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सुनों !

सुनों !

सुनों !
मुझे जलने की धुन सवार है
जैसे सवार थी उस बौद्ध भिछुक पर
जो चाइना मुर्दाबाद करते हुए जल गया
या फिर उस स्टूडेंट की तरह
जो तेलंगाना जिन्दाबाद करते हुए मर गया

मेरे हांथो में पत्थर है
और सीने में गोली
मुझे मारने में तुम्हे मुश्किल से दो मिनट लगे
पर खत्म करने में सदियाँ कम पड़ेंगी

मैं आवाजों के घेरे में घिरे हुए आदमियों की आवाजों से घिरा हूँ
मेरी चिंता में काली तस्वीरें है
और खून में लिथड़ा एक अँधेरा रो रहा है

तुम्हारी चिंता में सुनहरे पंख और मरमरी बदन हैं
सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना और शाम का भोजन है
फ़िल्में, गाने, चुटकुले, प्यार की अफवाहें और अश्लील हंसी तुम्हारे चारो तरफ पसरी है
और मेरे चारो तरफ है नारे और खामोश घुटन, सन्नाटा और शोर

 

एक आग है, एक नंगी आग है मेरे चारो तरफ
जिसमे मैं जल मरूंगा
सुनो!
मैं जल मरूंगा
जैसे जले हैं मुझ जैसे ही कई

मेरे जलने की दुपहर तुम कहना
गर्मी कितनी ज्यादा है, अबकी सर्दी बहुत ज्यादा पड़ेगी
थोड़ी सी जम्हाई आएगी तुन्हें
और तुम कहोगे कि इस देश का कुछ नहीं हो सकता
भ्रष्टाचार इस देश को डूबा देगा

तुम चिंता करना कि
सचिन सौ सेंचुरी मार पायेगा कि नहीं ?
सलमान शादी करेगा कि नहीं ?
तुम भगवान से मनाना
शाहरुख खान कभी बूढा न हो
अमिताभ बच्चन कभी न मरे
राखी सावंत पर तुम चर्चा करना
और निष्कर्ष निकलना कि वो चरित्रहीन है
तुम बेवजह हंसना और रोना
फिर भूल जाना कि आज तुमने क्या कहा था
आज क्या हुआ था या किया था
ताकि तुम कल फिर वही बातें कह सको
तुम कल फिर वही काम कर सको

और मुझे कल फिर जलना पड़े

सुनो!
मुझे जलने की धुन सवार है
मैं कविता की आग में जल मरूंगा