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सुनहरी यादों के साथ वर्कशॉप डेमोस्ट्रेशन कार्यक्रम का समापन

सुनहरी यादों के साथ वर्कशॉप डेमोस्ट्रेशन कार्यक्रम का समापन

ओडिसी नृत्य में जीवंत हुई पुरी के मंदिरों की देवी मूर्तियां
भीलवाड़ा (हलचल)।
स्पिक मैके (सोसायटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इण्डियन क्लासिकल म्यूजिक एण्ड कल्चरल एम्गस्ट यूथ) एवं इण्डियन ऑयल कॉरपोरेशन के सहयोग से विश्व प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना नीतिशा नन्दा की अंतिम 2 प्रस्तुतियां हुई। प्रथम प्रस्तुति सुबह 10.30 बजे डॉ. भीमराव राजकीय उच्च माध्यमिक कन्या आवासीय विद्यालय एवं दूसरी प्रस्तुति राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कलकीपुरा के सहयोग से रोडवेज बस स्टैंड के पीछे रसधारा सांस्कृतिक संस्थान के मिनी ऑडिटोरियम साक्षात में विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. मंजू कोठारी, रंजना वर्मा और वरिष्ठ चित्रकार मंजू मिश्रा एवं आमंत्रित अतिथि ने सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
जानकारी देते हुए राज्य समन्वयक कैलाश पालिया ने बताया कि नितिशा नन्दा ने कार्यक्रम की गणपति वंदना से शुरुआत करते हुए गणेश के विभिन्न स्वरूप बनाए। उसके बाद विष्णु पुराण में वर्णित दशावतार में विष्णु के 10 अवतार ब्रह्मा, वराह, कृष्ण, राम, बुद्ध, महावीर, कच्छप, मत्स्य, नरसिंह, परशुराम आदि अवतारों को जीवंत कर दिया। साथ ही ओडिसी नृत्य के बारे में जानकारी देते हुए ओडिसी नृत्य में पहनी जाने वाली वेशभूषा एवं आभूषणों की जानकारी देते हुए इस नृत्य में बजाए जाने वाले वाद्य यंत्र जैसे मंजीरा, मृदंग, सितार आदि यंत्रों की जानकारी दी। उसके बाद नाट्य शास्त्र में वर्णित नायक नायिका भेद के साथ-साथ पुरी उड़ीसा के मंदिर में प्राप्त विभिन्न देवी मूर्तियों को नृत्य के माध्यम से जीवंत करते हुए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अंत में प्रसिद्ध कवि सूरदास के भजनों पर आधारित भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत करते हुए छात्र-छात्राओं को भावुक कर दिया। कोणार्क के सूर्य मंदिर में प्राप्त शास्त्रीय भाव भंगिमाओं को ओडिसी नृत्य में जीवंत करते हुए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम के समापन पर रसधारा सांस्कृतिक संस्थान के रवि ओझा, कुलदीप सिंह, अनुराग सिंह, दिनेश सोनी, हितेश नलवाया, निष्काम एवं कलकीपुरा विद्यालय के रंजना वर्मा, लीला शर्मा, कौशल्या शर्मा, रश्मि जैन, माया व्यास, मंजू मिश्रा, भवानीशंकर मिश्रा सहित कई कलाप्रेमी मौजूद रहे। प्रसिद्ध हिंदी कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की सरस्वती वंदना वीणा वादिनी वर दे से शुरू करते हुए छात्र छात्राओं को मां सरस्वती के विभिन्न स्वरूप एवं सरस्वती के सारिक अंगों में सितार, कमल, पुष्प, हंस आदि स्वरूपों को जीवंत करते हुए कार्यक्रम किया। उसके बाद द्वितीय प्रस्तुति में भगवान कृष्ण द्वारा कालिया नाग का मर्दन का सुंदर वर्णन करते हुए भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत कर दिया। कुछ छात्र-छात्राओं को मंच पर बुलाकर फुटवर्क पद संचलन का अभ्यास कराते हुए हस्त मुद्राओं का ज्ञान कराया।

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