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हद कर दी आपने...मिलावटी" ओर "नकली" घी कहकर पकड़ा  - अब उसी की नीलामी से कमाई

हद कर दी आपने...मिलावटी

  सुशील चौहान 

भीलवाड़ा।  शुद्ध के लिए युद्व करके जो सामान जब्त किया अब उसी को *नीलाम* करके चिकित्सा महकमा *कमाई के जुगाड़* में लगा है। खाने के काबिल नहीं मानकर जब्त किया गया माल अब सेहत की देखभाल के मुखिया यह कहकर नीलाम कर रहे है कि ले जाने वाले इसे खाने के लिए नहीं बेचेंगे। औपचारिक तौर पर शपथ पत्र भी लिया जाना है। बस फिर महकमे का काम खत्म।

अब शुद्ध के लिए युद्ध के दौरान पकड़े *देसी घी* की नीलामी सेहत के लिए जिम्मेदार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग करेगा।  विभाग कोई दस पंद्रह लीटर (किलो) देसी घी की नीलामी नहीं करेगा बल्कि पूरे *2890 लीटर* की करेगा वो भी *श्री पाल मार्क* वाला हैं।

इसके लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने *विज्ञापन*   प्रकाशित करवाया हैं। विभाग ने नीलामी सूचना एक दैनिक समाचार पत्र में 18/11/2022को क्रमांक/एफ एस एस ए/2022-1011से प्रकाशित करवाया हैं। जिसमें लिखा हैं सीजशुदा देसी घी (श्रीपाल मार्क) जिसकी मात्रा 2890 लीटर हैं कीमत तीन लाख रुपए हैं। जो अवधि पार हैं। इसकी नीलामी 28 नवम्बर को दोपहर एक बजे कार्यालय परिसर में की जाएगी। जैसी स्थिति में किया जाएगा। साबुन निर्माता या अन्य फर्म जो इस घी को खाने के उपयोग में नहीं ले। नीलामी में भाग लें। फर्म को प्रमाण पत्र के दस हजार रुपए की धरोहर राशि तो जमा करवानी हैं साथ ही सौ रुपए के नाॅन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर बंधपत्र देना होगा। 

साथ में चेतावनी भी दी कि उपरोक्त घी को मानव उपयोग/ उपभोग के अलावा अन्य प्रयोग में लिया जाएगा।

विभाग ने यह कहीं नहीं बताया कि घी कितना पुराना हैं। अमुमन किसी भी कम्पनी चाहे वो अमूल,सरस, मिल्क मेड,मधु  देसी घी की *एक्सपायर डेट* छह से नौ महीने होती हैं। इसके बाद घी  (बदबू) मारने लगता हैं। अब नीलामी किए जाने वाला घी कितना पुराना हैं। यह देने वाला जाने या लेने वाला।

इस सम्बन्ध में कुछ व्यापारियों से बात की। उन्होंने बताया कि जो घी नीलाम किया जा रहा वो एक लीटर लगभग 103 रुपए लीटर का हैं।‌ अब साबुन बनाने वाला साबुन निर्माता  इससे सस्ता पाॅम आॅयल मिलता है। जो लगभग सौ रुपए लीटर में मिलता हैं।वो भी ब्रांडेड हैं तो पुराना घी खरीदने वाला इतना मंहगा क्यों खरीदेगा नीलामी ही तीन लाख से शुरू होगी जो चार या पांच लाख रुपए तक छूटेगी? घी लेने वाला साबुन ही बनाएगा। इसकी क्या गारंटी हैं। यह घी कौन खरीदेगा और कहां ले जाएगा। वो इस घी में देसी घी का *सेंस* मिला कर उसे उसे बेच भी सकता हैं? इतने महंगे भाव में खरीदे घी का साबुन तो शायद ही बनाएगा? क्योंकि 130रुपए लीटर में तो उसे बाजार में सोयाबीन का तेल मिल जाएगा तो वो क्यों पुराने बदबूदार घी वो भी ज्यादा लागत में खरीदेगा।

जिस तरह आबकारी विभाग पकड़ी गई नकली व अवैध शराब को नष्ट करता हैं क्या पकड़े गए घी को स्वास्थ्य विभाग नष्ट नहीं कर सकता एक साबुन बनाने वाले तो बताया साबुन से घी नहीं बनता हैं।

इस सम्बन्ध में फूड़ इंस्पेक्टर प्रेम शर्मा ने बताया कि नीलामी में घी खरीदने वाले से स्टाम्प पेपर लिख कर लेंगे की वो इस घी का उपयोग मानव उपयोग में नहीं करेंगे। घी जो पैक हैं उसे उसी हालत में नीलाम किया जाएगा