उदयपुर को ईएसजी फ्रेंडली बनाने सामूहिक प्रयासों पर हुआ मंथन

उदयपुर, । एनवायरमेंट, सोशल, गवर्नेंस (ईएसजी) पर मीडिया जागरूकता कार्यशाला बुधवार को ग्रीन पीपल सोसायटी, उदयपुर के तत्वावधान में वन भवन सभागार में मुख्य वन संरक्षक उदयपुर आरके जैन के आतिथ्य में आयोजित हुई। इसमें ईएसजी की अवधारणा पर चर्चा करने के साथ ही उदयपुर को ईएसजी फ्रेण्डली बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर मंथन किया गया।
प्रारंभ में ग्रीन पीपल सोसायटी के अध्यक्ष व सेवानिवृत्त सीसीएफ राहुल भटनागर ने स्वागत करते हुए सामान्य परिचय दिया। उन्होंने बताया कि ईएसजी महत्वपूर्ण मुद्दा है तथा आने वाले समय में बिजनेस से लेकर सभी फील्ड में यह अनिवार्य मापदण्ड के रूप में प्रचलित होगा। इसके लिए हमें अभी से तैयार होने की आवश्यकता है। इसी कड़ी में उदयपुर में ईएसजी को लेकर जागरूकता बढ़ाने ग्रीन पीपल सोसायटी, हेलो किसान, गीतांजली इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग तथा विद्यापीठ के साझे में मुहिम शुरू की जा रही है। संचालन सोसायटी के शरद श्रीवास्तव ने किया। कार्यशाला में सेवानिवृत्त आईएएस विक्रमसिंह, सोसायटी के वीएस राणा, इंद्रजीत माथुर प्रतापसिंह चुण्डावत, इस्माइल अली दुर्वा, आशु गर्ग, प्रो. शरद श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक जनसंपर्क डॉ. कमलेश शर्मा, अरूण सोनी सहित मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
क्या है ईएसजी, क्यों है जरूरी :
कार्यशाला में जयपुर से आए विषय विशेषज्ञ मुकेश गुप्ता तथा पूर्व में यूनिसेफ जुड़े एसएन दवे ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से जुडे़ मुद्दों को कम करने, संसाधनों के विवेकहीन उपभोग के बजाए सचेत और सुझबुझ से उपयोग को बढ़ावा देने, सामाजिक दायित्वों को समझकर निर्वहन करने के उद्देश्य से ईएसजी की परिकल्पना को विश्वस्तर पर स्वीकार किया गया है। ईएसजी से अभिप्राय पर्यावरण, सामाजिक और शासन संबंधी मापदण्ड से है। ईएसजी की परिकल्पना को करीब 20 वर्ष पूर्व संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रारंभ किया गया था। बाद में इसे सतत विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ा गया। भारत सरकार ने भी ईएसजी मापदण्ड निर्धारण और पालना को लेकर कटिबद्धता जताई है। इसके लिए सेबी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। केबी ने देश में मार्केट केपिटाइलेशन के अनुसार टॉप 1000 कंपनियों को ईएसजी रेटिंग कराने का नियम बनाया है। इसके लिए क्रेडिट रेकिंग एजेंसी की तरह ईजीएस रेटिंग एजेंसी बनाने के लिए भी नियम बनाए हैं। इसके तहत कंपनियों को अपने संस्थान में पर्यावरण, सामाजिक एवं शासकीय मानकों को पूरा करना होगा, उसकी ऑडिट करानी होगी। इस आधार पर उन्हें ए, एए, एएए, बी, बीबी, सी, सीसी प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। यह प्रमाण पत्र उनके संस्थान की ओवरऑल विश्वसनीयता के द्योतक होंगे, जिससे उनके बिजनेस में इजाफा होगा। आने वाले समय में कंपनियों का बिजनेस और गुडविल ईएसजी मानकों पर ही निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि उदयपुर को प्रकृति का वरदान है। यहां होटल, खनन से जुड़े उद्योग, शिक्षण संस्था के साथ मिलकर ईएसजी की की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उन्होंने मीडिया संस्थानों से ईएसजी के संबंध में व्यावसायिक संस्थानों, आमजन आदि को जागरूक करने की अपील की। विशेषज्ञों ने बताया कि ईएसजी लागू होने पर विश्व भर में रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। अकेले भारत में ही देश की टॉप 1000 कंपनियों में औसतन 40 से 50 नई नौकरियों के अवसर बढेंगे। युवाओं को ग्रीन केरियर बनाने के अवसर मिलेंगे।
थोट ग्लोबल, एक्शन लोकल :
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कि सीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) आरके जैन ने कहा कि व्यक्ति के थोट (विचार) ग्लोबल होने चाहिए, लेकिन एक्शन लोकल लेवल से शुरू होना चाहिए। ईएसजी के संदर्भ में भी यही सिद्धान्त काम करता है। ईएसजी विश्वव्यापी सोच है। उसे धरातल पर उतारने के लिए शुरूआत स्थानीय स्तर से करनी होगी। सभी मिलकर साझा प्रयास करें तो यह संभव है। उन्होंने पर्यावरण का महत्व बताते हुए कहा कि आमतौर पर एक वृक्ष की कीमत भौतिकता के आधार पर आंकी जाती है, जैसे किसी एक पेड़ को काटने पर उसकी लकड़ी की कीमत कुछ हजार में तय हो जाती है, जबकि उससे प्राप्त होने वाली ऑक्सीजन, वार्म कंट्रोल, जैव विविधता संरक्षण जैसे अप्रत्यक्ष परिलाभों को गिना ही नहीं जाता। एक मानक के मुताबिक एक पेड़ की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष उपयोगिता को यह रूपए में आंका जाए तो यह करीब 37 लाख रूपए होती है। एक मनुष्य अपने पूरे जीवन काल में (जन्म से मृत्यु तक) कुल 8 पेड़ों का उपयोग करता है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन काल में कम से कम 8 पेड़ लगाकर उन्हें पूर्ण बड़ा करना ही चाहिए। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें तो यह धरती मां का ऋण है, जिसे चुकाया जाना चाहिए, अन्यथा मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती।
व्यावसायिक संस्थानों को देंगे ट्रेनिंग
कार्यशाला में गीतांजली इंस्टीट्यूट के प्रो.एनएस राठौड़ ने बताया कि उदयपुर में ईएसजी को लेकर चलने वाले जागरूकता अभियान में गीतांजलि इंस्टीट्यूट और राजस्थान विद्यापीठ ट्रेनिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके लिए व्यावसायिक संस्थानों, शिक्षण संस्थानों आदि को एकजूट करना होगा। इंस्टीट्यूट ट्रेनिंग के साथ-साथ रिसर्च सिस्टम भी उपलब्ध कराएगा, ताकि यहां के लोगों को ईएसजी के संबंध में एजुकेट किया जा सके।
