वर्मीकम्पोस्ट द्वारा सुधारेे मिट्टी की उर्वरता-डॉ. यादव

भीलवाड़ा। कृषि विज्ञान केन्द्र भीलवाड़ा पर अनुसंधान निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा प्रायोजित अनुसूचित जाति योजनान्तर्गत एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण एवं आदान वितरण कार्यक्रम का आयेाजन वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन तकनीकी विषय पर कोटड़ी पंचायत समिति के गाँव चावण्ड़िया में किया गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी. एम. यादव ने वर्मीकम्पोस्ट के महत्त्व एवं उपयोगिता पर चर्चा करते हुए बताया कि वर्मीकम्पोस्ट एक प्रकार का जैव उर्वरक है जो केंचुओं द्वारा कार्बनिक पदार्थों को विघटित करके बनाया जाता है। वर्मीकम्पोस्ट पोषक तत्त्वों से भरपूर होता है और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है। डॉ. यादव ने वर्मीकम्पोस्ट बनाने हेतु कच्चे माल या गोबर का चयन, केंचुओं का चयन, केंचुआ बेड का निर्माण, प्रति बेड़ केंचुओं की मात्रा, खाद तैयार होने की अवधि के बारे में विस्तार से बताया। तकनीकी सहायक अनिता यादव ने बताया कि वर्मीकम्पोस्ट से मिट्टी की उर्वरता मे सुधार होता है साथ ही रासायनिक उर्वरकों की भी कम आवश्यकता होती है। वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता संजय बिश्नोई ने बताया कि प्रशिक्षण में अनुसूचित जाति के 30 कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया जिन्हें निःशुल्क वर्मीकम्पोस्ट बेड उपलब्ध करवाया गया।
