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क्यों भई चाचा ...अरे हाँ भतीजा".... "बुरे काम" का हुआ "बुरा नतीजा" शराब दुखान्तिका से उठा पर्दा

क्यों भई चाचा ...अरे हाँ भतीजा

   - सुशील चौहान -
भीलवाड़ा। बरसों पुरानी फ़िल्म "चाचा - भतीजा" का एक गाना बड़ा मशहूर हुआ  जिसके बोल थे- "बुरे काम का बुरा नतीजा , क्यो भाई चाचा .. हा भतीजा"। गाने की यह पंक्तिया आज याद इसलिए आयी क्योंकि  हॉल ही में मांडलगढ़ इलाके सारण का खेड़ा में "अवैध देशी शराब" से पांच लोगों की दर्दनाक ओर अकाल मौत की घटना ने "दिल दहला" दिए थे। माना यह गया कि शराब में "केमिकल" मिलाकर उसे "जहरीला" बनाया गया था,लेकिन आज पुलिस ने "गहन जांच" और "सबूतों" के "दम" पर साबित किया है कि मौत का कारण "शराब" में जानबूझकर मिलाया गया "कीटनाशक" था और उसे मिलने वाला उसीका "भतीजा" था जिसने अपने" चाचा ' को मौत के घाट उतारने के लिए इस अपराध को अंजाम दिया। भतीजे के इस बुरे काम से उसका चाचा तो "मर" गया लेकिन एक "बुरा काम " यह भी हुआ कि उसी "कीटनाशी शराब" के सेवन  से उसकी खुद की "माँ "भी चल बसी  जिसका अफसोस उसे "आजीवन" रहेगा।  "दिल दहलाने" वाली इस घटना का "खुलासा" किया आज जिला कलेक्टर शिव प्रसाद एम नकाते और पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा ने। पुलिस अधीक्षक शर्मा ने बताया कि पकड़े गए भतीजे विनोद कंजर ने "कबूला" है कि अपने चाचा गुल्ला कंजर द्वारा उसकी माँ और मौसी के लिए कही जाने वाली "अनर्गल"  बातों और रोज-  रोज की जाने वाली मारपीट व झगड़े से वह "आहत" था और बदला लेने के लिए उसने अपने चाचा की शराब की बोतल में यह "सोचकर" कीटनाशक मिला दिया कि इसे पीकर वह मर जायेगा और रोज रोज की "टंटा" यानी "टेंशन" खत्म हो जाएगी लेकिन इस बुरे काम का बुरा नतीजा यह भी हुआ कि  "आदतन पियक्कड़" चाचा ने जब उस बोतल का "स्वाद चखा"  तो कीटनाशक मिली शराब उसे "अटपटी" लगी तो थोड़ी सी पीकर उसने अपनी "बाटली" की शराब एक केन में भर दी । चाचा तो कीटनाशी शराब सेवन के फैले जहर से अलविदा कह गया लेकिन उसी केन की  शराब  विनोद कंजर की माँ ने भी पी  और वह भी विनोद से हमेशा के लिए "दूर" चली गयी ओर विनोद अपने चाचा के साथ माँ का भी "कातिल" बन गया साथ ही वे लोग भी इस काल का ग्रास बने जो "विश्वास" करके इस परिवार से अवैध शराब लेकर पीते थे। इस कीटनाशी मिली शराब  को  कुल पांच लोगों ने पिया ओर इन सभी  की मौत का आरोप विनोद कंजर के "माथे " है। वैसे आज इस जांच के खुलासे से पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली है क्योंकि  मामला जहरीली शराब का न होकर "रंजिश वश" शराब में "कीटनाशक" मिलाने  का निकला है। लेकिन इस बात से भी इंकार तो नहीं किया जा सकता कि आखिर शराब थी तो "अवैध" ही थी। खैर इस मामले का तो "पटाक्षेप" हो गया लेकिन प्रकरण में पुलिस के निलंबित किये गए अधिकारियों और दूसरे कार्मिकों का अब क्या  होगा जिन्हें इस कांड में "पहली नज़र " में लापरवाह मान लिया गया था। और तो ओर "जुम्मा-  जुम्मा" कुछ ही दिनों पहले बदली होकर आए "आबकारी अधिकारी मुकेश देवपुरा" को भी "निलंबन रूपी वनवास" पे जाना पड़ा।  आज के इस खुलासे ने उनके लिए उम्मीद की किरण जरूर "जगाई" है कि अब शायद उनका "वनवास काल" छोटा हो जाए । 
