स्वयं मूर्ति लिए विराजित क्यारा के बालाजी, परिंदों के लिए रोज डाली जाती है 6 बोरी मक्का

स्वयं मूर्ति लिए विराजित क्यारा के बालाजी, परिंदों के लिए रोज डाली जाती है 6 बोरी मक्का
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भीलवाड़ा (प्रकाश)।    पुर के दक्षिण में दक्षिणमुखी क्यारा के बालाजी अपने आप में चमत्कारी है। क्यारा के बालाजी के रूप में लोकप्रियता मिली। जमीन के ऊपर से 22 फीट ऊंची तथा आठ फीट चौड़ी चट्टान, जो सीधी खड़ी है। उस पर 13 फीट लम्बाई स्वयं मूर्ति लिए विराजित हैं। उन दिनों जब मुगल सेनाएं हल्दीघाटी की ओर कूच कर रही थी, तब भी यह मूर्ति इसी रूप में विराजमान थी।  क्यारा के बालाजी मन्दिर के पुजारी सोहन वैष्णव बैरागी ने बताया कि क्यारा के बालाजी है बहुत पुरानी मूर्ति है , चट्टान के ऊपर हनुमान जी की मूर्ति है। कई समय पहले उस स्थान पर महात्मा तपस्या करता था। भगवान यहां आकर विश्राम किया था अचानक उसकी छाया छप गई। चट्टान के ऊपर लेपन कर दिया हर 15 दिन में सिंगर किया जाता है। इस मंदिर की मान्यता यह है कि जो भी वक्त मनोकामना लेकर आता है उसकी मनोकामना पूरी करता है बालाजी । हमारा परिवार 25 वर्षों से अधिक से मन्दिर की सेवा कर रहा है। दूर-दूर से भक्ति मंदिर में दर्शन करने आते हैं। 
मंदिर परिसर में हजारों परिंदों के लिए आहार का स्थल भी है। यहां रोज करीब दो घंटे तक दोपहर 3 से शाम 5 बजे तक हजारों की संख्या में कबूतर, तोते व अन्य पक्षी दाना चुगने पहुंचते हैं। इनके लिए करीबन 6 बोरी मक्का डाली जाती है। क्यारा का बालाजी मंदिर में हनुमानजी के साथ मार्बल के बने 8 टन भारी विशाल घोटे की भी पूजा होती है। दो मार्बल पत्थर से तैयार यह घोटा प्रदेश में पहला है। पिता ओंकारलाल झाड़ोलिया की स्मृति में अप्रैल 2013 में भक्त मनोज शर्मा ने घोटे की स्थापना कराई थी। इसके बाद उपनाम ही गोटेवाला पड़ गया। शर्मा बताते हैं कि कुल 8 टन मार्बल से बने घोटे। में 6 टन वजन गोलाई वाले ऊपरी हिस्से का है व 2 टन का हत्था है।

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