ने बताया कि इनके श्मशान भी नही है किसी मोत हो जाने पर ये अंतिम संस्कार भी रानीखेड़ा के शमशान पर ले जाकर करवाना पड़ता है ।

हीराजी का खेडा में प्यास बुझाने के लिये तरसते ग्रामीण , पास के गांव से लाना पड़ता हैं पानी