काव्य

7 March 2025 7:04 AM
मोहब्बत
आया बसंत पंचमी का पर्व...!
सांस तेरी-मेरी चल रही...!
पतंग -कुछ दोहे
जज़्बात को क्यों छुपाना...
कलम बहुत बोलती है...
माँग में सिंदूर लो हो गईं दूर
रपट कहाँ लिखाऊँ मैं
अन्धा प्यार
सच के ल‍िए जो लड़ता है...
मेरा मन