शहर के लिए 28 जनवरी 2021 की रात  "मनहूस"  बन कर जब जिला व पुलिस प्रशासन के" दामन" पर यह "दाग " लग गया कि "हथकड़ी " शराब पीने से पांच की मौत हो गई। यह घटना पूरे प्रदेश की सुर्खियां बनी ओर  प्रशासन के लिए यह घटना सिर दर्द बन गई क्योंकि उनको नगर परिषद, पालिका के चुनाव भी बिना बाधा करवाने थे।  प्रशासन दुविधा में था  लेकिन जिले के दोनों आला अधिकारियों ने " हिम्मत" नहीं हारी और जाबांज पुलिस अधिकारियों को जिम्मा सौपा की मामले का खुलासा हो तो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा के नेतृत्व में एसआईयूसीएडब्ल्यु सेल के उप अधीक्षक राहुल जोशी  ने नाथूसिंह, सही राम,सुरेन्द्र सिंह, चन्द्रवीर सिंह, प्रोबेशन वृताधिकारी सज्जन सिंह, गजराज सिंह तथा मांडलगढ़ थानाधिकारी नेमीचंद चौधरी पर भरोसा जताते हुए जांच सौंपी। इसके बाद टीम ने अपने तरीक़े से तहकीकात" की । नतीजा जल्द ही सामने आ गया और  दामन में लगा "जहरीली शराब" का दाग "धुल" गया। 
 बताना जरूरी है कि जांच  टीम को सफलता उस समय मिली जब पांच फरवरी को "मोनोस्टार " नामक कीटनाशक दवाई की "शीशी" मिली। बस इसी "शीशी" ने "अपराधी" को "पुलिस की शीशी" में उतार दिया। कीटनाशक दवा की कम्पनी से पता चला कि यह कीटनाशक केवल करेड़ा व महुआ में बिकती हैं। बस फिर क्या था दुकानदार से पता किया तो वो केवल इतना ही बता पाया कि एक युवक जिसके पैर व हाथ की अगुलियों में "गेप" वो "मिर्ची" की फसल में डालने के लिए ले गया फिर क्या था पुलिस को तो मानो " संजीवनी" मिल गई ओर विनोद के घर जाकर देखा तो मिर्ची की फसल तो बोई नहीं और उसके हाथ पैर में "गेप" मिला।और हो गया अवैध शराब से मरने वालों का खुलासा। शराब तो अवैध थी लेकिन वो कीटनाशक मिली थी जिसने दलेल सिंह, सरदार भाट,सत्तु देवी, हजारी बैरवा और गुल्ला की जान ले ली। विनोद ने भी जल्द ही कबूल कर लिया लेकिन हा चाचा की जान लेने से पहले विनोद ने पहले उन मूक पक्षियों जिनमें " कबूतर व कोवे की जान ली ।कबूतर व कोओ को दाने में कीटनाशक मिला कर खिला कर संतुष्टि की जब वो मर गए तो फिर चाचा को मारने का "खेल" रचा। लेकिन इस खेल में वो भी "चपेट" में आ गए जो नासमझ थे। जिला कलेक्टर नकाते ने कहा अब ऐसे हादसे नहीं होने देंगे।अवैध शराब बेचने व पीने वालों को "नवजीवन" योजना के तहत मनरेगा में काम देंगे ।महिलाओं को सिलाई सीखाएंगे। ताकि वो ऐसे जानलेवा  काम न  करे। पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा ने लोगों से अपील की हैं कि वो अवैध रुप से बनी शराब का सेवन नहीं करें "जान हैं तो जहान" हैं।
 

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