चीन ने अमेरिका को कहा खलनायक, जापान से की US के तकनीकी प्रतिबंधों का समर्थन न करने की अपील

एशिया की दो धुर विरोधी अर्थव्यवस्थाओं चीन और जापान के विदेश मंत्रियों ने आपस में मुलाकात की है। कई सालों बाद जापान के विदेश मंत्री चीन के दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरान, चीन के विदेश मंत्री किन गैंग ने रविवार को अपने जापानी समकक्ष योशिमासा हयाशी से अमेरिका के तकनीकी प्रतिबंध का समर्थन ना करने का आग्रह किया है। अमेरिका के नेतृत्व वाली इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिए टोक्यो के समर्थन पर चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि वह बीजिंग के खिलाफ अमेरिकी तकनीकी प्रतिबंधों का समर्थन करके किसी खलनायक मदद न करें।
खलनायक की नहीं करनी चाहिए मदद
चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका ने जापानी सेमीकंडक्टर उद्योग को क्रूरता से दबाने के लिए धमकाने वाली रणनीति का इस्तेमाल किया है। इसके बाद अब वह हमारे खिलाफ अपनी पुरानी चालें दोहरा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किन ने कहा कि जापान ने उस दर्द को झेला है। ऐसे में इसे किसी ऐसे खलनायक की मदद नहीं करनी चाहिए जो बुराई करने में उसका साथ चाहता हो।
जापान से की साथ आने की अपील
चीनी विदेश मंत्री किन ने अपने जापानी समकक्ष से दोनों देशों के बीच जारी विवाद को खत्म करने और आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को बाधाओं को दूर करना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। इस दौरान किन ने यह भी कहा कि कुछ देशों के साथ आना और नियंत्रण स्थापित करना संघर्षों को प्रबंधित करने के लिए सहायक नहीं है। चीन की यह टिप्पणी अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति के लिए जापान के समर्थन के संदर्भ में आई है।
क्वाड का किया विरोध
चीन ने अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया वाले क्वाड का विरोध करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अपने उदय को रोकना है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और मैत्रीपूर्ण सहयोग चीन-जापान संबंधों के लिए एकमात्र सही विकल्प हैं।
उन्होंने कहा कि विरोधाभासों और मतभेदों के सामने, गुट बनाने, बयानबाजी के माध्यम से दबाव डालने से समस्या को हल करने में मदद नहीं मिलेगी, बल्कि केवल एक दूसरे के बीच मनमुटाव और गहरा होगा। उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि जापान चीन के बारे में सही समझ स्थापित करेगा। साथ ही बातचीत और संचार को मजबूत करने और व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए चीन के साथ मिलकर काम करेगा। गौरतलब है कि जापान द्वारा यह घोषणा किए जाने कि वह जुलाई से सेमीकंडक्टर उपकरण निर्यात को प्रतिबंधित कर देगा, के दो दिन बाद दोनों मंत्रियों के बीच यह वार्ता हुई है।
2019 के बाद जापानी विदेश का यह पहला दौरा
साल 2019 के बाद से किसी जापानी विदेश मंत्री का यह पहला चीन दौरा है। आखिरी बार हयाशी के पूर्ववर्ती तोशिमित्सु मोटेगी बीजिंग गए थे। इसके बाद कोविड-19 के कारण चीन ने अपनी सीमाओं को बंद कर दिया था। चीन ने इस साल की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए देश को फिर से खोल दिया था।
जापानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हयाशी की किन के साथ बातचीत लगभग चार घंटे तक चली। यह पहले से तय कार्यक्रम से ढाई घंटे से अधिक थी। इस दौरान दोनों मंत्री दक्षिण कोरिया के साथ त्रिपक्षीय वार्ता फिर से शुरू करने पर भी सहमत हुए। हयाशी ने प्रीमियर ली कियांग से भी मुलाकात की और शीर्ष चीनी राजनयिक वांग यी के साथ डिनर किया।
द्वीपों पर चीन, जापान और ताइवान करते हैं अपना दावा
पूर्वी चीन सागर में जापान के नियंत्रण वाले वाले द्वीपों को लेकर चीन और जापान के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। चीन इन द्वीपों पर अपना दावा करता है।
करीबी रक्षा संबंध रखते हैं जापान और ताइवान
इन द्वीपों को जापान द्वारा सेंकाकस के रूप में जाना जाता है, जबकि चीन ने उन्हें दियाओयू नाम दिया है। ताइवान भी इन द्वीपों पर दावा करता है। हालांकि, उसने किसी भी संघर्ष से बचने के लिए जापान के साथ समझौता किया है, क्योंकि जापान, ताइपे के साथ करीबी रक्षा संबंध रखता है। चीनी रक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित हॉटलाइन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों की नौसेनाओं और वायु सेनाओं ने अपने दावों पर जोर देने के लिए द्वीपों पर आक्रामक गश्त की थी।
