गणेशोत्सव में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित

राजसमन्द (राव दिलीप सिंह ) नगर पालिका मंडल आमेट व श्री सिद्धि विनायक मन्दिर सेवा समिति आमेट द्वारा आयोजित 10 दिवसीय गणपति महोत्सव के तहत मंगलवार रात्रि को अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन आयोजित किया गया इस कवि सम्मेलन में देश भर के आए ख्यात नाम कवियों के द्वारा काव्य पाठ किया गया जिसमें वीर रस, श्रृंगार रस, हास्य रस तथा देशभक्ति कविताएं पढ़ी गई। कवि सम्मेलन का आगाज नगर पालिका अध्यक्ष कैलाश मेवाड़ा, मंदिर समिति के अध्यक्ष मनोहर सिंह राठौड़,नगरपालिका पार्षद आदि के द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई।आयोजको द्वारा कवियों का स्वागत अभिनन्दन किया गया।कवि सम्मेलन में सर्व प्रथम मा सरस्वती की वंदना उज्जैन से आई कवयित्री निशा पंडित के मां वीणा वादनी मां शक्ति दायनी की वन्दना से किया। प्रसिद्ध पेरोडिकार सम्पत सुरीला ने भूर्ण हत्या पर मार्मिक काव्य पढ़कर श्रोताओं की आंखे नम कर दी।"बेटी जन्मे तो रुसवाई,बेटा जन्मे तो दे बधाई,मेरे जन्म से पहले विदाई,मेरे माबाप ही कसाई, इनको जरा लाज भी ना आई" गाकर भूर्ण हत्या रोक ने का प्रयास करने की अपील की।महाराणा प्रताप पर ₹"सारे सुख वैभव त्याग दिए आजादी का स्वप्न सजाया था तब कन्ही जाकर वो हिंदुआ सूरज कहलाया था" उज्जैन के वीर रस के कवि राहुल शर्मा ने अपनी कविता 'बिना बलिदान भगवे का कोई आसान न होता शहादत का समूचे विश्व का सम्मान नहीं होता, पढ़ोगे जो अगर इतिहास के पृष्ठों को पढ़ लेना अगर पन्ना नहीं होती तो आज प्रताप नहीं होता, हिदुस्तान नही होता गाकरयुवाओं में वीरता का जोश भर दिया। मुंबई से आए लाफ्टर चैलेंज विजेता हिमांशु बवंडर ने अपने अनोखे अंदाज में हर हास्य व्यंग्य कविता के जरिये श्रोताओं को खूब हंसाया।हास्य व्यंग्य कवि इटावा से आये गौरव चौहान ने "यह नेहरू वाला देश नहीं यह मोदी वाला भारत है राष्ट्र प्रेम का गीत हमारे वीरों की परिपाटी में, जवानों को जरा सी हिम्मत दे दो तिरंगा भी गाड़ आएंगे पाक तेरी माटी में।" सनातन कोई धर्म नही ये हिन्दूओ के रगों में है।हमको मिटाने वाले मिट गए इस भारत माँ की माटी में"।मेरे सनातन ने मेरे को एक बात सिखाई है मेरा देश ही मेरा धर्म है और धर्म ही मेरा देश है"।"जब जब भी कोई पापी पाकिस्तान सर उठेगा हम उसको भीतर जाकर जवाब दे आएंगे" आदि हास्य वंश की रचना सुनाकर श्रोताओं को देश सनातन धर्म से जोड़ा।कवियत्री निशा पण्डित ने श्रंगार रस कि कविता "हम ने जव भी नजरें फेर ली तेरी गलियों से तुम सांस लेना ही भूल गए।जब जब भी हम सांस लेंगे तेरा नाम मेरी हर धड़कन में होगा एक तू ही समझता नही ,इस दिल की क्या नादानी है।राजसमन्द क कवि सतीश आचार्य ने मोबाइल के गलत प्रभाव को अंकित करती कविता " ओ मोबाइल रो ढिबरो, दुनिया ने छलावा लागियो रे,साँचा ने झूठा ओ झूठा ने साँचा बतावा लागियो रे "गाकर लोगो को श्रोताओं को जागरूक किया।कवि सम्मेलन का संचालन एवं आभार गौरव पालीवाल कांकरोली द्वारा किया गया।मध्य रात्रि तक श्रोता कवियों की रचना सुनने के लिए मन्दिर परिसर में बैठे रहै।कवि सम्मेलन के अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष कैलाश मेवाड़ा, सिद्धि विनायक समिति अध्यक्ष मनोहर सिंह राठौड़, समाजसेवी दिलीप सिंह राव,राजेश पालिवाल, माधव सिंह पँवार,सुरेश मेवाड़ा,प्रदिप सिंह राठौड़, अर्जुन लाल टेलर,पार्षद सुरेश खींची, प्रकाश खटीक, जितेंद्र सिंह, पंकज टेलर,,पुष्पेंद्र जांगिड़,नारायण सिंह पँवार,अमरसिंह तंवर, निखिल टेलर,भूपेंद्र सिंह ,विनोद सेन,ललित मेवाड़ा, पंकज बागवान,प्रभु प्रकाश, कैलाश ,आकाश, अनिल,अंकित कोठारी,दीपक मेवाडा, देवेश मेवाडा,सुरेश सोनी, सहित नगरवासी उपस्थित रहे।
